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कोविड संकट में बच्चों में बढ़ी निगेटिविटी, लंबे समय तक रहेगा असर : सर्वे

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  • पढ़ाई से दूर हुए, हिंसक घटनाओं से हुआ सामना
  • सेव द चिल्ड्रेन के सर्वे में हुआ खुलासा
  • भारत सहित विश्व के 46 देशों के बच्चों पर हुआ सर्वे
  • देश में झारखंड सहित 11 राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेश में हुआ ये सर्वे

Praveen Munda

Ranchi : बच्चों के लिए काम करनेवाली अंतरराष्ट्रीय संस्था ‘सेव द चिल्ड्रेन’ ने कोविड के दौरान बच्चों के अंदर हुए परिवर्तन पर अपनी हालिया सर्वे रिपोर्ट जारी कर दी है. इसमें कहा गया है कि कोविड और इसके बाद लॉकडाउन के दौरान बच्चों के मन में नकारात्मक प्रवृति बढ़ी है.

सर्वे में बच्चों के जितने ग्रुप को शामिल किया गया था उनमें प्रत्येक ग्रुप के चार में से तीन बच्चों ने यह माना है कि महामारी के बाद उनके अंदर नकारात्मक भावनाएं बढ़ी हैं. इसके अलावा 17 प्रतिशत बच्चों ने कहा कि इस दौरान उनके घर में हिंसक घटनाएं हुई हैं.

यह रिपोर्ट चिंता पैदा करनेवाली है क्योंकि इस साल कई महीने तक जो भावनाएं बच्चों के अंदर पैदा हुईं उसका असर उनकी जिंदगी पर लंबे समय तक रह सकता है.

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बता दें कि सेव द चिल्ड्रेन का यह सर्वे मार्च से लेकर अक्तूबर तक कोविड के बच्चों पर असर को लेकर था. यह वैश्विक सर्वे था जिसमें भारत सहित विश्व के कुल 46 देशों को शामिल किया गय़ा था. भारत में झारखंड सहित 11 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में यह सर्वे किया गया.

झारखंड में सर्वे में पलायन करने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों को शामिल किया गया था. जिन बच्चों को शामिल किया गया उनकी औसत उम्र 11 से 17 साल तक की है.

इस सर्वे का संक्षेप में निष्कर्ष यह है कि महामारी की परछाई में बच्चों के मानसिक सेहत को बुरी तरह नुकसान हुआ है. सर्वे में ज्यादातर बच्चे और उनके अभिभावक कमजोर आय ग्रुप से थे. इन बच्चों की पढ़ाई पर काफी असर पड़ा है. पहले से ही समाज में पीछे चल रहे ये बच्चे और उनके परिवार और विकास की धारा में और पीछे हो गए हैं.

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सर्वे में यह तथ्य भी है कि प्रत्येक पांच में से चार बच्चों ने पढ़ाई में बाधा आने की बात मानी है. इसका अर्थ यह है कि ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था में इन बच्चों के लिए वह सुविधा नहीं थी कि वे अपनी पढ़ाई को बेहतर तरीके से जारी रख सकें.

60 प्रतिशत परिवार महामारी के दौरान भोजन की कमी से जूझता रहा. इससे इन बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास अवरुद्ध हुआ. पलायन करने वाले 27 प्रतिशत बच्चों के पास सही तरीके से पानी की उपलब्धता भी नहीं थी. 35 बच्चे ऐसे थे जिन्हें बीमारी के दौरान दवाएं भी नहीं मिल सकी.

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