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#IndiaAgainstCAA: थम नहीं रहा विरोध, यूपी में हिंसक प्रदर्शन के बाद इंटरनेट व SMS सेवाएं बंद

Lucknow: नागरिकता संशोधन एक्ट (CAA) के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हो रहा है. इस प्रदर्शन ने अब हिंसक रूप भी ले लिया है. दिल्ली से लेकर मुंबई और लखनऊ से लेकर बेंगलुरु तक प्रदर्शनकारी इस कानून के खिलाफ सड़कों पर हैं.

इसे लेकर गुरुवार को भी देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन जारी रहा. लेफ्ट पार्टी ने गुरुवार को भारत बंद बुलाया था. वहीं प्रदर्शन को देखते हुए देश के कई हिस्सों में धारा 144 भी लगायी गयी थी.

गुरुवार को प्रदर्शन के दौरान लखनऊ में एक और मंगलौर में दो लोगों की मौत हो गयी. लखनऊ में प्रदर्शन के बाद 150 को गिरफ्तार किया गया है जबकि 19 एफआइआर दर्ज की गयी है. जिसके बाद शुक्रवार को एक बार फिर से देश के कई हिस्सों में CAA के खिलाफ प्रदर्शन की जा सकती है. 

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यूपी के 14 जिलों में इंटरनेट सेवा बंद

संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गुरुवार को जमकर बवाल हुई हुई. इस प्रदर्शन में 16 पुलिसकर्मी घायल हुए और 1 प्रदर्शनकारी की मौत हो गयी. हिंसा के बाद राज्य सरकार ने राजधानी में शनिवार दोपहर तक मोबाइल इंटरनेट और एसएमएस सेवाएं बंद कर दी है. यूपी के 14 जिलों में इंटरनेट सेवा को बंद किया गया है.

यूपी के गाजियाबाद, लखनऊ, संभल, अलीगढ़, मेरठ, सहारनपुर, बरेली, आगरा, पीलीभीत, प्रयागराज, मऊ, आजमगढ़, फिरोजाबाद, हमीरपुर में इंटरनेट बंद कर दी गयी है.

अतिरिक्त मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी ने इस संबंध में गुरूवार की देर रात निर्देश जारी किया. अवस्थी ने सरकारी आदेश में कहा है कि यह आदेश 19 दिसंबर को दोपहर बाद तीन बजे से 21 दिसंबर को दोपहर 12 बजे तक प्रभावी रहेगा.

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लखनऊ में अलर्ट बढ़ा

गौरतलब है कि प्रदर्शन के बाद लखनऊ में अलर्ट बढ़ा दिया गया है. पूरे लखनऊ को 32 सेक्टरों में बांटा गया है, जहां मजिस्ट्रेट तैनात किये जायेंगे. लखनऊ प्रशासन सभी इमामों से बात कर शांति की अपील करेगा.

इससे पहले एक अधिकारी ने बताया कि सोशल मीडिया पर किसी तरह के दुष्प्रचार और लोगों की भावनाएं भड़काने वाली कोई पोस्ट को प्रसारित होने रोकने के लिए राजधानी में शनिवार दोपहर तक मोबाइल इंटरनेट एवं एसएमएस सेवाओं को बंद कर दिया गया है.

उन्होंने बताया कि कल जुमे की नमाज होने की वजह से किसी तरह की कोई अशांति पैदा न हो, इस वजह से प्रशासन ने यह कदम उठाया है. उल्लेखनीय है कि इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हिंसक प्रदर्शन पर सख्त रुख अपनाया था और सार्वजनिक संपत्ति को हुई नुकसान की भरपाई उपद्रवियों की संपत्ति से करने की बात की थी.

उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है. संशोधित नागरिकता कानून के विरोध के नाम पर कांग्रेस, सपा और वाम दलों ने पूरे देश को आग में झोंक दिया है. 

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