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किसकी जेब में जा रहा है हर महीने शराब कारोबार के अवैध वसूली का 65-70 करोड़, शराब दुकानदार कह रहे ऊपर से है वसूली का आदेश

 

(साभार: पंकज सिंह के फेसबुक वॉल से)

Akshay Kumar Jha

Ranchi: ऊपर लगा वीडियो बोकारो जिले के बेरमो अनुमंडल का है. वीडियो में साफ तौर से फील्ड मैनेजर यह बात कबूल रहा है कि शराब के हर बोतल पर ज्यादा कीमत वसूली जा रही है. भले ही ये वीडियो बेरमो का है, लेकिन पूरे राज्य में ऐसी ही स्थिति बनी हुई है. हर दुकान में शराब की कीमत बढ़ाकर वसूली जा रही है. कहा जा रहा है कि पैसा ऊपर तक जाता है. यहां तक कि ऐसे कई वीडियो हैं जिसमें उत्पाद विभाग के मंत्री जगरनाथ महतो का भी नाम लिया जा रहा है. एक जून को उत्पाद विभाग के सचिव विनय चौबे जो मुख्यमंत्री सचिवालय के सचिव भी हैं, उन्होंने उत्पाद विभाग के भवन में प्रेस वार्ता कर पत्रकारों को यह बताया था कि जब से शराब सरकार बेच रही है, विभाग को लगातार मुनाफा हो रहा है. उन्होंने कहा था कि करीब 200 करोड़ का मुनाफा हर महीने के लिए तय किया गया है. जिसे सरकारी कोष में जमा करा दिया जाएगा. लेकिन सवाल अब यह उठ रहा है कि हर शराब की बोतल पर बढ़ी हुई कीमत जो वसूली जा रही है, वो पैसा किस कोष में जमा हो रहा है. क्या आउटसोर्स कंपनियां ज्यादा पैसा वसूल रही हैं. या फिर विभाग के दबाव में कंपनी ऐसा कर रही है.

 

65-70 करोड़ की हर महीने हो रही अवैध कमाई

जैसा कि ऊपर लगे वीडियो में साफ सुना जा सकता है कि क्वार्टर के बोतल पर 10, हाफ पर 20 और फुल की बोतल पर 30 रुपए की अवैध वसूली हो रही है. झारखंड में करीब 1500 खुदरा शराब दुकान है. बताया जा रहा है कि रांची शहर के अलावा राज्य के करीब 1400 दुकानों में यह अवैध वसूली का खेल जारी है. एक हिसाब के मुताबिक हर दिन एक दुकान करीब 30 हजार की अवैध वसूली हो रही है. इस हिसाब से करीब 1400 दुकानों में 65-70 करोड़ से ज्यादा की वसूली हर महीने हो रही है. अब सवाल ये कि ये 65-70 करोड़ रुपए का बंटवारा किसके बीच हो रहा है. दुकान में शराब बेचने वाले सेल्स मैन का साफ कहना है कि इस अवैध वसूली से उन्हें कुछ नहीं मिल रहा. पूरा पैसा हिसाब के साथ आउटसोर्स कंपनी को सौंपना पड़ता है.

 

किसी दुकान में रेट चार्ट नहीं, ना ही डिजीटल पेमेंट की व्यवस्था

शराब कारोबार में वसूली बड़े ही सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है. झारखंड के किसी भी शराब दुकान में अबतक रेट चार्ट नहीं लगा हुआ है. जबकि उत्पाद विभाग हरगिज इस बात की इजाजत नहीं देता है. रेट चार्ट नहीं लगाने के पीछे कहा जा रहा है कि अगर रेट चार्ट लग गया तो हर ग्राहक ज्यादा पैसे देने का विरोध करेगा. जिससे वसूली पर असर पड़ेगा. इसलिए रेट चार्ट नहीं लगाया जाता. इसके अलावा उत्पाद विभाग के सचिव ने दावा किया था कि हर दुकान में डिजीटल पेमेंट की व्यवस्था जल्द ही लागू की जाएगी. लेकिन ऐसा अभी तक नहीं हुआ है. शहर के इक्का-दुक्का दुकानों में स्वैप पॉश मशीन भले ही मिल जाए. शहर के बाहर किसी दुकान में डिजीटल पेमेंट की व्यवस्था नहीं है. यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि पॉश मशीन होने के बावजूद दुकान में मौजूद सेल्स मैन एटीएम से पैसा लेने से मना करते है. हंगामा होने के बाद ही पैमेंट होता है.

नोटः इस मामले पर कमेंट लेने के लिए उत्पाद मंत्री जगरनाथ महतो को दो बार फोन लगाया गया लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया.

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