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रिम्स की संवेदनहीनता : मृत बच्चे के पास ही होता रहा जीवित बच्चे का इलाज

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Ranchi :  रिम्स में आदिम जनजाति के लोगों के इलाज के लिए विशेष व्यवस्था है. इलाज के दौरान मौत हो जाने पर शव को घर पहुंचाने की भी व्यवस्था रिम्स को ही करना है. लेकिन, मंगलवार को रिम्स में कुछ अलग ही नजारा सामने आया. रिम्स में गढ़वा और चतरा के दो बिरहोर बच्चों की मौत इलाज के दौरान रिम्स में हो गयी, जिसके बाद परिजन सुविधा पाने के लिए इधर-उधर भटकते रहे. परिजन अपने मृत बच्चे को ले जाने का सहारा तलाश रहे थे, लेकिन अस्पताल के कर्मचारी अपना पल्ला झाड़ते दिखे.

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बच्चे के शव के पास ही दूसरे बच्चे का इलाज करते रहे डॉक्टर

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रिम्स के चिकित्सकों की संवेदनशीलता इस कदर समाप्त हो चुकी है कि मृत पड़े बिरहोर बच्चे की बगल में ही एक अन्य बच्चे का फोटो थेरेपी मशीन रखकर इलाज किया जा रहा था. किसी ने निदेशक के उस आदेश का पालन करना सही नहीं समझा, जिसमें साफ हिदायत है कि इलाज के दौरान मौत के बाद 15 मिनट में शव को मॉर्चरी में रख दिया जाये, पर यहां तो लाश के पास ही दूसरे जीवित बच्चे का इलाज होता रहा.

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यह मामला शिशु वार्ड का है : उपाधीक्षक

रिम्स के उपाधीक्षक डॉ संजय कुमार ने अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह मामला शिशु वार्ड की कमान संभाल रहे सीनियर डॉक्टरों का है. इसमें मैं कुछ नहीं कह सकता. हालांकि, बाद में उन्होंने बिरहोर बच्चों के शवों को घर पहुंचाने का भरोसा दिलाया.

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