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महंगाई पर लगेगी लगाम: गेहूं के बाद अब चीनी निर्यात पर भी शिकंजा

New Delhi: महंगाई पर लगाम के मकसद से केंद्र सरकार ने मंगलवार की देर शाम दो बड़े फैसले लिए. गेहूं निर्यात पर पाबंदी के बाद अब चीनी निर्यात पर भी अंकुश लगा दिया है. देर रात सरकार ने चीनी निर्यात को सीमित करने की घोषणा की. वर्ष 21-22 के चालू चीनी सीजन (अक्टूबर-सितंबर) में सिर्फ 100 लाख टन तक ही चीनी निर्यात की जा सकेगी. इस फैसले के बाद एक जून से चीनी निर्यात के लिए व्यापार महानिदेशालय के साथ सार्वजनिक खाद्य वितरण विभाग के चीनी निदेशालय से भी मंजूरी लेनी होगी.

उपलब्ध जानकारी के अनुसार चालू सीजन में 78 लाख टन चीनी का निर्यात किया जा चुका है. अब सितंबर तक सिर्फ 22 लाख टन चीनी का निर्यात हो सकेगा. सरकार की ओर से बताया गया है कि सितंबर तक 100 लाख टन चीनी निर्यात के बाद भी देश में 60-65 लाख टन चीनी का स्टाक रहेगा, जबकि घरेलू स्तर पर 24 लाख टन प्रतिमाह की खपत है.

इधर, सोयाबीन व सूरजमुखी तेल के आयात पर एक सीमा तक शुल्क और सेस हटाने की घोषणा की. जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, वित्त वर्ष 2022-23 और 2023-24 में प्रत्येक वर्ष 20 लाख टन कच्चे सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के आयात पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआइसी) ने ट्वीट कर कहा कि इस कदम से महंगाई पर अंकुश लगेगा और आम आदमी को राहत मिलेगी. यहां उल्लेखनीय है की भारत अपनी जरूरत का 60 प्रतिशत खाद्य तेल आयात करता है.

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हाल में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से महंगाई दर में गिरावट का अनुमान लगाया जा रहा है. अप्रैल में खुदरा महंगाई दर 7.78 प्रतिशत रही, जो मई 2014 के बाद उच्चतम स्तर पर थी. मई में खुदरा महंगाई दर गिर कर सात प्रतिशत तक आने का अनुमान है. डीजल-पेट्रोल की कीमतों में की गई कटौती इसका प्रमुख कारण बताया जा रहा है.

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