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उद्योगों को औसतन 8 घंटे नहीं मिलती है बिजली, हर महीने जल जाता है आठ लाख लीटर डीजल

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  • घरेलू उपभोक्ताओं को 500 मेगावाट और औद्योगिक उपभोक्ताओं को 660 मेगावाट होती है बिजली की आपूर्ति
  • प्रदेश के 13 जिलों में औसतन आठ से 10 घंटे नहीं रहती है बिजली, राजधानी में जीरो पावर कट अब भी सपना
  • अब झारखंड स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन बिफरा, कहा- वितरण निगम का सिस्टम और पॉलिसी भी खराब

Ranchi: बिजली वितरण निगम की पावर सप्लाई लचर हो गयी है. सिस्टम दुरुस्त नहीं होने के कारण हर सप्ताह औसतन दो से तीन दिन बिजली की कटौती की जा रही है. आंधी-पानी के कारण बिजली सरेंडर भी हो रही है. बिजली चोरी पर अंकुश नहीं लग पायी है. लाइन लॉस( बिजली का नुकसान) अब भी 31.8 फीसदी है, जबकि राष्ट्रीय मानक 24 फीसदी माना गया है. उद्योगों को हर दिन औसतन आठ घंटे बिजली नहीं मिलती है. बिजली नहीं होने के कारण उद्योगों में हर माह आठ लाख लीटर डीजल की खपत हो रही है. इससे उद्योगों को हर माह 5.52 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं. डीजल से एक यूनिट बिजली उत्पादन करने में नौ से 10 रुपये प्रति यूनिट खर्च आता है. जबकि वितरण निगम ने उद्योगों के लिए 6.25 रुपये प्रति यूनिट की दर तय की है.

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झारखंड में कितने उद्योग

  • लघु उद्योग: 7000
  • बड़े उद्योग: 45
  • मध्यम उद्योग: 300

घरेलू उपभोक्ताओं को हर साल 32 करोड़ का नुकसान

घरेलू उपभोक्ताओं को हर साल लगभग 32 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है. सेंट्रल ब्यूरो ऑफ एफिसिएंसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि हाई वोल्टेज और लो वोल्टेज के कारण घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद खराब हो रहे हैं. वहीं लाइन लॉस के नुकसान भी भरपाई भी उपभोक्ताओं को करनी पड़ती है. प्रदेश में लाइन लॉस 31 फीसदी है जबकि राष्ट्रीय मानक 24 फीसदी है. इस हिसाब से लाइन लॉस राष्ट्रीय मानक से सात फीसदी अधिक है. एक फीसदी लाइन लॉस कम होने पर चार करोड़ रुपये की बचत होगी.

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13 जिलों में आठ से 10 घंटे बिजली नहीं

प्रदेश के 13 जिलों में आठ से 10 घंटे तक बिजली नहीं रहती. इन जिलों में गढ़वा, लातेहार, सिमडेगा, खूंटी, गिरिडीह, गुमला, लोहरदगा, पलामू. गोड्डा, चाईबासा, गिरिडीह, साहेबगंज और देवघर शामिल हैं. देवघर में पिछले एक साल से अंडरग्राउंड केबलिंग के नाम पर हर दिन आठ घंटे बिजली आपूर्ति बाधित रहती है. वहीं राजधानी में अब तक 24 घंटे बिजली उपलब्ध नहीं हो पायी है. राजधानी के ग्रामीण क्षेत्रों में हर दिन पांच से छह घंटे आपूर्ति बाधित रहती है.

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झारखंड स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन बिफरा

झारखंड स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अरुण खेमका सह वर्तमान में एसोसिशन के संरक्षक अरुण खेमका ने कहा कि बिजली वितरण निगम का सिस्टम खराब है. कोई पॉलिसी नहीं है. अब तो यह स्थिति है कि बिजली नहीं रहने के कारण उद्योगों को नुकसान हो रहा है. जब काम खत्म होने का समय आता है तब बिजली मिलती है.

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अब तक क्या नहीं हुआ

  • पुराने तार अब तक नहीं बदले गये. जर्क की वजह से तारों का ट्रिप करना जारी है.
  • ट्रांसफार्मर की क्षमता अब तक पूरी तरह नहीं बढ़ायी गयी.
  • फीडर मीटर और बाउंड्री मीटर लगाने का काम पूरा नहीं.
  • केंद्र की आरएपीडीआरपी पार्ट बी योजना का काम पूरा नहीं.
  • बिजली चोरी पर अब तक अंकुशन नहीं. अब तक लाइन लॉस 31.8 फीसदी है. एक फीसदी की कमी आती है तो चार से पांच करोड़ की बचत होगी.
  • शत-प्रतिशत बिलिंग अब तक पूरी नहीं हो पायी. ऑनलाइन बिलिंग भी कारगर साबित नहीं हो पा रही.
  • स्मार्ट मीटर अब तक लग नहीं पाया. 2020 तक स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य रखा गया है.
  • एक मेगावाट उत्पादन भी नहीं बढ़ा.

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