West Bengal

कोलकाता में कोरोना से उबर चुके लोगों के लिए खुला देश का पहला डेडिकेटेड ओपीडी

Kolkata: चिकित्सा क्षेत्र में कोलकाता ने एक और मिसाल पेश की है. फॉर्टिस हॉस्पिटल, आनंदपुर में कोरोना से उबर चुके लोगों के लिए डेडिकेटेड आउटपेशेंट डिपार्टमेंट (ओपीडी) शुरू की गयी है. यह संभवत: देश में अपनी तरह का पहला ओपीडी है, जहां कोरोना से ठीक हो चुके लोग भविष्य में किसी तरह की शारीरिक अथवा मानसिक समस्या होने पर अपना इलाज कराने आ सकते हैं.

ओपीडी के लिए डॉक्टरों की विशाल टीम तैयार की गई है, जिसमें कार्डियोलॉजिस्ट, गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, फिजियोथेरेपिस्ट से लेकर मेडिकल सोशल वर्कर तक शामिल हैं. डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना से उबरने के बाद भी इसका प्रभाव बना रह सकता है, जिससे भविष्य में शारीरिक व मानसिक समस्याएं होने की आशंका है इसलिए ऐसे लोगों के लिए डेडिकेटेड ओपीडी की बेहद जरूरत थी.

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अलग समस्याओं से जूझ रहे कोरोना से ठीक हो चुके लोग

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हॉस्पिटल की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट रिचा सिंह देवगुप्ता ने बताया- ‘कोरोना के मरीजों के इलाज में हमारी मेडिकल टीम पिछले चार महीने से अथक परिश्रम कर रही है. इलाज व देखभाल को अगले चरण में ले जाने के लिए हमने अब ओपीडी की व्यवस्था की है. ओपीडी के डॉक्टरों की टीम में डॉ. राजा धर, डॉ. यशेश पालीवाल, डॉ. शिवब्रत बनर्जी, डॉ. बासव विजय, डॉ. दिब्येंदु मुखर्जी और डॉ. जयदीप घोष शामिल हैं.

फोर्टिस हॉस्पिटल के डायरेक्टर पल्मोनोलॉजी डॉक्टर राजा धर ने बताया-‘ कोरोना से ठीक हुए कई मरीज दिल, फेफड़ा, स्नायु तंत्र, मांसपेशी इत्यादि से संबंधित समस्याओं की शिकायत कर रहे हैं. कइयों ने मानसिक समस्या की भी बात कही है. ये समस्याएं सामान्य तौर पर कोरोना से ठीक होने के बाद शुरू हो रही हैं. ऐसे लोगों की सेहत पर नियमित रूप से करीब से ध्यान देना और उनकी समस्याओं का निदान करना जरूरी है.

डॉ. धर ने आगे कहा-‘ओपीडी में आने वाले लोगों का बारीकी से चिकित्सकीय परीक्षण कर कोरोना का उनमें पहले से मौजूद दूसरी बीमारियों पर पड़े अथवा पड़ने वाले असर का पता लगाया जाएगा. फेफड़े की फिटनेस का भी मूल्यांकन किया जाएगा, खासकर उन मरीजों का, जिन्हें कोरोना के इलाज के समय आइसीयू में रखने की जरुरत पड़ गई थी. जिन्हें पहले से मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, हृदय रोग इत्यादि समस्याएं हैं, उनपर विशेष तौर पर ध्यान दिया जाएगा.

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