Jamtara

नेता जी के सपनों का भारत बनना अभी बाकी : गाज़ी रहमतुल्लाह रहमत

Jamtara: नेता जी के सपनों का भारत बनना अभी बाकी है. उक्त बातें देश प्रेम दिवस के अवसर पर साहित्यकार परिषद के अध्यक्ष व जन आंदोलनकारी गाजी रहमतुल्लाह रहमत ने कही.

उन्होंने कहा कि जामताड़ा जिलाधिकारी को चाहिए कि झारखंड सरकार को बताएं कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अपनी अज्ञात अवस्था के चंद दिन जामताड़ा में बिताया था. तः उनकी स्मृति में एक भव्य बहुउद्देशीय सरकारी भवन बनाएं अथवा कम्बाइंड बिल्डिंग का नाम नेताजी सुभाष चंद्र बोस भवन रखें. साथ ही उनके नाम पर सड़कों व योजनाओं का नामकरण भी हो ताकि नई पीढ़ी को यह पता चले कि जामताड़ा महापुरुषों की कर्मभूमि व संपर्क भूमि रही है और वह स्वयं में गौरवान्वित हो सके.

गाज़ी रहमत ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जामताड़ा स्टेशन रोड स्थित केशव हजारी के मकान में अपने अज्ञातावस्था काल में बुद्धिजीवियों को एकत्रित कर देश प्रेम का पाठ पढ़ाया था और अंग्रेजों को मुल्क से बाहर करने की योजना बताई थी. उक्त बैठक में जिले के गणमान्य व्यक्ति एवं देवघर के कुछ क्रांतिकारी भी शामिल हुए थे.

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उन्होंने कहा कि नेताजी को जामताड़ा जिले से धनबाद पहुंचाया गया था और वहां से उन्हें गोमो स्टेशन तक ले जाया गया था, जहां से नेताजी अफगानिस्तान होते हुए जर्मनी पहुंचे थे.

गाज़ी रहमत ने कहा कि नेता जी के सपनों को साकार करने के लिए युवा पीढ़ी को आगे बढ़ना पड़ेगा तथा देश में एक सशक्त राष्ट्रीय क्रांतिकारी आंदोलन खड़ा करना पड़ेगा ताकि देश के अंदर से गंदी राजनीति का सफाया हो सके. राष्ट्रीय विचारों से ओतप्रोत व्यक्ति ही देश की जिम्मेवारी संभाले.

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उन्होंने कहा कि अभी तक हमारे देश को पूर्ण आजादी नहीं मिली है. पहले हम गोरे अंग्रेजों के हाथों गुलाम थे और आज काले अंग्रेजों के हाथों गुलाम हैं. उन्होंने कहा कि देश प्रेम दिवस के उपलक्ष्य में हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम नेता जी के मूल मंत्र तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा के अनुरूप जन आंदोलन खड़ा करें ताकि भारत को पुनः गुलाम होने से बचाया जा सके. इसके लिए विशेष रूप से जामताड़ा जिले के नौजवानों को पहल करने की जरूरत है क्योंकि नेता जी ने अपनी महाभियान- यात्रा से पहले जामताड़ा वासियों से इसका प्रण लिया था.

गाज़ी रहमत ने कहा कि भारत की सरकार ने देर से ही सही नेताजी की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में घोषित किया है लेकिन हम इसे देश प्रेम दिवस के रूप में ही मनाना उचित समझते हैं क्योंकि इससे नेताजी के आंदोलन एवम दर्शन की संपुष्टि होती है.

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