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Jamshedpur : धातुकर्म में भारत की विरासत तीन हजार साल से ज्यादा पुरानी, हमने विदेशियों के आक्रमण के कारण कई दस्तावेज और स्मारक खो दिये

एनएमएल जमशेदपुर में ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन

Jamshedpur : राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल) जमशेदपुर में “स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव” की पूर्व संध्या पर आयोजित ऑनलाइन वेबिनार में विज्ञान भारती के जयंत सहस्रबुद्धे ने विज्ञान की विरासत पर चर्चा की. जिसे उचित तरीके से सामने लाना चाहिए, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी अपने पूर्वजों के योगदान के बारे में सीख और जान सके. उन्होंने कहा कि यह तथ्य है कि हमने विदेशियों के आक्रमण के कारण कई दस्तावेजी साक्ष्य और स्मारक खो दिये हैं, लेकिन इस पर विचार करने के बजाय हमें आगे बढ़ना चाहिए.

एनएनएल के निदेशक डॉ. इंद्रनील चट्टोराज ने स्वागत भाषण दिया और कार्यक्रम के विषय पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि युगों से भारत की धातुकर्म विरासत काफी समृद्ध रही है. उन्होंने भारतीय सभ्यता की शुरुआत से ही धातुओं और धातु विज्ञान के महत्व और योगदान के बारे में बात की. समारोह में डॉ जेजे पांडेय (मुख्य वैज्ञानिक, सीएसआईआर-सीआईएमएफआर, धनबाद), डॉ अरविंद सिन्हा (मुख्य वैज्ञानिक और सलाहकार प्रबंधन, सीएसआईआर-एनएमएल) डॉ. टीबी सिंह (सचिव, विज्ञान भारती, झारखंड अध्याय) और डॉ. एके सिंह (अध्यक्ष, विज्ञान भारती, झारखंड चैप्टर)ने भी समारोह को संबोधित किया.

भारत 3 हजार से अधिक वर्षों से धातु विज्ञान में अग्रणी निर्माता
स्नेहाशीष त्रिपाठी, वरिष्ठ वैज्ञानिक, सीएसआईआर-एनएमएल द्वारा विषय के बारे में जानकारी दी गई. उन्होंने कहा कि भारत 3000 से अधिक वर्षों से धातु विज्ञान में अग्रणी और निर्माता है. भारत धातुकर्म चमत्कारों, आश्चर्यजनक प्रौद्योगिकियों और उत्कृष्ट शिल्प कौशल के लिए जाना जाता है और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में वूट्ज स्टील का आपूर्तिकर्ता रहा है. उन्होंने मोहनजोदड़ो-हड़प्पा सभ्यता (2500 ईसा पूर्व) से हाल की अवधि में धातुओं और पत्थरों के उपयोग के माध्यम से सभ्यता वार विकास पर चर्चा की. उन्होंने राष्ट्र के लिए एनएमएल के 72 वर्षों के गौरवशाली योगदान पर भी विस्तार से चर्चा की, जो उन्नत सामग्री के विकास के लिए लो शाफ्ट फर्नेस, सिक्के, ओवर ट्रैक्शन वायर और मेटल पाउडर के विकास से शुरू होता है. कार्यक्रम को प्रो इंद्रनील मन्ना (कुलपति, बीआईटी मेसरा, रांची), डॉ के मुरलीधरन (पूर्व निदेशक सीजीसीआरआई, कोलकाता), डॉ एन ईश्वर प्रसाद (निदेशक, डीएमएसआरडीई), डीआरडीओ, कानपुर), प्रोफेसर एस बसु, (निदेशक, सीआईएमएफआर, धनबाद और आईएमएमटी भुवनेश्वर) ने भी संबोधित किया.

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