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तेल आयात के लिए पांच ईरानी बैंकों को रुपये में भुगतान करेगा भारत

  . ईरान भारत से मिलने वाली इस रकम का एक हिस्सा भारत से जरूरी सामानों की खरीदारी और दक्षिण एशियाई देशों में उसके डिप्लोमैटिक मिशनों के खर्च के लिए करेगा.  

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NewDelhi : भारत ईरान से कच्चे तेल के आयात का भुगतान भारतीय रुपये में करने जा रहा है.  यह दोनों देशों के बीच तय हुई पेमेंट व्यवस्था के अनुरूप होगा.  ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत कच्चे तेल के आयात के लिए पांच ईरानी बैंकों को भुगतान करेगा. जान लें कि अमेरिकी प्रतिबंधों से निजात पाने के लिए दोनों देशों के बीच इस तरह के पेमेंट मेकनिजम पर सहमति बनी थी. जानकारी के अनुसार भारत के सरकारी बैंक यूको बैंक लिमिटेड में ईरान के पांच बैंकों के एस्क्रो अकाउंट में इसका भुगतान होगा. बता दें कि एस्क्रो अकाउंट किन्हीं दो पक्षों में शर्तों के साथ भुगतान की प्रक्रिया के लिए थर्ड पार्टी का एक टेंपररी अकाउंट होता है;  यह अकाउंट भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने तक काम करता है. सूत्रों के अनुसार बायर और सेलर के बीच हुए समझौते की सभी शर्तों के पूरी होने तक इसका इस्तेमाल होता है. ईरान भारत से मिलने वाली इस रकम का एक हिस्सा भारत से जरूरी सामानों की खरीदारी और दक्षिण एशियाई देशों में उसके डिप्लोमैटिक मिशनों के खर्च के लिए करेगा.  सूत्रों ने ब्लूमबर्ग को पहचान जाहिर नहीं करने की शर्त पर यह जानकारी दी है, क्योंकि यह सूचना अभी सार्वजनिक नहीं हुई है. सारा खर्च भारतीय करंसी यानी रुपये में होगा.

पिछले महीने अमेरिका ने ईरान से तेल आयात की भारत को छूट दी थी;  यह छूट भारत को ईरान से 180 दिनों तक प्रतिदिन तीन लाख बैरल आयात की इजाजत देता है;  यह ईरान द्वारा भारत को औसत तेल निर्यात से काफी कम है;  इस साल ईरान ने भारत को प्रतिदिन औसतन 5 लाख 40 हजार बैरल तेल की आपूर्ति की थी;  2017 में ईरान ने भारत को प्रति दिन करीब साढ़े 4 लाख बैरल तेल की आपूर्ति की थी.

भारत अपनी सालाना तेल जरूरतों का लगभग 80 प्रतिशत आयात करता है

बता दें कि अपनी सालाना तेल जरूरतों का लगभग 80 प्रतिशत आयात करने वाले भारत के लिए लगातार सप्लाई काफी अहम है; तेहरान ने दिल्ली को मध्य पूर्व के अन्य तेल उत्पादक देशों की तुलना में बेहतर क्रेडिट टर्म्स ऑफर किया है;  याद करें कि ईरान पूर्व में भी तेल के लिए अमेरिकी डॉलर के बजाय भारतीय रुपये में भुगतान ले चुका है;  बता दें कि 31 मार्च को खत्म हुए वित्त वर्ष में भारत ने ईरान से लगभग 9 अरब डॉलर (लगभग 63,239 करोड़ रुपये) मूल्य के कच्चे तेल की खरीदारी की थी.  दोनों देशों के बीच जिस तरह की पेमेंट की व्यवस्था पर सहमति बनी है, उसके आधार पर भारत अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान से तेल की खरीदारी जारी रखेगा;  इसकी वजह यह है कि यह पेमेंट मेकनिजम अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की शर्त की पूर्ति करता है क्योंकि पैसे सीधे ईरान को नहीं जा रहे हैं;  इसके अलावा वॉशिंगटन ने भारत को प्रतिबंधों से छूट वाले मुल्कों में रखा है

यूको बैंक के मैनेजिंग डायरेक्ट अतुल कुमार गोयल ने जानकारी दी कि बैंक के पास ईरानी बैंकों के 15 अकाउंट हैं, जिनमें भुगतान किया जा सकता है. भारत और ईरान पहले भी इस तरह के पेमेंट मेकनिजम के तहत काम कर चुके हैं;  2012 में जब अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध लगाया था तो भारत-ईरान ने इसी तरह का मेकनिजम अपनाया था.  उस वक्त 45 प्रतिशत राशि का भुगतान भारत में ईरानी बैंकों के अकाउंट में किया गया था, जबकि बची हुई राशि का भुगतान एक ओवरसीज बैंक के जरिए यूरो में किया गया था.

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