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ट्रैफिक पुलिस को मिले इंटरसेप्टर वाहन बन गये हैं शो पीस, स्पीड लिमिट के दावे हो गए फेल

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Ranchi : झारखंड में  ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार के लिए ट्रैफिक पुलिस को इंटरसेप्टर वाहन दिये गये. जिससे सड़क पर वाहन चलाने वाले लोग नियमों का पालन करें. राजधानी की ट्रैफिक पुलिस को वाहन मिले 10 महीने से ज्यादा हो गए. लेकिन इस वाहन का अबतक पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं किया गया है.

बताया जा रहा है कि इंटरसेप्टर से पकड़े गए एक भी वाहन चालक को आजतक चालान नहीं भेजा गया है. इंटरसेप्टर वाहन सड़कों पर कभी कभार ही नजर आते हैं.

 बिना इस्तेमाल के बेकार हो रहे हैं वाहन

दरअसल इंटरसेप्टर के जरिए स्पीड लिमिट को तोड़ने वाले वाहनों को उपकरणों में कैद किया जाता है और उन्हें ई-चालान भेजा जाता है. लेकिन इसके बारे में बताया जा रहा है कि इसके संचालन की  तकनीक जानकारी पुलिसकर्मियों के पास नहीं है. यही वजह है कि करोड़ों रुपए के इंटरसेप्टर वाहन बिना इस्तेमाल के बेकार पड़े हैं.

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सड़कों पर स्पीड लिमिट का नहीं हो सका है निर्धारण

राजधानी रांची की कौन सी सड़क पर वाहनों की अधिकतम स्पीड क्या होगी, इसका निर्धारण अब तक नहीं किया जा सका है. तत्कालीन रांची ट्रैफिक एसपी संजय रंजन सिंह ने सितंबर 2018 में इंटरसेप्टर वाहन को सड़क पर उतारने से पहले ही कहा था कि, इंटरसेप्टर वाहन को समझने में थोड़ा वक्त लगेगा.

साथ ही उन्होंने कहा था कि ट्रायल के तौर पर वाहन को फिलहाल सड़क पर उतारा गया है. जिन सड़कों के लिए स्पीड लिमिट निर्धारित नहीं है, उनका निर्धारण भी शीघ्र हो जाएगा. लेकिन जब आजतक स्पीड लिमिट निर्धारित नहीं हो सका है तो वाहन का इस्तेमाल भी कैसे हो पायेगा.

स्पीड लिमिट के दावे हुए फेल

शहर में सड़क दुर्घटनाएं लगातार बढ़ ही रही हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह वाहनों का स्पीड ज्यादा होना है. हालांकि ट्रैफिक पुलिस ने इस बारे में कई बार दावा भी किया कि, एक महीने के भीतर ही वाहनों की स्पीड लिमिट कर दी जाएगी. लेकिन सारे दावे फेल हो गए हैं. स्पीड पर लगाम कसने के मकसद से ही इंटरसेप्टर को रोड पर उतारा गया था. पिछले साल सितंबर से ही इंटरसेप्टर वाहन सड़कों सिर्फ घूमती हुई ही नजर आती हैं.

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झारखंड पुलिस ने खरीदे थे छह इंटरसेप्टर वाहन

झारखंड में प्रथम फेज में करोड़ों की लागत से छह इंटरसेप्टर गाड़ियां खरीदी गई थीं. इनमें दो गाड़ियां रांची के लिए, एक-एक गाड़ियां जमशेदपुर, धनबाद, हजारीबाग व बोकारो को दी गई हैं.

अर्टिगा कार पर अत्याधुनिक कैमरे लगे हैं, जो निर्धारित रफ्तार तोड़ने वाली गाड़ियों को पकड़ेंगे व उनका चालान काटेंगे. लेकिन बिना उपयोग के यह वाहन बेकार साबित हो रहा है.

क्या है इंटरसेप्टर वाहन की खासियत

इंटरसेप्टर वाहन पर स्पीड गन कैमरा लगा हुआ है. वाहन में अर्टिगा कार के उपर पर लगाया गया है.जो अपने आसपास तेज गति से गुजरने वाले वाहनों की स्पीड को कैच कर लेता है. यदि स्पीड से ज्यादा वाहन की गति हुई तो वाहन चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. इसमें ऑटोमेटिक चालान कट जाएगा.

इसके अलावा तेज गति से वाहन चलाने वालों के खिलाफ उनके रजिस्टर्ड मोबाइल पर यह संदेश भी दे दिया जाएगा. उस संदेश में लिखा होगा कि काफी तेज गति से आपने वाहन को चलाया है. इसलिए फाइन भरना होगा. अगर यह गलती तीन बार हो जाती है तो उनका ड्राइविंग लाइसेंस भी कैंसल किया जा सकता है.

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