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International Tiger Day 2021: जानिए झारखंड के एक मात्र टाइगर रिजर्व के बारे में

Ranchi: दुनियाभर में 29 जुलाई के दिन विश्व बाघ दिवस मनाया जाता है. बाघ भारत के राष्ट्रीय पशु है जिसके बावजूद भारत में साल 2010 में बाघ विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गए थे. बाघों को संरक्षण देने और उनकी प्रजाती को विलुप्त होने से बचाने के लिए विश्व बाघ दिवस मनाया जाता है.

 

70 प्रतिशत बाघ केवल भारत में

बता दें कि दुनियाभर के मात्र 13 देशों में ही बाघ पाए जाते हैं, वहीं इसके 70 प्रतिशत बाघ केवल भारत में हैं. साल 2010 में भारत में बाघों की संख्या 1 हजार 7 सौ के करीब पहुंच गई थी. जिसके बाद लोगों में बाघों के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए साल 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में एक शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया. जिसमें हर साल अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाए जाने की घोषणा की गई. इस सम्मेलन में कई देशों ने 2022 तक बाघों की संख्या को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है.

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झारखंड में टागइर रिजर्व

झारखंड का पलामू टाइगर रिजर्व एकमात्र ऐसा टाइगर रिजर्व है, जहां बाघों के होने का अनुमान है. झारखंड में कितने बाघ हैं, इसका सही अनुमान नही है. कुछ समय पहले तक बाघों की अच्छी खासी आबादी के लिए देश व दुनिया में गौरवान्वित महसूस करता रहा पलामू टाइगर रिज़र्व इन दिनों हाथी, हिरण , बंदर और तेंदुओं के लिए स्वर्ग बना हुआ है. यहां पर्यटक आते हैं और उछलते दौड़ते बन्दरों के झुंड के साथ सेल्फी लेते हैं .

 

रिजर्व में पांच बाघ होने का अनुमान

पलामू टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या 5 से ज्यादा होने का अनुमान लगाया जा रहा है. इसका सही अनुमान लगाने के लिए हर 4 साल में एक बार टाइगर रिजर्व में बाघों की गिनती की जाती है परंतु बाघों की गिनती का अनुमान लगाने की कवायद भी सही तरीके से शुरू नहीं हो सकी है . आपको बताते चले कि पिछली बार 14 फरवरी 2019 को देखा गया था. उसके बाद से टाइगर रिजर्व प्रबंधन को बाघों की तस्वीर और पंजों के निशान नहीं मिले हैं . वन के मुख्य संरक्षक कुमार आशुतोष की मानें तो हर संभव कोशिश की जा रही है कि यहां टाइगरों की किसी तरह वापसी हो सके . बाघो का सही अनुमान लगाने के लिए कैमरा ट्रैप लगाया जाना है , उसके बाद बाघों के स्कैट को वाइल्ड लाइफ ऑफ इंडिया को भेजा जाएग . फिर मिलान और डीएनए जांच के बाद बाघों की संख्या पता चल पाएगी.

 

अभी तक बाघ को नहीं देखा गया बाघ

यह गिनती जुलाई 2022 से पहले पूरी कर लेनी है . हर चार वर्ष में एक बार पूरे देश में बाघों की गिनती शुरू होती है , इससे पहले 2018 में बाघों की गिनती हुई थी.वही ट्रैकर की माने तो लॉकडाउन के अंतराल में पलामू टाइगर रिजर्व में हर एक प्रकार के जानवर की बढ़ोतरी हुई है पर अभी तक बाघ को नहीं देखा गया है . वहीं स्थानीय ग्रामीणों की माने तो इस पलामू टाइगर रिजर्व में बाघ होने की सूचना तो मिली है पर अभी तक उन्होंने भी नहीं देखा है .

 

1974 में शुरु हुआ टाइगर प्रोजेक्ट

1974 में पलामू टाइगर प्रोजेक्ट शुरू हुआ था तो बताया गया था की 50 बाघ हैं. 2005 में जब बाघों की गिनती हुई तो बाघों की संख्या घटकर 38 हो गई. 2007 में जब फिर से गिनती हुई तो बताया कि पलामू टाइगर प्रोजेक्ट में 17 बाघ हैं. 2009 में वैज्ञानिक तरीके से बाघों की गिनती शुरू हुई तो बताया गया कि सिर्फ आठ बाघ बचे हैं. उसके बाद से कोई भी नया बाघ रिजर्व एरिया में नही मिला. 2018 में हुई जनगणना में पीटीआर के इलाके में बाघों की संख्या शून्य बताई गई.

 

रिजर्व के बीच से गुजरती रेल लाइन

पलामू टाइगर रिजर्व 1,026 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है जबकि इसका कोर एरिया 226 वर्ग किलोमीटर में हैं. रिजर्व के पूरे इलाके में 250 से अधिक गांव हैं. टाइगर प्रोजेक्ट के कोर एरिया में नौ गांव हैं. टाइगर रिजर्व के बीच से हाइवे और रेलवे लाइन गुजरती है. प्रोफेसर डीएस श्रीवास्तव बताते है कि पीटीआर में मानव गतिविधि काफी अधिक है. डेढ़ लाख से भी अधिक मवेशी चरने के लिए पीटीआर के इलाके में दाखिल होते हैं.

 

 

 

 

 

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