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एकीकृत व अन्य पारा शिक्षकों, केजीवीवी, बीआरपी-सीआरपी कर्मियों को अब हेमंत सरकार देगी 5 लाख का बीमा

Ranchi  : समग्र शिक्षा के अधीन कार्यरत संविदाधारी कर्मी वेलफेयर सोसाइटी के सदस्यों के लिए हेमंत सोरेन सरकार ने एक बड़ा फैसला किया है. राज्य सरकार ने इनके लिए एक कल्याण कोष का गठन किया है. जिसके तहत एकीकृत व अन्य पारा शिक्षकों, केजीवीवी, बीआरपी-सीआरपी कर्मियों को अब 5 लाख बीमा राशि का लाभ मिल सकेगा. इस कोष नीति के तहत उपरोक्त कर्मियों के कार्यकाल के दौरान सामान्य मृत्यु होने पर उनके आश्रित पति/पत्नी अथवा नाबालिक बच्चे व आश्रित माता-पिता को सहायता प्रदान की जानी है. यह बात मुख्यमंत्री ने सोमवार को झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद, रांची के द्वारा आयोजित “समग्र शिक्षा के अधीन कार्यरत संविदाधारी कर्मी वेलफेयर सोसाईटी” की पहली बैठक में कहीं.

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हेमंत सोरेन ने कहा कि इस निमित्त बीमा के लिए निविदा प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया गया है. इस निमित्त ग्रुप इंश्योरेंस एक्सीडेंटल बीमा योजना के तहत 5 लाख तक का लाभ अधिकतम 80 रुपए प्रति व्यक्ति वार्षिक प्रीमियम राशि पर दिये जाने का प्रावधान किया गया है. बैठक में मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, विकास आयुक्त केके खंडेलवाल, शिक्षा सचिव राहुल शर्मा, वित्त सचिव हिमानी पांडे, राज्य परियोजना निदेशक शैलेश चौरसिया, प्राथमिक शिक्षा निदेशक भुवनेश प्रसाद सिंह, यूनिसेफ प्रतिनिधि पारुल शर्मा सहित कई अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे.

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शिक्षा सचिव ने बताया कि नीति के तहत दुर्घटना में मृत्यु होने तथा स्थायी रूप से दिव्यांगता पर 5 लाख रुपए राशि की बीमा तथा अस्थायी दिव्यांगता की स्थिति में 2.50 लाख तक की राशि का कवरेज दिए जाने का प्रावधान किया गया है. सामान्य दिव्यांगता की स्थिति में असैनिक शल्य चिकित्सक की अनुशंसा पर दिव्यांगता प्रतिशत के आधार पर बीमा राशि तय करने का प्रावधान किया गया है. कल्याण कोष के सदस्यों को प्रदान किए जाने वाले लाभों में ऋण सहायता की भी व्यवस्था की गई है. इसके लिए राज्य सरकार द्वारा 10 करोड़ की कॉरपस फंड सूद की उपलब्ध संपूर्ण राशि पर ऋण देने का निर्णय लिया गया.

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सदस्य के पुत्र एवं पुत्री की उच्च शिक्षा के लिए तथा पुत्री के विवाह के लिए 50,000 से अधिकतम 2 लाख रुपए के ऋण का प्रावधान किया गया है. इसी तरह राज्य सरकार द्वारा घोषित असाध्य रोग के इलाज के लिए भी कल्याण कोष नीति में ऋण प्रावधान किया गया है. लाभार्थियों के 5 वर्ष तक सेवा अवधि रहने पर 25,000 रुपए, 5 वर्ष से अधिक तथा 10 वर्ष तक सेवा अवधि रहने पर 50,000 रुपए, 10 वर्ष से अधिक 15 वर्ष तक सेवा अवधि रहने पर 75,000 रुपए तथा 15 वर्ष से अधिक सेवा अवधि रहने पर 1 लाख रुपए की राशि ऋण स्वरूप प्रदान किए जाने की व्यवस्था प्रावधानित है.

शिक्षा सचिव ने जानकारी दी कि झारखंड राज्य असाध्य रोग उपचार योजना के तहत अधिकतम 5 लाख के उपचार की सुविधा का लाभ पूर्व से ही प्रदत है. चूंकि लाभुक सभी कर्मियों की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम है अतः ये सभी इससे लाभान्वित हो सकेंगे. इस योजना के तहत इलाज के लिए 5 लाख रुपए तक की राशि इलाज करने वाले अस्पताल को आरटीजीएस अथवा बैंक ड्राफ्ट के द्वारा भुगतान किया जाता है.

मुख्यमंत्री को यह जानकारी दी कि कल्याण कोष नीति में लाभुक सदस्यों के परिवारजनों के लिए आयुष्मान भारत गोल्डन कार्ड योजना के तहत वैकल्पिक आच्छादान की व्यवस्था की जा रही है. यह लाभ पूर्णता वैकल्पिक होगा. इसे वही लाभुक सदस्य प्राप्त कर सकेंगे जो इस हेतु अपना विकल्प देते हुए आवेदन करेंगे. आवेदन करने वाले लाभुक सदस्य की वार्षिक अनुदान से संभावित 900 रुपए प्रतिवर्ष यह राशि बीमा प्रीमियम की राशि के रूप में जमा करनी होगी. यह योजना प्रस्तावित सितंबर 2021 में सरकार द्वारा स्वीकृति प्रदान किए जाने पर ही लागू की जा सकेगी. बैठक में सदस्यों के सेवानिवृत्ति पर एकमुश्त लाभ से संबंधित निर्णय भी लिया गया.

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