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MNREGA में महिलाओं की बढ़ेगी भागीदारी, CLF को बनाया जायेगा कार्यक्रम क्रियान्वयन एजेंसी

Ranchi : ग्रामीण विकास विभाग मनरेगा कार्यक्रम की रफ्तार तेज करने में लग गया है. विभाग ने फैसला लिया है कि दीनदयाल अंत्योदय योजना (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन- DAY-NRLM) के अंतर्गत गठित संकुल स्तरीय फेडरेशन (Cluster Level Federation) को मनरेगा के विभिन्न कार्यक्रमों के लिये कार्यक्रम क्रियान्वयन एजेंसी (PIA) बनाया जायेगा.

इनमें सामाजिक वानिकी, बागवानी, जल संरक्षण, दीदी बाड़ी योजना और व्यक्तिगत लाभ योजना जैसे प्रोग्राम शामिल हैं. इस संबंध में 18 जनवरी को एक आदेश जारी कर दिया गया है. सभी जिलों के डीसी, डीडीसी को इसके बारे में सूचित भी कर दिया गया है.

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इस आदेश पर मनरेगा कर्मियों ने आपत्ति जतानी शुरू कर दी है. कर्मियों ने कहा है कि इससे मनरेगा कार्यक्रमों को धरातल पर उतारने में दो-दो एजेंसी आमने सामने होगी और टकराव की स्थिति पैदा होगी.

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ऐसे बढ़ायी जायेगी महिलाओं की भागीदारी

मनरेगा में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने पर ग्रामीण विकास विभाग का जोर है. 18 जनवरी को डीसी को लिखे गये पत्र में कहा गया है कि झारखंड राज्य दीनदयाल अंत्योजय योजना (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) के तहच जमीनी स्तर पर ग्रामीण महिलाओं की सशक्त संस्थाएं गठित की गयी हैं.

उस प्रोग्राम के अंतर्गत एसएचजी (स्वयं सहायता समूह) के संकुल स्तरीय फेडरेशन (सीएलएफ) का भी गठन किया जा रहा है. इसे मनरेगा के अंतर्गत क्रियान्वयन एजेंसी के तौर पर नामित किया जा सकता है.

मनरेगा के सर्कुलर (कंडिका 6.7.2 और 7.1.1) में भी मनरेगा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और क्रियान्वयन एजेंसी के तौर पर एसएचजी की मदद लिये जाने संबंधी बिंदु हैं.

ऐसे में जो सीएलएफ (क्लस्टर लेवल फेडरेशन) 3 महीने या इससे पुरानी और सक्षम हो, उन्हें मनरेगा कार्यक्रमों के क्रियान्वयन एजेंसी के रुप में काम करने के लिये प्रोत्साहित किया जाये. इस काम में जेएसएलपीएस के सीइओ पहल करेंगे.

CLF कैसे करेगा योजनाओं का क्रियान्वयन

विभाग ने Cluster Level Federation के जरिये मनरेगा कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिये कुछ गाइडलाइन निर्धारित किये हैं. इसके मुताबिक CLF जल संरक्षण, दीदी बाड़ी और ऐसे ही अन्य योजनाओं के लिये ग्राम संगठनों के माध्यम से लाभुकों का चयन करेगा.

ग्राम सभा में इसे पारित करने, उसका अनुमोदन पंचायत समिति और जिला परिषद से भी प्राप्त करने का काम करेगा. अनुमोदित योजनाओं का क्रियान्वयन भी केवल CLF के जरिये होगा. इसी तरह से अन्य कई बिंदुओं का पालन करना उसके लिये जरूरी होगा.

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क्या कह रहा है मनरेगा कर्मचारी संघ

मनरेगा कर्मचारी संघ ने CLF को प्रोत्साहित किये जाने के संबंध में ग्रामीण विकास विभाग के आदेश पर सवाल उठाया है. इस संबंध में वे अलग अलग मंचों, जनप्रतिनिधियों से संपर्क करते हुए विरोध जताने लगे हैं.

रांची जिला मनरेगा कर्मचारी संघ के अध्यक्ष संजय प्रमाणिक ने पिछले दिनों खिजरी विधायक राजेश कच्छप से मुलाकात की. मनरेगा कर्मियों ने कहा कि विभाग ने CLF के संबंध में जो आदेश जारी किये हैं, उससे मनरेगा कर्मियों के दायित्व ही खत्म हो जायेंगे.

मनरेगा एक्ट में पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर क्रियान्वयन एजेंसी रखने का प्रावधान है. मनरेगा के शुरूआती दौर में एजेंसी के माध्यम से ही काम होते थे.

पर कई व्यावहारिक कठिनाईयों के कारण पंचायतों को ही मनरेगा कार्यक्रम के शत प्रतिशत संचालन की जिम्मेदारी मिली. फिर से CLF को सामने करने से दिक्कतें आयेंगी. एक ही पंचायत में दो क्रियान्वयन एजेंसी रखने का कोई औचित्य नहीं है.

वर्तमान में मनरेगा का पेमेंट मुखिया और पंचायत सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से होता है. पर CLF को एजेंसी बनाये जाने से उसके अध्यक्ष औऱ सचिव के हाथों हस्ताक्षर होगा. जबकि दोनों लगो ना तो सरकारी सेवक हैं ना जनप्रतिनिधि. इस आदेश को वापस लिया जाये.

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