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नगर निगम का निर्देश, चिन्हित मूर्ति विसर्जन पॉइन्ट पर ही करें मूर्ति विसर्जन

मूर्ति विसर्जन बाद पानी की गुणवत्ता होती है प्रभावित, इसे देख बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश का निगम ने दिया हवाला

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Ranchi : मूर्ति विसर्जन से नदी/तालाब/झील में होने वाले प्रदूषण को देख रांची नगर निगम ने विभिन्न पूजा समितियों को अपने चिन्हित विसर्जन स्थलों पर ही मूर्ति विसर्जन करने का निर्देश दिया है. इसके लिए निगम उक्त सभी जलस्त्रोतों के चिन्हित स्थलों पर बांस एवं लाल फिता से घेराबंदी कर मूर्ति विसर्जन पॉइन्ट बनाएगा. इस संदर्भ में सहायक लोक स्वास्थ्य पदाधिकारी ने एक आदेश जारी किया है. दूसरी और दूर्गा पूजा को देखते हुए आगामी 15 से 20 अक्टूबर तक विभिन्न पंडालों में टैंकर से पानी उपलब्ध कराने एवं बॉयो मोबाईल टॉयलेट लगवाने के कार्य के लिए वार्ड 20 स्थित नागाबाबा खटालों में विभिन्न चालकों की प्रतिनियुक्ति की गयी है.

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिया था निर्देश

मालूम हो कि पूजा बाद मूर्ति विसर्जन से नदी/तालाब/झील में होने वाले प्रदूषण को देखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक निर्देश दिया था. उसी निर्देश के आलोक में नगर निगम ने कहा कि हाल के महिनों में कई त्यौहार सामने हैं. जिसमें मूर्तियों का विसर्जन नदी/तालाब/झील में किया जाता है. इससे इन जलस्त्रोतों के पानी की गुणवत्ता प्रभावित होती है. इसे देख जरूरी है कि इन जलस्त्रोतों की गुणवत्ता प्रभावित न हो.

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कई चालकों की हुई प्रतिनियुक्ति

दुर्गापूजा के बाद शहर में फैलने वाली गंदगी निगम के लिए एक बड़ी चुनौती है, ताकि स्वच्छ भारत मिशन की उपलब्धियों को बनाया रखा जाए. इसके लिए निगम ने अपने अधीन कार्यरत चालक, स्वीपर एवं कुली को प्रतिदिन सुबह 6 बजे से अपने-अपने पालियों में विभिन्न पूजा पंडालों में प्रतिनियुक्त करने का निर्देश दिया है. इसके साथ वाटर टैंक और बॉयो मोबाइल टॉयलेट वैन के साथ कई चालाकों को वार्ड 20 के नागा बाबा खटाल में भी प्रतिनियुक्त किया गया है.

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बढ़ते प्रदूषण को देख दिए निम्न निर्देश

• निगम द्वारा चिन्हित कर बनाए मूर्ति विसर्जन पॉइंट पर ही विभिन्न पूजा समितियां विसर्जन करें. इस पॉइंट की घेराबंदी बांस एवं लाल फिता से की जाएगी.
• मूर्ति में इस्तेमाल होने वाले कृत्रिम आभूषण, वस्त्र, फूल-माला आदि सभी को इन विसर्जन पॉइंट पर प्रतिनियुक्त सुपरवाइजर एवं कर्मियों को पूजा समितियां उपलब्ध कराएं.
• विसर्जन की प्रक्रिया पूरी होने के 48 घंटे के अंदर विसर्जित मूर्तियों के अवशेष को निगम के कर्मचारी पानी से निकालें.
• निगम के संबंधित मल्टीपरपस सुपरवाइजर सभी आवश्यक संसाधनों के साथ विसर्जन स्थल पर मौजूद रहें. इस दौरान वे पूजा समितियों से समन्वय स्थापित कर मूर्तियों में उपयोग किये गये बॉयोडीग्रेबल एवं नन-बॉयोडीग्रेबल को अलग-अलग प्राप्त करें.

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