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अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल प्लेयर संगीता सोरेन ईंट भट्ठा में काम कर परिवार चलाने को मजबूर

भूटान, थाईलैंड जाकर खेल चुकी और जीत भी हासिल कर चुकी है

Anil Pandey

Sanjeevani

Dhanbad : बाघामारा की अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी संगीता कुमारी उपेक्षा की शिकार है. रगुणी बासमुड़ी की रहने वाली संगीता को खुद मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने तीन से चार महीने पहले ट्वीट कर सरकारी मदद, सरकारी नौकरी का आश्वासन दिया था. लेकिन वह अब तक पूरा नहीं हो पाया है.

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नतीजन संगीता ईंट भट्ठा में तप कर अपने परिवार के लिये दो जून की रोटी का जुगाड़ कर रही है. कोरोना काल मे जारी लॉकडाउन में दिहाड़ी मजदूरी करने वाले बड़े भाई को कोई काम नहीं मिल रहा है.

जिस कारण परिवार का पूरा बोझ संगीता पर ही आ गया है. पिता दुबे सोरेन को ठीक से दिखाई नहीं देता, मां भी अपनी खिलाड़ी बेटी के साथ ईंट भट्ठा जाती है.

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बाघमारा प्रखंड की रेंगनी पंचायत के बांसमुड़ी गांव की रहनेवाली संगीता ने साल 2018-19 में अंडर 17 में भूटान और थाईलैंड में हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर फुटबॉल चैंपियन में खेला था और झारखंड का मान बढ़ाया था. संगीता ने जीत के साथ ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया था.

संगीता के पिता ने कहा कि उन्हें उमीद थी कि उसकी बेटी फुटबॉल की अच्छी खिलाड़ी है तो सरकार कोई नौकरी देगी. लेकिन कुछ नहीं मिला है. ईँट भट्टा में उसकी बेटी को काम करना पड़ रहा है. यहां के विधायक मथुरा महतो ने भी कोई मदद नहीं की है.

संगीता कहती हैं कि परिवार को देखना भी जरूरी है, इसलिए ईंट भट्ठा में दिहाड़ी मजदूरी करती हूं. किसी तरह घर का गुजर बसर चल रहा है. इन सभी कठिनाइयों के बावजूद संगीता अपनी फुटबॉल की प्रैक्टिस नहीं छोड़ती हैं. सुबह साढ़े 6 बजे उठकर प्रतिदिन वह मैदान में प्रैक्टिस करती हैं.

संगीता ने चार महीने पहले सीएम हेमंत सोरेन को ट्वीट कर मदद मांगी थी, जिसपर संज्ञान सीएम संज्ञान लेते हुए मदद का आश्वासन दिया था. लेकिन अब तक संगीता को किसी भी प्रकार की मदद नहीं मिली है.

सही सम्मान नहीं मिलने के कारण यहां की खिलाड़ी दूसरे प्रदेश से खेलने चली जाती है. हर खिलाड़ी को अच्छा भोजन, प्रैक्टिस की जरूरत है. लेकिन यहां की सरकार खिलाड़ियों के प्रति गम्भीर नहीं है.

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