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भारत-पाक चर्चा : करतारपुर गलियारे की कार्यप्रणालियों पर हो रही बात

Lahore : भारत और पाकिस्तान के अधिकारी करतारपुर गलियारे की कार्य प्रणालियों और इससे संबंधित तकनीकी मामलों को अंतिम रूप देने के लिए मसौदा समझौते पर रविवार को अहम चर्चा कर रहे हैं. यह बैठक वाघा बार्डर पर हो रही है.

गौरतलब है कि भारत की ओर से एससीएल दास प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रहे हैं वहीं पाकिस्तान की ओर से 20 प्रतिनिधि इस बैठक में शामिल हैं.

पाकिस्तान की ओर से इस बैठक का नेतृत्व मोहम्मद फैसल कर रहे हैं. हालांकि बारिश के कारण वाघा बार्डर पर बैठक देर से शुरू हुई. इससे पहले सुबह 9.30 बजे बैठक शुरू होने का वक्त तय था.

क्या कहना है पाकिस्तान का

बैठक में पाकिस्तान का नेतृत्व कर रहे मोहम्मद फैसल ने कहा कि पाकिस्तान करतापुर गलियारे को संचालित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. और इस दिशा में सहयोग भी किया जा रहा है. गुरुद्वारे का निर्माण कार्य 70 प्रतिशत से अधिक पूरा हो गया है.

यह गलियारा सिख श्रद्धालुओं के लिए गुरदासपुर जिला स्थित डेरा बाबा नानक साहिब से पाकिस्तान के करतारपुर स्थित गुरूद्वारा दरबार साहिब तक जाना सुगम बनाएगा.

वे इस गलियारे के माध्यम से बिना वीजा के आ जा सकेंगे. उन्हें करतारपुर साहिब जाने के लिए केवल एक परमिट लेना होगा. करतारपुर साहिब को सिख धर्म के संस्थापक गुरू नानक देव ने 1522 में स्थापित किया था.

विदेश कार्यालय ने कहा है कि पाकिस्तान इस मामले को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि गलियारे को नवंबर 2019 में गुरू नानक देव की 550 वीं जयंती से पहले चालू किया जा सके.

भारत बैठक में सुरक्षा पहलुओं से जुड़ी चिंताओं को भी उठाएगा

नयी दिल्ली में सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में ‘‘जीरो प्वाइंट’’ पर संपर्क और यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी. उन्होंने बताया कि भारत बैठक में सुरक्षा पहलुओं से जुड़ी अपनी चिंताओं को भी उठाएगा.

भारत ने इससे पहले इस परियोजना पर पाकिस्तान द्वारा नियुक्त समिति में एक प्रमुख खालिस्तानी अलगाववादी की मौजूदगी पर अपनी चिंताओं से पाकिस्तान को अवगत कराया था. बैठक में करतारपुर गलियारे के स्वरूप और संबद्ध तकनीकी मुद्दों पर चर्चा होगी.


इससे पहले मार्च में हुई थी बैठक

ऐतिहासिक गलियारे की कार्यप्रणालियों को अंतिम रूप देने के लिए पाकिस्तान और भारत के बीच पहली बैठक मार्च में अटारी में ऐसे समय में हुई थी जब दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण स्थिति थी. पुलवामा में 14 फरवरी को हुए जैश-ए-मोहम्मद के आत्मघाती हमले के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था.

गौरतलब है कि पिछले साल नवंबर में भारत और पाकिस्तान इस गलियारे के निर्माण के लिए सहमत हुए थे. गुरदासपुर जिले में 26 नवंबर को और इसके दो दिन बाद पाकिस्तान के नारोवाल (लाहौर से 125 किमी दूर) में इस गलियारे की आधारशिला रखी गई थी.


क्या है करतारपुर गलियारा

करतारपुर गलियारा सिखों का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है. जहां गुरु नानन देव जी की याद में एक गुरुद्वारा बनाया गयी है. लेकिन यह स्थान पाकिस्तान के नारोंवाल जिले में पड़ता है. जो कि भारत की सीमा से तीन से चार किलोमीटर दूर है.

भारत पाकिस्तान का जब बंटवारा किया गया था तो यह हिस्सा पाकिस्तान में चला गया था. जिसकी वजह से श्रद्धालुओं को इसके दर्शन के लिए आज वीजा लेना पड़ता है.

माना जाता है कि 1522 में गुरु नानक देव जी करतारपुर गए थे. वहां उन्होंने अपने जीवन का आखिरि वत्क गुजारा था. वहीं जिस जगह पर गुरुद्वारा बनाया गया है, वहां पर 1539 में गुरु नानक जी ने अपना चोला त्यागा था. साथ ही यह वो गुरुद्वारा है जिसकी नींव गुरु नानक जी ने खुद रखी थी.

बताया जाता है कि एक बार रावी नदी में जोर का बाढ़ आया था जिसके बाद यह गुरुद्वारा उस बाढ़ में बह गया था. लेकिन फिर महाराजा रणजीत सिंह ने इसे फिर से बनवाया. उल्लेखनीय है कि इस गुरुद्वारे में गुरु नानक जी की समाधि और कब्र दोनों ही मौजूद हैं.

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