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काफी प्रेरक हैं थ्री इडियट्स के माधवन (फरहान) की रियल कहानी, एक बेटा, एक प्रेमी, एक पति और एक पिता के रूप में देखकर

Sanjay Prasad
आर माधवन अपनी नई फिल्म रॉकेट्री को लेकर चर्चा में हैं. अमूमन विवादों से दूर रहने वाले माधवन इस फिल्म के विषय को लेकर काफी सुर्खियों में हैं. एक जुलाई को रिलीज होने जा रही इस फिल्म का इंतजार पूरा देश कर रहा है. तमिल और हिन्दी फिल्मों में अपनी अदाकारी का लोहा मनवा चुके माधवन इस फिल्म के लेखक, अभिनेता, निर्देशक और निर्माता भी है. बताया कि वे रोकेट्री पर पिछले तीन साल से काम कर रहे हैं. उन्होंने अपनी जिंदगी की कमाई लगा दी है. माधवन ने कहा कि यह फिल्म मैं पैसे के लिए नहीं बना रहा. मेरी कोशिश है कि दुनिया इसरो के उस वैज्ञानिक के बारे में जानें, उन्हें साजिश के तहत जेल भेज दिया गया. उन पर आरोप लगा कि उन्होंने पाकिस्तान को भारत के रॉकेट मिशन की अहम जानकारी देकर देश के साथ गद्दारी की. जब मैं नंबी नारायण सर से मिला, तो दंग रह गया. इस कहानी को सुनने के बाद मैंने अपनी सारी कमाई इसमें लगाने का फैसला लिया. अच्छी बात यह है कि पत्नी सरिता भी हमें सपोर्ट कर रही है. तो आइए जानते हैं जमशेदपुर में पले-बढ़े माधवन की जिंदगी के कुछ अहम पहलू को–
पिता इंजीनियर बनाना चाहते थे, लेकिन मैं क्लियर था कि क्या नहीं करना है
आर माधवन ने कहा कि आज भी सड़क किनारे बिकने वाले देसी भुट्‌टे उन्हें ज्यादा पसंद है और वे फैशिनेटिंग लगते है बशर्ते किसी महंगे होटल और रेस्तरां में जाकर खाने खाए. चेतन भगत के शो डीपटॉक में बात करते हुए माधवन ने कहा कि मैं छोटे से शहर जमशेदपुर में पला-बढ़ा. आज भी वैसा ही हूं, जैसा जमशेदपुर में था. कभी सपने में नहीं सोचा था कि जमशेदपुर के जिन क्लबों में अमित जी (अमिताभ बच्चन) की फिल्में देखता था, उनके साथ कभी काम करने का मौका भी मिलेगा. पिता टाटा स्टील में थे और वे अपने जॉब से काफी खुश और सन्तुष्ट थे. उनका सपना था कि मैं भी इंजीनियर बनूं. लेकिन स्कूल की पढ़ाई के दौरान ही मैं क्लियर था कि इंजीनियर नहीं बनना है और टाटा स्टील में नौकरी नहीं करनी है. क्या करना है, भले ही यह स्पष्ट नहीं था, लेकिन क्या नहीं करना है, वह साफ था. मुझे लगता है कि आप वह करें, जो करना चाहते हैं. यही कारण रहा कि जब राजकुमार हिरानी ने थ्री इडियट्स की स्टोरी सुनाई तो मैं सुनते ही कहा कि फरहान का रोल मैं करना पसंद करूंगा, क्योंकि फरहान और उसके पिता के बीच की जो बातचीत है, वह कमाल की है, वह भारत ही नहीं, दुनिया के हर पिता-पुत्र की कहानी है. इसलिए इस रोल को दिल से कर सका क्योंकि मेरी फितरत और सोच भी फरहान जैसी थी. फिल्म करते वक्त लगा नहीं कि मैं रोल कर रहा हूं.
मैंने बेटे पर भी अपनी महत्वाकांक्षा नहीं थोपी
यही कारण रहा कि जब मेरा बेटा बड़ा होने लगा तो मैंने उस पर अपनी महत्वाकांक्षा नहीं थोपी. उसे खुद एक्स्प्लोर करने दिया. 10 साल का था, तब ही सुबह में चार बजे जगकर स्विंमिंग पूल में प्रैक्टिस करने चला जाता था. पानी से उसके इस लगाव को देखकर मैं भी अचंभित था. मैंने उसे प्रोत्साहित किया. आज वह स्विंमिंग पूल में छह घंटा प्रैक्टिस करता है. लगभग 12 किलोमीटर रोज तैरता है. तैराकी के इस जुनून के चलते वह कई प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुका है. पैरेन्ट्स को भी बच्चों की पसंद के अनुसार आगे बढ़ने देना चाहिए.
भले ही नेपोटिज्म कर लो, लेकिन पब्लिक एक्सेप्टेंस होना जरूरी है
मुझे लगता है कि आप कुछ भी कर लो. अपने बेटे-बेटियों की जितना ग्रांड लेवल पर लांच कर लो, अगर पब्लिक उसे एक्सपेक्ट नहीं करेगी, तो फिर कुछ नहीं होगा. मेरा तो फिल्म जगत से दूर दूर का रिश्ता नहीं था. मैंने पूरी ईमानदारी और प्रतिबद्धता से मेहनत की, काम मिलता गया. जब मणिरत्नम की फिल्म मुझे मिली, मैं कोई स्टार नहीं था. बैक टू बैक ब्लॉक ब्लस्टर फिल्में होने के बाद भी मैं अपने ऊपर ग्लैमर के रंग को चढ़ने नहीं दिया. मैं कभी भी 100 करोड़ और पांच सौ करोड़ क्लब की रेस में नहीं रहा. मेरे लिए पैसे से ज्यादा यह चीज मायने रखती है वह हमारी जिंदगी में क्या बदलाव लाने जा रही है? यही कारण रहा कि दस साल पहले ही मैंने वैसी फिल्मों से दूरी बना ली, जिन फिल्मों के करने में माधवन नहीं दिखता था. मैं केवल पैसे के लिए फिल्म नहीं करना चाहता.
जब अपनी ही स्टूडेंट को दिल दे बैठे थे माधवन


फिल्मों में जाने से पहले ही माधवन अपनी स्टूडेन्ट सरिता बिरजे को दिल दे बैठे थे. माधवन को पब्लिक स्पीकिंग में काफी रूचि थी. डीबीएमएस इंग्लिश स्कूल जमशेदपुर में भी पढ़ाई के दौरान पब्लिक स्पिकिंग की कई प्रतियोगिताओं में भाग लेकर विजेता रहे. रोटरी एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत उन्हें कनाडा जाने का मौका मिला. कोल्हापुर में इलेक्ट्रॉनिक्स की पढ़ाई करने के बाद वे अपना कम्युनिकेशन क्लास चलाते थे. इसी कम्युनिकेशन क्लास में पढ़ाई करने सरिता आई थी. एयर होस्टेज के इन्टरव्यू की तैयारी को लेकर सरिता ने माधवन का क्लास ज्वाइन किया. लेकिन पढ़ाई के दौरान ही दोनों के बीच का प्यार परवान चढ़ता गया. इस बीच सरिता एयर होस्टेज भी बन गई और 1999 में दोनों ने शादी कर ली. शादी के बाद माधवन पत्नी के साथ 2000 में जमशेदपुर आए थे, जिसमें उन्होंने अपनी लव स्टोरी की पूरी कहानी बताई थी. इसके बाद रामजी लंदन वाले की शूटिंग को लेकर भी माधवन जमशेदपुर आए थे.

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