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रांची की सड़कों पर बढ़ रहा ट्रैफिक, व्यवस्था में बदलाव समय की मांग

रेंगता ट्रैफिक और बढ़ता वायू प्रदूषण बढ़ी समस्या

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Rajesh Das

रांची का ट्रैफिक इन दिनों रेंग रहा है, आप किसी भी सड़क पर चले जाएं. ना कोई विशेष व्यवस्था, ना कोई बुद्धिमत्तापूर्ण निर्णय और ना ही कोई ट्रैफिक संबंधी नवाचार. माननीय मुख्यमंत्री महोदय के लगातार दिए जा रहे निर्देशों के बावजूद सड़कों पर गाड़ियों की भीड़ लगातार बढ़ती ही जा रही है.

अब आज गौर कीजिए रांची नगर निगम की मॉडर्न पार्किंग पॉलिसी पर, जहां दुनिया भर के देश अपने लोगों को खुली जगह का अहसास देने के लिए वीकेंड्स में अपनी पार्किंग को बंद कर फ्री में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधाएं दे रहें है, यहां के विद्वान सलाहकार वीकेंड्स में पार्किंग शुल्क को आधा कर रहे हैं, शायद आने वाले समय में शहर में कार कर्फ्यू लगाने की सोच रहे हों.
और इसके साथ ही FJCCI समेत व्यापारी वर्ग को भी अब सोचना पड़ेगा कि आखिर दिन भर के लिए वे अपनी गाड़ियों को कहां खड़ी करेंगे, क्योंकि घंटे के हिसाब से शुल्क देना तो संभव नहीं दिखता, तो क्या वे साइकिलों से आएंगे (जो अगर सुरक्षित हो तो काफी बढ़िया रहेगा) या पब्लिक ट्रांसपोर्ट (अगर मिल सके तो) का उपयोग करेंगे, यह सब देखना काफी दिलचस्प रहेगा.

अगर आप ‘The Telegraph’ के तीन वर्ष पुराने नवंबर 11, 2015 की रिपोर्ट पर गौर करेंगे तो आप पाएंगे की अकेले 1200 फोर व्हीलर्स गाड़ियों की डिलीवरी रांची में दीपावली के दिनों में हुई थी, 5000 से आधिक टू व्हीलर्स की बिक्री अकेले धनतेरस के दिन ही हुई थी. SIAM के ताजा आंकड़ों के अनुसार पिछली तिमाही में देशभर में 69 लाख गाड़ियों की बिक्री हुई है, जो एक रिकॉर्ड है. सरकार ऑटो लॉबी के आगे कई वजहों से नतमस्तक है और इसी वजह से हमारा देश गाड़ियों के अनुसार योजनाएं बना रहा है जबकि योजनाएं लोगों को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए.

ओस्लो, नॉर्वे की राजधानी और एक महत्वपूर्ण शहर है और पिछले वर्ष ही ओस्लो ने ऐलान किया है कि वर्ष 2019 तक वे प्राइवेट कारों को बैन कर रहे है. और इसके साथ-साथ नार्वे के कई शहरों ने भी ऐसा ही ऐलान कर दिया है जिससे एक नागरिक-केंद्रित ग्रीन मोबिलिटी सिस्टम तैयार किया जा सके. ऐसा कोई एकदिन में नहीं सोचा गया है, ट्रैफिक जाम के साथ-साथ पूरे विश्व में बढ़ता वायु-प्रदूषण भी चिंता का कारण बना हुआ है. आप सिर्फ़ अपने शहर को छोड़कर कुछ दिन प्रकृति के पास जाएं, आप पाएंगे कि वैसी चीज़ें जो आपके स्वास्थ्य को रोजाना के स्तर पर प्रभावित करती है, वे कम हो गयी है या बिल्कुल ख़त्म हो गयी हैं.

इसी प्रकार हेलसिंकी ने 2025 तक “मोबिलिटी ऑन डिमांड” नीति को लागू करने का निश्चय किया हुआ है. जहाँ कोई कार चलाना ही ना चाहे. मैड्रिड ने 2020 तक की कार-मुक्त समय सीमा तय कर दी है. मिलान ने तो वीकेंड्स में मुफ़्त पब्लिक सवारी की सुविधा दे दी है और साथ ही वीकेंड्स में ही तमाम पार्किंग्स को बंदकर लोगों को खुली जगह का शानदार अहसास दिया है.

इस तरह देशभर में तेज गति से बढ़ रहे व्यापार के अग्रतर ग्रोथ को ध्यान में रखकर रांची समेत पूरे देश में नवाचारी नजरिये से काम करने की ज़रूरत है, आप सिर्फ़ ट्रैफिक पुलिस के परंपरागत यातायात नियंत्रण के भरोसे नहीं रह सकते जो सिर्फ़ एक चौक पर केंद्रित रहते हैं, क्या आपने उन्हें एक स्ट्रेच में फैलते हुए कभी देखा भी है या उस पोस्ट के समीप के व्यापारियों और निवासियों के साथ उन्होनें कोई मोबिलिटी या ट्रैफिक सुधार संबंधी उन्होंने कोई चर्चा कभी की भी है? अगर व्यापारियों से बात की जाये तो वे ज़रूर सहयोग करेंगे, क्योंकि सुगम यातायात और व्यापार का सीधा संबंध है. और अंत में, मेरे एक मित्र ने कहा कि सड़क जाम में फंसने के कारण ब्लड प्रेशर बहुत ऊपर नीचे हो जा रहा है और हमारे संवाद का स्तर भी निम्न होता जा रहा है. हमें ट्रैफिक जाम से लगातार दिक्कत हो रही है, सड़क पर गाड़ियों की वजह से दुर्घटनाएं आम है, प्रदूषण सबकी चिंता का कारण है, इसलिए तैयार रहिए विश्व भर से नयी चीज़ें आ रही है, साइकिल ने भी रफ्तार पकड़ ली है, और इन्हें सरकार तो क्या कोई भी रोक नहीं पाएगा, आखिर इन्हें आप जो ला रहे हैं!!

ये लेखक के निजी विचार हैं

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