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हॉस्पिटल में चल रहा है आधार कार्ड बनाने का काम, बेड पर मरीजों के बजाय नजर आ रही है मशीन

वार्ड जहां मरीजों को लिटा कर उनका इलाज होना चाहिए उस स्थान में आधार कार्ड बनाने की मशीने और कागजात बिखरे पड़े है.

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Ranchi : मरीज स्वस्थ होने की कामना लिए अस्पताल पहुंचता है, लेकिन अस्पताल में इलाज के बजाय कोई अन्य कार्य हो रहा हो तो उससे मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ता है. कुछ ऐसा ही हाल हो चुका है. इन दिनों रातु रोड स्थित देवकमल हॉस्पिटल का हाल कुछ ऐसा ही हो चुका है. इस हॉस्पिटल में मरीजों का इलाज नहीं बल्कि लोगों का आधार कार्ड बनाया जा रहा है. अस्पताल के वार्ड में ही आधार कार्ड बनाने का काम चल रहा है जबकि अन्य कई स्थान खाली पड़े हुए है. वार्ड जहां मरीजों को लिटा कर उनका इलाज होना चाहिए उस स्थान में आधार कार्ड बनाने की मशीने और कागजात बिखरे पड़े है.

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अत्याधुनिक मशीनों से लैस इस अस्पताल का शुभारंभ वर्ष 2014 में किया गया था. नगर निगम के इस हॉस्पिटल का जीर्णोद्धार सांसद परिमल नाथवानी ने कराया था. इसके जीर्णोद्धार में लगभग 1 करोड़ 5 लाख रुपए खर्च आये थे. लेकिन विंडबना यह है कि करोड़ों रुपऐ के भवन में सभी सुविधा होते हुए भी हॉस्पिटल में मरीजों का ईलाज नहीं हो रहा.

उपायुक्त का है आदेश : आधार कर्मचारी

हॉस्पिटल में आधार कार्ड बनाने का कार्य कर रहे कर्मचारियों से जब पुछा गया कि वे किसके आदेश से आधार कार्ड बनाने का कार्य कर रहे हैं. बताया गया कि उपायुक्त ने आदेश दिया है. इसके बाद ही काम शुरु हुआ है. इसकी जानकारी हॉस्पिटल मैनेजमेंट को भी है. वहीं इस संदर्भ में जब डीसी राय महिमापत रे को इस मामले की जानकारी दी गई तो उन्होंने कहा कि इसमे कोई हर्ज नहीं है.

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हॉस्पिटल की शुरु से ही होती रही है उपेक्षा

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रातू रोड चौराहा के पास स्थित नगर निगम का यह हॉस्पिटल शुरु से ही उपेक्षा का शिकार होता रहा है. पहले तो कई सालों तक यह हॉस्पिटल बंद रहा. जब इसे चालू करने की कोशिशें शुरू हुई, तो कोई इसके लिए कोई आगे नहीं आया. अंतत: देवकमल हॉस्पिटल के संचालक अनंत सिन्हा ने इसे संचालित करने की जिम्मेवारी ली, लेकिन इस हॉस्पिटल का संचालन सफलतापूर्वक अभी तक नहीं किया जा सका. हॉस्पिटल में काम करने वाले कर्मचारी बताते है कि हॉस्पिटल में मरीज ही नहीं आते. जबकि यहां सभी प्रकार के बीमारियों का ट्रीटमेंट मामूली से फीस में हो जाता है. हॉस्पिटल में हर तरह की आधुनिक सुविधायें भी उपलब्ध है. कर्मचारियों ने बताया कि हॉस्पिटल में प्रतिदिन मात्र 4 या 5 पेंशेट्स ही आते है.

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हॉस्पिटल में समय नहीं देते डॉक्टर

इस हॉस्पिटल में ओपीडी के लिए सौ रुपए फीस है, लेकिन इसके बाद भी ट्रीटमेंट के लिए पेशेंट्स यहां नहीं आ रहे हैं. डेंटिस्ट डॉ अनुराग ने बताया कि लोगों को यह जानकारी ही नहीं है कि यहां इलाज होता है. लोगों तक यह जानकारी पहुंचाना बहुत जरुरी है. मालुम हो कि यह हॉस्पिटल वर्ष 2014 से ही संचालित हो रहा है. लेकिन चार वर्षों में भी इसके हालत में सुधार नहीं हुआ. इसकी सबसे बड़ी वजह है डॉक्टरों का न होना. हॉस्पिटल में पांच ओपीडी बनवाये गए थे. इसमे तीन ओपीडी ही चलाये जा रहे है, इसमे भी सिर्फ डेंटिस्ट अनुराग प्रतियुष एवं ईएनटी डॉ विनिता सिन्हा ही समय देते है. जी+1 निर्मित हॉस्पिटल में 20 बेड है, डॉक्टरों के लिए पांच चैंबर एवं दो ओटी का निर्माण कराया गया था. अब ओटी में ताला लटक चुका है.

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