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बीजेपी का इनटरनल सर्वेः डेढ़ दर्जन विधायकों के टिकट रडार पर, दल बदल कर आये विधायकों पर गिर सकती है गाज

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pravin kumar

Ranchi:  झारखंड में विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी एक साथ कई मोर्चे पर काम कर रही है. राज्य में पार्टी चुनाव जीतने के साथ सरकार बनाने के लिए हर संभावना को तलाश रही है. पार्टी हर चूक की गूजांइश खत्म करने की रणनीति पर काम हो रही है.

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पार्टी ने सीटिंग एमएलए के परफॉर्मेंस की भी समीक्षा की है. विधायकों के परफॉर्मेंस को लेकर सर्वे भी कराये जा चुके हैं. सूत्रों के मुताबिक एक सर्वे बीजेपी पार्टी की ओर से वहीं दूसरा सर्वे संघ की ओर से और तीसरा सर्वे ओम माथुर झारखंड विधानसभा चुनाव प्रभारी के द्वारा स्वतत्रं एजेसी से भी कराया गया है. 65 प्लस लक्ष्य को पाने के लिए बीजेपी ने सरकार के प्रति एंटी इनकंबेंसी को कम करने के लिए पार्टी के कुशल चुनाव प्रबंधक ओम माथुर को झारखंड विधानसभा चुनाव का प्रभारी बनाया है.

और नंदकिशोर यादव को सह प्रभारी बनाया है. इन दोनों को वहीं भेजा जाता है जहां पार्टी को क्राइसिस नजर आती है.

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डेढ़ दर्जन से अधिक सीटिंग विधायकों की सीट पर हो सकते हैं नये चेहरे

सर्वे रिपोर्ट में विपक्षी दलों के उन नेताओं का भी डाटाबेस तैयार किया गया है जिसे पार्टी में लाने से चुनाव में मजबूती मिलने के असार हैं. पार्टी कुछ बिल्कुल नये चेहरे को भी चुनाव में सामने ला सकती है. जो राजनीति में नहीं हैं. 2014 के मुकबले इस बार पार्टी अधिक महिलाओ को टिकट दे सकती है.

सर्वे रिपोर्ट के अनुसार पार्टी के डेढ़ दर्जन से अधिक विधायकों के स्थान पर नये चेहरे को उम्मीदवार बनाया जा सकता है. सर्वे रिपोर्ट में झारखंड विकास मोर्चा से बीजेपी में शामिल होने वाले अधिकांश विधायकों के टिकट रडार पर हैं.

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टिकट रडार पर होने की मुख्य वजह

झाविमो से बीजेपी में शामिल होने वाले 6 विधायको के टिकट पर आफत आ सकती है. दल बदल का मामला न्यायलाय में होने से, विधायकों की कार्यशैली, बीजेपी में शामिल होने के बाद पार्टी व संगठन के साथ सामंजस्य, बदले हलात में विधायको की लोकप्रियता, आजसू-बीजेपी गंठबंधन और अन्य विपक्षी दलों के नेता के बीजेपी में शमिल होने की संभावना के साथ-साथ बीजेपी का इनर्टनल सर्वे रिपोर्ट भी टिकट कटने का आधार बन सकता है.

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चंदनकियारी से अमर बाउरी: अमर बाउरी ने 2014 में पहली बार चुनाव जीता. इससे पहले वह 2009 में भी झाविमो के टिकट पर चुनाव लड़कर आजसू पार्टी से हार गये थे. 2014 में उन्होंने पूर्व मंत्री उमाकांत रजक को हराया.

बीजेपी में शामिल होने के बाद सरकार में उन्हें भूमि सुधार राजस्व मंत्री बनाया गया. इस सीट पर आजसू की दावेदारी है. गठबंधन में यह टिकट आजसू के पाले में जाने की संभावना है.

सारठ से रणधीर सिंह : रणधीर सिंह सरकार में कृषि मंत्री हैं. सर्वे रिपोर्ट में इनके काम काज के तरीके और क्षेत्र में पकड़ को लेकर संतोषजनक राय समाने नही आयी है. रणधीर सिंह 2014 में पहली बार चुनाव जीते.

इससे पहले 2009 के चुनाव में वह सारठ विधानसभा क्षेत्र से लोकतांत्रिक समता दल से चुनाव लड़े थे. इस चुनाव में झामुमो के शशांक शेखर भोक्ता को जीत मिली थी. साल 2014 में रणधीर सिंह झाविमो के टिकट पर चुनाव जीते.

हटिया से नवीन जायसवाल : दल बदल के घेरे में आये नवीन जायसवाल ने आजसू पार्टी से राजनीति की शुरुआत की. 2009 में हटिया विधानसभा चुनाव में तीसरे नंबर पर थे. कांग्रेस के विधायक गोपाल शरण नाथ शाहदेव के निधन के बाद हटिया की रिक्त सीट पर 2012 में हुए उपचुनाव में नवीन जायसवाल आजसू पार्टी से चुनाव जीते. 2014 में नवीन जायसवाल ने झाविमो का दामन थामा और चुनाव लड़े.

नवीन जायसवाल ने बीजेपी की सीमा शर्मा को हराकर दोबारा इस सीट पर जीत हासिल की. चुनाव जीतने के बाद झाविमो छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गये.

बरकट्ठा से जानकी यादव : बरकट्ठा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीते. 2005 के चुनाव में वह राजद के टिकट से चुनाव लड़े थे. 2009 के चुनाव में भी वह झाविमो के टिकट पर चुनाव लड़े और वह दूसरे नंबर थे.

2104 में झाविमो ने जानकी यादव को फिर चुनाव लड़ाया. इस बार चुनाव जीतने के बाद वह बीजेपी में शामिल हो गये. फिलहाल जानकी यादव आवास बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं.

सिमरिया से गणेश गंझू : सिमरिया विधानसभा क्षेत्र से गणेश गंझू 2014 में पहली बार झाविमो के टिकट से चुनाव जीते. चुनाव जीतने के बाद वह भी बीजेपी में शामिल हो गये.

बाद में सरकार ने गणेश गंझू को मार्केटिंग बोर्ड का अध्यक्ष बनाया. 2009 में गणेश गंझू झामुमो के टिकट से चुनाव लड़े थे और वह दूसरे नंबर पर थे.

डालटनगंज से आलोक चौरसिया : आलोक चौरसिया भी पहली बार चुनाव जीतनेवालों में शामिल हैं. 2014 में झाविमो के टिकट से चुनाव लड़कर उन्होंने कांग्रेस के पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी को हराया. बीजेपी में शामिल होने के बाद सरकार ने आलोक चौरसिया को वन विकास निगम का अध्यक्ष बनाया.

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