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#India के 60 प्रतिशत लाह का उत्पादन सिर्फ झारखंड में  

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Ranchi: अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क एवं भारत ज्ञान विज्ञान समिति झारखंड के तत्वावधान में ‘आत्मनिर्भरता: रोजी और रोजगार’ विषय पर दो दिवसीय कन्वेंशन का समापन रविवार को किया गया.

इस दौरान लाह अनुसंधान केंद्र झारखंड के निदेशक डॉ केके शर्मा ने कहा कि पूरे देश में 60 प्रतिशत लाह का उत्पादन सिर्फ झारखंड में होता है.

उन्होंने कहा कि लाह उत्पादन एक अच्छा जरिया बन सकता है. कम संसाधन में सिर्फ तकनीक के इस्तेमाल से बेहतर आय के स्रोत के लिए उन्होंने खासकर के ग्रामीण क्षेत्र में काम कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि लाह उत्पादन के लिए लोगों को प्रेरित करें.

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डॉ शर्मा ने ने लाह उत्पादन से जुड़ी तकनीकी बारीकियों और अपने अनुभव को प्रतिभागियों के साथ साझा किया.

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बिना प्रोसेसिंग के जब बेचते हैं तो कम आमदनी होता है

दूसरे दिन के सत्र में किसानों व बेरोजगार युवकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण सुझाव दिये.

दिल्ली साइंस फोरम के डॉ. डी रघुनंदन, बिरसा कृषि अनुसंधान केंद्र के सीईओ डॉ सिद्धार्थ जयसवाल व लाह अनुसंधान केंद्र झारखंड के निदेशक डॉ केके शर्मा ने पवार प्रजेंटेशन के जरिये प्रतिभागियों का समझ विस्तार किया.

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मौके पर डॉ रघुनंदन ने कहा कि किसान जो फल, सब्जी उपजाते हैं उन्हें बिना प्रोसेसिंग के जब बेचते हैं तो उन्हें कम आमदनी होता है.

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चर्म उद्योग के लिए कई घरेलू उपकरणों की जानकारी दी

उन्होंने बताया कि कैसे किसान अपने कृषि उत्पादन को छोटे-छोटे उपकरणों के माध्यम से दैनिक जीवन के उपयोगी चीजों का उत्पादन कर उसकी अच्छी मार्केटिंग कर सकते हैं.

उन्होंने अपने कृषि मे 35 वर्ष के अनुभव में कृषि के विभिन्न क्षेत्रों मे लघु उद्योग के माध्यम से आय का जरिया बनाने के कई तरीके बताये.

इसके अलावा गांधी जी के सपने को सार्थक करने के लिए सबसे पहले उन्होंने गांव मे पशु चर्म पर कार्य करने वाले लोगों से जुड़ कर चर्म उद्योग के लिए कई घरेलू उपकरण की जानकारी दी.

1950 से लेकर अभी तक मे कृषि उत्पादन के पोषक तत्वों मे गिरावट आयी

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक सिद्धार्थ जायसवाल ने कहा कि 1950 से लेकर अभी तक कृषि उत्पादन के पोषक तत्वों मे गिरावट आयी है.

आगे उन्होंने कम लागत वाली अमृत कृषि के बारे मे बताया. अमृत कृषि में किसी भी तरह का यूरिया व डीएपी के बिना जैविक खाद के माध्यम से खेती के बारे मे बताया.

अमृत कृषि के माध्यम से किसान अपने उत्पाद को बढ़ा सकते हैं. इस माध्यम से कृषि उत्पाद की गुणवत्ता में भी आम फल-सब्जियों की तुलना में ज्यादा विटामिन, मिनरल्स से भरपूर व पौष्टिक होते हैं.

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