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भारतीय राजदूत की चीन को दो टूकः गलवान पर दावा टिकने योग्य नहीं, बीजिंग तय करे किस दिशा में बढ़ना है

New Delhi: एलएसी पर बिगड़े रिश्तों के बीच चीन में भारत के राजदूत विक्रम मिस्त्री ने चीन को खरी-खोटी सुनायी है. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि चीन को तय करना है कि वो दोनों देशों के संबंधों को किस दिशा में ले जाना चाहता है.

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बीजिंग को तय करना होगी दिशा

न्यूज एजेंसी पीटीआइ से बात करते हुए चीन में भारत के राजदूत विक्रम मिस्री ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के लिए सैन्य गतिरोध को समाप्त करने का एकमात्र तरीका है, वहां नए निर्माण बंद करना. उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा वास्तविक नियंत्रण रेखा के भारतीय इलाके में ही अपनी गतिविधियों को अंजाम दिया है. लेकिन चीन को सीमा का उल्लंघन करने और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारतीय इलाके में निर्माण का चलन बंद करना होगा. चीन को भारतीय सेना के सामान्य पेट्रोलिंग में अवरोध और बाधाएं उत्पन्न करना बंद करना चाहिए. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि द्विपक्षीय संबंधों का सतर्कता से ध्यान रखना चीन की पूरी जिम्मेदारी है. और उसे यह तय करना है कि किस दिशा में आगे बढ़ा जाए.

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गलवान पर दावा बेकार

गलवान घाटी पर चीन का दावा करने पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि संप्रभुता का ये दावा टिकने योग्य नहीं है. और ऐसे बढ़ा-चढ़ा कर किए गए दावों से कोई मदद नहीं मिलने वाली है. गलवान घाटी पर हुए हिंसक झड़प और 20 भारतीय जवानों की शहादत पर मिस्त्री ने कहा कि जमीनी स्तर पर चीनी सेना की कार्रवाई ने द्विपक्षीय संबंधों में विश्वास को काफी ठेस पहुंचाया है. जमीनी स्तर पर यथा स्थिति को बदलने के चीन के प्रयासों का सीमा संबंधी द्विपक्षीय संबंधों पर प्रभाव पड़ेगा और प्रतिक्रिया होगी. साथ ही कहा कि द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना अनिवार्य शर्त है.

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