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अमेरिका, रूस,  चीन  और जापान की तर्ज पर भारतीय सेना होगी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस

भारतीय सेना जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस होने जा रही है. सूत्रों के अनुसार सेना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर रक्षा मंत्रालय तेजी से काम कर रहा है

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NewDelhi :  भारतीय सेना जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस होने जा रही है. सूत्रों के अनुसार सेना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर रक्षा मंत्रालय तेजी से काम कर रहा है.  इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाते हुए रक्षा मंत्रालय ने नेशनल सिक्योरिटी और रक्षा क्षेत्र में एआई के इस्तेमाल को लेकर अध्ययन करने के लिए पिछले साल एक टास्क फोर्स का गठन किया है.  इस टास्क फोर्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में रिसर्च और इनोवेशन पर अध्ययन का काम शुरु किया गया है. बता दें कि टास्क फोर्स में सरकार के नेतृत्व के साथ रक्षा विभाग, अकादमिक, रक्षा उधोग, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन, डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स, नेशनल साइबर सिक्योरिटी कॉर्डिनेशन, इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र और स्टार्ट-अप्स के सदस्य शामिल है. दुनिया के अधिकतर ताकतवर देश जैसे चीन, रूस, अमेरिका और जापान समेत अन्य देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर पहले से ही जमकर निवेश कर रहे हैं. चीन अपनी सेना में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के व्यापक इस्तेमाल की खातिर तेजी से निवेश बढ़ा रहा है, इस क्रम में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और यूरोपीय संघ भी आर्टिफिशल इंटेलिजेंस में भारी निवेश कर रहे हैं.

भारतीय सेना की ताकत कई गुना बढ़ जायेगी

 बता दें कि आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस कुशल मशीनों के निर्माण से जुड़े कंप्यूटर विज्ञान का क्षेत्र है. उदाहरण स़्वरूप अमेरिका मानव रहित ड्रोन के सहारे अफगानिस्तान और उत्तरपश्चिमी पाकिस्तान में आतंकियों के गुप्त ठिकानों को निशाना बनाता रहा है.  मानवरहित ड्रोन आर्टिफिशल इंटेलिजेंस की मदद से काम करते हैं;  ऐसे में यह परियोजना भारत की थल सेना, वायु सेना और नौसेना को भविष्य की जंग के लिहाज से तैयार करने की व्यापक नीतिगत पहल का हिस्सा है.  विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर हमलों को रोकने या फिर उन्हें शुरू करने के लिए भी एआई का प्रयोग तेजी से आवश्यक होता जा रहा है क्योंकि एआई के जरिए साइबर हमलों को आसानी से पकड़ा जा सकता है. बता दें कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए भारत सरकार ने सालाना आधार पर विशेष फंड की व्यवस्था नहीं की है, बल्कि हर प्रोजेक्ट के हिसाब से अलग-अलग फंड जारी किये गये है.  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स के लिए सिंग्नल इंटेलीजेंस और एनालिसिस कैपेबिलिटी को बेहतर बनाने को एक प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गयी है.  

इसके तहत 73.3 करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं. इसी तरह एनर्जी हार्वेस्टिंग बेस्ड इंफ्रारेड सेंसर नेटवर्क फॉर ऑटोमेटेड ह्यूमन इंस्टुजन डिटेक्शन प्रोजेक्ट के लिए एक करोड़ 80 लाख रुपये आवंटित हैं.  एआई के लिए जरूरी सामान विकसित करने का काम डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स और ऑर्डिनेंस फैक्टरीज को सौंपा गया है. जानकारों के अनुसार इससे भारतीय सेना की ताकत कई गुना बढ़ जायेगी. 

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