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पिछड़ा वर्ग आरक्षण में असमानता, 25 प्रतिशत जातियां उठा रही हैं 97 प्रतिशत आरक्षण का लाभ

आरक्षण का सबसे ज्यादा लाभ उठाने वाली जातियों में यादव, कुर्मी, जाट (राजस्थान का जाट समुदाय सिर्फ भरतपुर और धौलपुर जिले का जाट समुदाय) सैनी, थेवार, एझावा और वोक्कालिगा जैसी जातियां शामिल हैं.

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NewDelhi : पिछड़ा वर्ग को मिले आरक्षण में घोर असमानता सामने आयी है. एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इस वर्ग की सिर्फ 25 प्रतिशत जातियां ही 97 प्रतिशत आरक्षण का लाभ उठा रही हैं.  बता दें कि इस वर्ग की 983 जातियों को आरक्षण का कोई लाभ नहीं मिल रहा है.  द इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर कहती है कि यह रिपोर्ट Commission of Examine Sub-Categorisation of OBCs की है.  जानकारी के अनुसार कमीशन का गठन अक्टूबर, 2017 में किया गया था.  इस कमीशन का कार्यकाल 31 मई, 2019 तक के लिए बढ़ाया गया है.  कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार, अतिरिक्त पिछड़ा वर्ग में आरक्षण का सबसे ज्यादा लाभ उठाने वाली जातियों में यादव, कुर्मी, जाट (राजस्थान का जाट समुदाय सिर्फ भरतपुर और धौलपुर जिले का जाट समुदाय) सैनी, थेवार, एझावा और वोक्कालिगा जैसी जातियां शामिल हैं. सूत्रों के अनुसार कमीशन ने मौजूदा रिपोर्ट तैयार करने के लिए 1.3 लाख केन्द्रीय नौकरियों, जो कि ओबीसी कोटा के तहत पिछले 5 सालों के दौरान दी गयी थी, उनका अध्ययन किया.  इस क्रम में आयोग ने केन्द्रीय यूनिवर्सिटीज, आईआईटी, एनआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे संस्थानों में हुए एडमिशन पर भी नजर रखी.

ओबीसी की 983 जातियों को आरक्षण का कोई लाभ नहीं मिला है

इस डाटा से जो बात निकलकर सामने आयी, वह यह कि जिन राज्यों में जातियों की जनसंख्या के हिसाब से ज्यादा कोटा दिया गया है.  उन राज्यों में जनसंख्या ज्यादा होने के बावजूद कोटे का लाभ जरुरी लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है.  रिपोर्ट के अनुसार ओबीसी की 983 जातियों को जहां आरक्षण का कोई लाभ नहीं मिला है, वहीं 994 जातियां सिर्फ 2.68 प्रतिशत ही आरक्षण का लाभ ले पा रही हैं.  रिपोर्ट तैयार करने वाले आयोग की अध्यक्ष दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी हैं.  खबर के अनुसार आयोग द्वारा अपनी रिपोर्ट देश के सभी मुख्य सचिवालयों और राज्य के पिछड़ा वर्ग आयोग को भेज दी गयी है.  जानकारी के अनुसार आयोग ने पिछड़े वर्ग के सभी लोगों को आरक्षण का बराबर लाभ देने के लिए इसे सब-कैटेगरी में बांटने का प्रस्ताव दिया है.  आयोग ने रेलवे, पोस्ट विभाग, केन्द्रीय पुलिस बल, पब्लिक सेक्टर बैंक, इंश्योरेंस ऑर्गेनाइजेशन्स और कई केन्द्रीय नौकरियों के अध्ययन के आधार पर रिपोर्ट  तैयार की है.  बता दें कि देश में पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण की व्यवस्था 1993 में लागू की गयी थी.  इस क्रम में 2006 में यूपीए के कार्यकाल में केन्द्रीय शिक्षण संस्थानों में आरक्षण व्यवस्था लागू हुई.

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