Opinion

कोरोना वेक्सिन को लेकर जारी घिनौनी राजनीति को इस तरह समझिये

विज्ञापन
Advertisement

Faisal Anurag

कोरोना संक्रमण मामले में दुनिया में भारत तीसरे नबंर पर पहुंच गया है. जबकि जांच की गति के मामले में 130वें स्थान पर है. यदि जानकारों की मानें तो ब्राजील को पीछे छोड़ दूसरे नंबर पर भारत अगले दो महीने में पहुंच सकता है. यह सवाल उठना लाजिमी ही है कि जापान जैसे देशों ने आखिर किस तरह कोविड के प्रभाव को कम किया.

जबकि एक समय उसके भारत से बहुत आगे जाने की बात की जा रही थी. सर्वाधिक प्रभावित तीनों देश अमरीका, ब्राजील और भारत वे देश हैं जो मार्च तक कोरोना वायरस को कमतर आंक रहे थे. 15 मार्च के पहले भारत सरकार के तमाम बयान यही संकेत दे रहे थे. और ब्राजील के राष्ट्रपति तो सामान्य खांसी-बुखार बता रहे थे. ट्रंप उस समय तक इस महामारी का मजाक बना रहे थे. स्थिति की गंभीरता से उपजे सवालों को नजरअंदाज करने का समय जा चुका है.

advt

कोविड19 को ले कर दावों और असलियत का अंतर एक खास तरह की हड़बड़ी का संकेत देता है. जिस पर भारत के अनेक डाक्टरों ने सवाल उठाए और मुकदमा झेलने को लिए बाध्य हुए. ऐसे हालात में विशेषज्ञों की राय का अपना ही महत्व है. अब वेक्सिन निर्माण को अगस्त 15 तक पूरा करने के लक्ष्य को ले कर भी वैज्ञानिकों ने सवाल उठाए हैं और आपत्तियां दर्ज की हैं.

इसे भी पढ़ेंः पाकुड़: नगर परिषद पर LED लाइट लगाने में धांधली का आरोप, बिना टेंडर के ही कंपनी को दिया काम

अब भारत में 17 अगस्त को लांच होनेवाले वेक्सीन को ले कर विवाद गहरा गए हैं. लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि सरकार के लोग इन चर्चाओें से नाखुश हैं. आखिर वह कौन सी हड़बड़ी है जो वैज्ञानिकों के सवालों के सवालों को नजरअंदाज कर रही है. दुनिया में इस समय 11 वेक्सिन ट्रायल के लिए तैयार हैं. लेकिन केवल भारत ही वह देश है जिसने वेक्सिन लांच किए जाने की तैयारियां शुरू कर दी हैं. मेडिकल मामलों के जानकार डॉ नवनीत नव के अनुसार अगर वेक्सिन बहुत जल्द अप्रूव होती है तो सुरक्षा प्रोफाइल खराब होने का भी खतरा है. ऐसा हुआ तो वेक्सिन किसी काम की नहीं रहेगी. और दोबारा से बनानी पड़ेगी. यही कहा जा सकता है कि वेक्सिन बनाने का काम चल रहा है. बहुत द्रुतगति से चल रहा है.

लेकिन इसके बावजूद यह रातों-रात तैयार नहीं होगी. विज्ञान मंत्रालय ने भी कह दिया है कि 2021 के पहले वेक्सिन के आने की संभावना नहीं है.  वेक्सिन बनाने वाली भारती की कंपनी ने भी कहा है कि अक्तूबर के पहले तक ट्रायल के पूरा होने की संभावना नहीं है. भारत के शीर्ष वैज्ञानिकों की संस्था ‘भारतीय विज्ञान अकादमी’ (IASc) ने ICMR द्वारा आनन-फ़ानन में 15 अगस्त तक कोरोना वायरस की वेक्सिन तैयार कर लेने के दावे पर कड़ी आपत्ति जतायी है. कहा है कि वेक्सिन निर्माण में जल्दबाज़ी से करोड़ों देशवासियों के स्वास्थ्य और जीवन के लिए दीर्घकालिक नुक्सानदेह परिणाम हो सकते हैं.

