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INDUSTRY 4.0-जानिए आने वाले दिनों में मैनुफैक्चरिंग सेक्टर का चेहरा क्यों बदल जाएगा

Jamshedpur: भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) झारखंड स्टेट काउंसिल के अध्यक्ष और हाइको इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड के एमडी और सीइओ तापस साहू ने कहा कि भारत एक समृद्ध स्टार्टअप इकोसिस्टम के जरिए अगली प्रौद्योगिकी क्रांति में सबसे आगे है. इससे विकास और नवाचार को और बढ़ावा मिलने की संभावना है. उद्योग 4.0 अपने विभिन्न रूपों में व्यवसाय करने के ‘भारतीय तरीके’ में अपनी जगह बना रहा है.

डिजिटल तकनीक, ऑगमेंटेड रियलिटी, रोबोट का उपयोग, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, मशीन लर्निंग आदि महत्वपूर्ण निवेश के क्षेत्र हैं जो कंपनियों द्वारा सभी क्षेत्रों में किए जा रहे हैं. साहू मंगलवार को बेल्डीह क्लब में सीआईआई झारखंड ने की ओर से विनिर्माण सम्मेलन के पांचवें संस्करण में “निर्माण के भविष्य” विषय बोलते हुए ये बातें कहीं. उन्होंने कहा कि आनेवाले कुछ सालों में विनिर्माण का चेहरा पूरी तरह से बदल जाएगा. यह क्षेत्र सिंगल ऑटोमेटेड से एकीकृत, स्वचालित सुविधाओं में बदल दिया जाएगा जो एक दूसरे के साथ संचार करेगी और लचीलेपन, गति, उत्पादकता और गुणवत्ता को बढ़ावा देगी.

हमें रणनीति बनानी होगी कि ऑटोमेशन का कैसे लाभ उठाया जाय-नेहरा
रामफल नेहरा, संयोजक, सीआईआई झारखंड मैन्युफैक्चरिंग एंड इंजीनियरिंग पैनल और प्लांट हेड टाटा कमिंस प्राइवेट लिमिटेड ने कहा कि विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए भारतीय विनिर्माण क्षेत्र को रणनीति और योजना बनानी होगी कि ऑटोमेशन का लाभ कैसे उठाया जाए. एक “स्मार्ट” सेट अप के लिए वर्तमान श्रम प्रधान और अनिश्चित विनिर्माण प्रतिमानों (मैनुफैक्चरिंग पाराडाइम) से बाहर निकल अतिरिक्त निवेश और कौशल निर्धारित करना होगा.
देश के जीडीपी में एमएसएमई की अहम भूमिका-रंजोत सिंह
सीआईआई जमशेदपुर जोनल काउंसिल के अध्यक्ष और एमडेट जमशेदपुर प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक रंजोत सिंह ने कहा कि एमएसएमई निर्माण फर्म, भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास के लिए अनिवार्य हैं. इन छोटे से मध्यम आकार के उपक्रमों ने हमेशा देश के सकल घरेलू उत्पाद और इसके विकास के विभिन्न पहलुओं में बड़े पैमाने पर योगदान दिया है. भारतीय एमएसएमई क्षेत्र राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के माध्यम से सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 29 प्रतिशत का योगदान देता है. एमएसएमई मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 16 मई 2021 तक भारत में लगभग 6.3 करोड़ एमएसएमई (सेवा और निर्माण फर्म दोनों सहित) हैं.
प्रौद्योगिकी को तेजी से अपनाना होगा-उज्ज्वल
उज्ज्वल चक्रवर्ती, प्रबंध निदेशक, जेसीएपीसीपीएल ने विनिर्माण उद्योग के परिप्रेक्ष्य में अपने संबोधन में कहा कि हमारे देश में विनिर्माण के भविष्य पर विचार-विमर्श करते हुए हमें लगता है कि भविष्य के रुझान प्रौद्योगिकियों को तेजी से अपनाने में हैं जो बेहतर गुणवत्ता मानकों के साथ बदलाव के समय को कम करेंगे. प्रौद्योगिकी तक पहुंच और इस क्षेत्र में स्वचालन में वृद्धि से विकास को बढ़ावा देने और वैश्विक अर्थव्यवस्था में योगदान को बढ़ाने में मदद मिलेगी. विनिर्माण में परिवर्तन लाने वाले प्रमुख स्तंभ चार एस (4S) हैं, अर्थात स्केल, स्किल, सस्टेनेबिलिटी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी.

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युवाओं को कौशल प्रदान करना होगा-रवीश शर्मा
इएसएल स्टील लिमिटेड के मुख्य परिचालन अधिकारी रवीश शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में स्ट्रेटअप को हाथ से पकड़ना भविष्य के निर्माण के लिए एक बिल्डिंग ग्राउंड के रूप में कार्य करेगा. विनिर्माण के भविष्य के लिए देश में युवाओं को कौशल प्रदान करने के महत्व पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए जो एक मील के पत्थर के रूप में कार्य करेगा.

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विनिर्माण सदियों से विकसित हुआ है-मोहंती


सुधांशु मोहंती, सह-संयोजक , सीआईआई झारखंड मैन्युफैक्चरिंग एंड इंजीनियरिंग पैनल और जीएम – आपूर्ति श्रृंखला, टाटा मोटर्स लिमिटेड ने कहा कि विनिर्माण सदियों से विकसित हुआ है, मानव-केंद्रित तरीकों से लेकर मशीन-निर्भर असेंबली लाइनों से लेकर अत्यधिक स्वचालित कारखानों तक. दरअसल, विनिर्माण को बदलने के लिए कई रुझान मिल रहे हैं और साथ में इन प्रवृत्तियों को “उद्योग 4.0” के रूप में संदर्भित किया जा सकता है. पाचवें सीआईआई झारखंड मैन्युफैक्चरिंग कॉन्क्लेव को संबोधित करने वाले अन्य महत्वपूर्ण गणमान्य व्यक्तियों में उमेश कुमार सिंह, वाइस चेयरमैन, सीआईआई जमशेदपुर जोनल काउंसिल और प्रबंध निदेशक, द टाटा पिगमेंट लिमिटेड, सरजीत झा, चीफ – बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन एंड डिजिटल सॉल्यूशंस, टाटा स्टील लिमिटेड, रमेश जे, उत्पाद प्रमुख – उद्योग 4.0, माइक्रोमैटिक मशीन टूल्स प्रा लिमिटेड, पंकज एस जैन, वरिष्ठ तकनीकी प्रबंधक, आईबीएम सस्टेनेबिलिटी सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस, आईबीएम, राकेश शर्मा, महाप्रबंधक – साझा सेवाएं, आईएसडब्ल्यूपी लिमिटेड, प्रदोस मोहंती, महाप्रबंधक, प्रमुख ट्रांसमिशन फैक्ट्री, टाटा मोटर्स लिमिटेड, शरद कुमार सिंह, महाप्रबंधक (तकनीकी सेवाएं), टाटा मोटर्स लिमिटेड, वरुण पुंजानी, हेड – बिजनेस डेवलपमेंट, साउथ एशिया यूनिवर्सल रोबोट्स इंडिया प्रा लिमिटेड, प्रणय कुमार, हेड-हैवी फैब्रिकेशन एंड मशीनिंग, केजीपी, टाटा हिताची कंस्ट्रक्शन मशीनरी कंपनी प्राइवेट लिमिटेड और निखिल चौधरी, एएम क्लाइंट पार्टनर, विप्रो 3 डी – विप्रो इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग, विप्रो एंटरप्राइजेज (पी) लिमिटेड शामिल थे. इसमें 120 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया.

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