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शूटिंग में आसानी के कारण अबू धाबी की ओर आकर्षित हो रहे भारत के बड़े स्टूडियो

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New Delhi : यूएई की राजधानी की मीडिया जोन ऑथिरिटी की सीईओ मरियम ईद अलमहैरी का मानना है कि अबू धाबी तेजी से हिन्दी फिल्मों की शूटिंग का एक बड़ा गंतव्य स्थल बनता जा रहा है. ऐसा सभी निर्माण जरूरतों के न सिर्फ अनुकूल होने बल्कि सभी सुविधाएं एक जगह मिलने के कारण हो रहा है. ‘ रेस 3’, ‘ टाइगर जिंदा है ’, ‘ साहो ’ और ‘ दुवदा जगन्नाधम ’ जैसी भारतीय फिल्मों के अलावा हॉलीवुड की ‘ वार मशीन ’ और ‘ मिशन : इम्पोसिबल – फॉलआउट ’ की शूटिंग हाल में अबू धाबी में की गयी है.

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शहर की मीडिया और मनोरंजन जगत की प्रमुख कंपनी दोफोर 54 की प्रमुख अलमहैरी ने बताया कि अबू धाबी में फिल्मांकन की आसानी भारत के बड़े स्टूडियो को भी आकर्षित करती है. अलमहैरी ने बताया कि निश्चित रूप से अमीरात में निर्माण और निर्माण के बाद के खर्च पर 30 प्रतिशत छूट भारतीय फिल्म निर्माताओं के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन है. जिसको इसका लाभ मिला है उनमें से हिन्दी फिल्म जगत की पांच हिट फिल्म बेबी (2014), ‘ बैंग बैंग ’ (2014), ‘ ढिशूम ’ (2016) ‘ टाइगर जिंदा है ’ (2017) और ‘ रेस 3’ (2018) है. इन फिल्मों ने एक साथ अबू धाबी में तीन करोड़ 10 लाख अमेरिकी डॉलर निर्माण और निर्माण के बाद खर्च किया. वहीं, फिल्मों की शूटिंग की सुविधा के लिए सरकारी संस्थाओं तक पहुंच भी प्रदान की जाती है.

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