इसे भी पढ़ेंः शादी से पहले सजना के लिए पार्लर में सजने गई थी सजनी, प्रेमी ने रेत दिया गला

इतनी सारी चेतावनियों के बावजूद आखिर आइसीएमआर किस दबाव में 15 अगसत का डेटलाइन तय कर रहा है. 15 अगसत को लालकितले से प्रधानमंत्री देश को संबोधित करते हैं. इन दोनों के बीच के अंतर संबंध को आसानी से समझा जा सकता है. खासकर आर्थिक गिरावट को लेकर सरकार के हाथपांव फुले हूए हैं. ऐसे में वेक्सिन की उम्मीद लोगों के बीच नए किस्म का भ्रम अभी से पैदा कर रही है. सवाल है कि क्या अधिकारी और सरकार के दबाव में आइसीएमआर है. दबी जुबान से इस दबाव की चर्चा पिछले दो महीने से हो रही है और जानकार आइसीएमआर के कई कदमों से असंतुष्ट बजाए जा रहे हैं. बावजूद अभी सरकारी तंत्र में वेक्सिन को ले कर उठायी गयी आपत्तियों को चिंता की नजर से नहीं देखा जा रहा है.

भारतीय विज्ञान अकादमी,  जिसमें भारत के अनेक शीर्ष वैज्ञानिक शामिल हैं, की आपत्तियां बेहद गंभीर हैं. अकादमी के इस नजरिए को मीडिया ने भी तरजीह नहीं दी है. अकादमी के अध्यक्ष और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ बॉयोमेडिकल जेनॉमिक्स के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. पार्थ प्रतिम मजूमदार के हस्ताक्षर से जारी प्रेस बयान में कहा गया है कि किसी कैंडिडेट वेक्सिन के लिए वैज्ञानिक परीक्षणों में स्वस्थ स्वैच्छिक भागीदार मनुष्यों की आवश्यकता होती है. इसलिए परीक्षण शुरू करने से पहले कई आचार-संबंधी और विनियामक स्वीकृतियां लेनी पड़ती हैं. हालांकि प्रशासनिक स्वीकृतियों में तेज़ी लायी जा सकती है. मगर प्रयोग और डेटा संग्रह की वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के लिए एक प्राकृतिक समय अवधि होती है. जिसे वैज्ञानिक कठोरता के मानकों से समझौता किए बिना जल्दी में नहीं किया जा सकता है. विज्ञान अकादमी की प्रेस विज्ञाप्ति में यह कहा गया है.

खबरों के अनुसार हालांकि आईसीएमआर द्वारा इतनी जल्दी वेक्सिन बनाने के दावों पर कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सवाल खड़े किए हैं. वेक्सिन का विकास करने वाली भारत बॉयोटेक खुद अक्टूबर से पहले वेक्सिन का ट्रायल पूरा करने से इनकार कर रही है. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, कंपनी का कहना है कि पहले और दूसरे चरण का ट्रायल अक्टूबर तक ही हो पाएगा.

आइसीएमआर द्वारा वेक्सिन के लिए समयसीमा निर्धारित किए जाने पर डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने भी आश्चर्य जताया है. पत्र के लहजे और जल्दबाजी के संकेत से कुछ वैज्ञानिक चिंतित हैं.

सवाल उठ रहा है कि इन आपत्तियों के बावजूद आइसीएमआर ने उन पर विचार करना तक जरूरी क्यों नही समझा है. दुनिया के स्तर पर भी कई कंपनियों की वेक्सिन प्रक्रिया को ले कर सवाल उठने के बाद कंपनियों ने उस पर संवाद किया. और अपने तरीकों में भी बदलाव लाया है. आइसीएमआर को भी सवालों का जवाब देने से परहेज नहीं करना चाहिए और वेक्सिन प्रक्रिया की परदर्शिता को स्पष्ट बताना चाहिए. दुनिया के मानकों पर खरा उतरने के लिए उन सवालों के जवाब जरूरी हैं, जिसे वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने उठाया है.

इसे भी पढ़ेंः चुनाव आयोग का गैरजरूरी और बेतुका फरमान

advt
Advertisement

4 Comments

  1. I love looking through a post that can make people think. Also, many thanks for permitting me to comment!

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Articles

Back to top button
Close
%d bloggers like this: