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बेरोजगारी, भ्रष्टाचार से भारतीय सर्वाधिक परेशान होते हैं : सर्वेक्षण

देश के लोगों को अपराध तथा हिंसा के साथ ही बेरोजगारी और आर्थिक एवं राजनीतिक भ्रष्टाचार जैसे मुद्दें अधिक परेशान करते हैं.  

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 NewDelhi :  देश के लोगों को अपराध तथा हिंसा के साथ ही बेरोजगारी और आर्थिक एवं राजनीतिक भ्रष्टाचार जैसे मुद्दें अधिक परेशान करते हैं.  एक सर्वेक्षण में यह बात सामने आयी है.  पीटीआई के अनुसार  मार्केट रिसर्च कंपनी इपसोस नेदुनिया को क्या चिंता है  नाम से एक सर्वे किया.  सर्वे में शामिल 44 फीसदी लोगों का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि वे भारत में बेरोजगारी, आर्थिक और राजनीतिक भ्रष्टाचार से परेशान हैं.  सर्वे में 33 फीसदी भारतीयों ने अपराध और हिंसा पर चिंता जताई.  31 फीसदी भारतीयों ने गरीबी और सामाजिक असमानता को एक प्रमुख मुद्दा बताया.  आतंकवाद का मुद्दा भी रहा, जिसके लिए 21 फीसदी लोगों ने कहा कि वे चिंतित हैं.  19 फीसदी भारतीयों ने शिक्षा के मुद्दे पर चिंता प्रकट की.  16 फीसदी ने कहा कि पर्यावरण को खतरा है.  15 फीसदी लोगों ने टैक्स की समस्या बताई.  14 फीसदी लोग जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंतित दिखे.  13 फीसदी ने स्वास्थ्य देखभाल, 11 फीसदी ने मुद्रास्फीति और 10 फीसदी लोगों ने नैतिक गिरावट के मुद्दे पर चिंता प्रकट की.

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आतंकवाद पांचवें नंबर पर चिंता का मुद्दा

भारतीयों के मामले में आतंकवाद जहां सूची में पांचवें नंबर पर चिंता का मुद्दा हैं, वहीं वैश्विक सूची में पांचवें नंबर पर वह नहीं है.  कुछ बाजार अपने देश की दिशा को लेकर नाखुश हैं और उसके भविष्य को लेकर घोर निराशावादी है.  व्हॉट वरीज द वर्ल्ड सर्वे’ मासिक ऑनलाइन सर्वेक्षण है, जिसमें 65 वर्ष की उम्र तक के व्यस्क हिस्सा लेते हैं.  इसे इपसोस ऑनलाइन पैनल सिस्टम के द्वारा 28 देशों में कराया गया था.  इन 28 देशों में भारत के अलावा अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, ब्राजील, कनाडा, चिली, चीन, फ्रांस, ग्रेट ब्रिटेन, जर्मनी, हंगरी, इजरायल, इटली, जापान, मलेशिया, मेक्सिको, पेरू, पोलैंड, सऊदी अरब, सर्बिया, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, स्पेन, स्वीडन, तुर्की और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं.

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67 प्रतिशत लोगों ने  माना कि देश का नेतृत्व सही दिशा में जा रहा है

इस सबके बीच 67 फीसदी भारतीयों ने भरोसा जताया कि देश सही दिशा में जा रहा है.  इस आधार पर सबसे अधिक 92 प्रतिशत चीन के लोगों ने अपने देश की दिशा को सही माना है.  इसके आद 78 प्रतिशत के साथ सऊदी अरब दूसरे, 67 प्रतिशत के साथ भारत तीसरे तथा 65 प्रतिशत के साथ मलेशिया चौथे स्थान पर है.  दिलचस्प बात यह है कि ग्लोबल ट्रेंड में उदास बहुत से बाजारों में से 28 बाजारों को लेकर  सर्वेक्षण किया गया, जिसमें कम से कम 60 फीसदी लोगों ने कहा कि उनका देश गलत रास्ते पर है.  सर्वे के मुताबिक शीर्ष चार बाजार अपने देश की दिशा को लेकर आशावादी हैं, उनमें 92 फीसदी के लोगों के साथ चीन, 78 फीसदी लोगों के साथ सऊदी अरब, 67 फीसदी लोगों के साथ भारत और 65 फीसदी लोगों के साथ मलेशिया शामिल हैं.  सर्वे में विश्व के लोगों की राय में 34 फीसदी आर्थिक और राजनीतिक भ्रष्टाचार, 33 फीसदी गरीबी और सामाजिक असमानता, 31 फीसदी अपराध और हिंसा और 24 फीसदी स्वास्थ्य देखबाल को लेकर चिंतित बताये गये.

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