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झारखंड के इस स्थान पर दिन में दिखते हैं भूत-प्रेत, मिलती है प्रेतबाधा से मुक्ति

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Dilip Kumar

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Palamu : भारत डिजिटल होता जा रहा है. विज्ञान तरक्की कर मंगल ग्रह तक पहुंच गया है, लेकिन झारखंड के कई गांवों में आज भी अंधविश्वास का डेरा है. आजादी के 70 वर्ष से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी ग्रामीणों के साथ-साथ कुछ शहरी परिवेश के लोग कथित भूत-प्रेत बाधा से बाहर नहीं निकल पाये हैं. ऐसे लोगों की लंबी फौज है, जो भूत-प्रेत लगने से हमेशा परेशान दिखते हैं.

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पलामू के हैदरनगर में 70 वर्ष से आस्था के मंदिर में अंधविश्वास का डेरा 

झारखंड के पलामू जिला अंतर्गत हैदरनगर देवी धाम में पिछले 70 वर्ष से आस्था के नाम पर अंधविश्वास फैला हुआ है. इन दिनों चैत्र नवरात्र चल रहा है. पूरे नवरात्र समेत चैत्र पूर्णिमा तक यहां दिन के उजाले से रात के अंधेरे में कथित भूत-प्रेत दिख रहे हैं. प्रेत बाधा से परेशान हजारों लोग यहां मुक्ति के लिए पहुंचे हैं. कुछ लोग संतान प्राप्ति की इच्छा लेकर भी यहां पहुंचते हैं. पूरा मंदिर परिसर समेत आस-पास के इलाकों में लोगों का जमावड़ा लगा हुआ है.

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भूत मेला की निगरानी करती है पुलिस

ऐतिहासिक देवी धाम मंदिर

हैदरनगर देवी धाम परिसर में भूतों की हर तरह की हरकत सच में देखने को मिलती है. इसे अंधविश्वास कहें या आस्था, जो लोगों के सिर चढ़कर बोलती है. फिर भी पलामू प्रशासन की ओर से इस मेला में आने वाले लोगों को जागरुक करने व उनका मनोवैज्ञानिक ईलाज करने की कोई व्यवस्था नहीं की जाती है. यह सभी जानते हैं कि इसे रोकना काफी मुश्किल है. पर उन्हें अंधविश्वास के प्रति जागरुक तो किया जा सकता है. चिकित्सकों का दल बैठाया जा सकता है. इस दिशा में अब तक कोई प्रयास नहीं किया गया. मेला स्थल पर 24 घंटे पुलिस का पहरा लगा रहता है.

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विश्वास ना हो तो मेला देखने पहुंचे हैदरनगर

देवी धाम परिसर का दृश्य देख आप आश्चर्य में पड़ जायेंगे. यहां कथित भूत प्रेत बाधा से पीड़ित लोग नाचते-झूमते हैं. विश्वास नहीं होता है, तो चले आइये, इस मेला में. पलामू जिले के हैदरनगर में पिछले 70 वर्षों से भूत मेला लगते आ रहा है. इस धाम को शक्ति पीठ के नाम से भी जाना जाता है. जिस किसी बच्चे, स्त्री एवं पुरुष पर कथित भूतों की छाया रहती है, वे भूतों से छुटकारा पाने के लिए इस जगह पर आते है. उन्हें यहां आने के बाद भूतों से पूर्ण रूप से छुटकारा मिल भी जाता है. ऐसा आने वाले लोग मानते हैं.

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साम्प्रदायिक सौहार्द्र की मिसाल

देवी धाम मंदिर के पास एक जिन बाबा का मजार भी है. जिस कारण लोगों का मानना है कि यहां भूत-प्रेतों से छुटकारा मिलना और भी आसान हो जाता है. एक ही परिसर में एक तरफ पूजा तो दूसरी ओर फातेहा होता है. इससे परिसर में साम्प्रदायिक सौहार्द्र देखते बनता है. लोग बताते है कि इस मेले में दूर-दूर से आकर बहुत से लोग ओझा-गुनी एवं डायन की सिद्धि भी प्राप्त करते हैं.

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चार से पांच राज्यों के श्रद्धालु पहुंचते हैं यहां

इस स्थान पर बिहार, बंगाल, छत्तीसगढ़, एमपी, यूपी व झारखंड राज्य के कोने कोने से लोग आते हैं. अपने कष्टों से निवारण पाते हैं. इस जगह पर साल में दो बार चैती नवरात्रि एवं शारदीय नवरात्र के एकम से नवमी तक भव्य मेला लगता है. मेला से रेलवे को अच्छी खासी आय होने की वजह से हैदरनगर रेलवे स्टेशन को मॉडल स्टेशन का दर्जा मिला है. हैदरनगर के जिस स्थान पर भूत मेला लगता है, वहीं पर देवी मां का विशाल मंदिर स्थापित है.

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अग्नि कुंड के पास जाते ही झूमने लगते हैं भूत-प्रेत से प्रभावित

इस मंदिर परिसर में एक अग्नि कुंड स्थापित है. जिन लोगों पर भूत प्रेत की छाया रहती है, वे अग्नि कुंड के पास जाते ही नाचने एवं झुमने लगता हैं. इस स्थान पर लोगों के शरीर में छिपी आत्मा अनेक प्रकार के करतब दिखाने लगती है. जिसे देखकर लोग आश्चर्यचकित हो जाते हैं. नवरात्रि के समय यहां पर भीड़ इतनी काफी हो जाती है. साड़ियों एवं चादरों से तम्बू बनाकर लोगों का रहना मजबूरी है. इस स्थान पर लोग डर से रहना पसंद नहीं करते. इस जगह पर वही लोग निवास करते है, जो शुरू से ही इस जगह पर रहते आ रहे हैं.

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पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो रहा मेला स्थल

सरकार ने इस देवी धाम को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर रही है. इसे लेकर चहारदीवारी, सड़क, बिजली, शौचालय व पेयजल की समुचित व्यवस्था का कार्य प्रगति पर है. मेला स्थल से सटे हैदरनगर रेलवे स्टेशन है. ट्रेन से यहां आना काफी सुलभ होता है. यही कारण है कि बरकाकाना से डेहरी तक चलने वाली पैसेंजर ट्रेनों मेला शुरू होते ही यात्रियों की भारी भीड़ बढ़ जाती है.

कहां स्थित है हैदरनगर?

हैदरनगर पलामू जिला मुख्यालय से 90 किलोमीटर दूर हैं. यहां ट्रेनों से पहुंचना काफी सुविधाजनक रहता है. हालांकि बस से भी यहां पहुंचा जा सकता है. मंदिर से सटे जहां हैदरनगर रेलवे स्टेशन है, वहीं मुख्य सड़क भी है. इसलिए यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है.

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दवा न कराकर दुआ के लिए पहुंचते हैं यहां

प्रेत-बाधा से परेशान लोगों की मनोदशा देखकर लगता है कि देश मंगल पर पहुंचा पर लोगों के जीवन से मंगल कोसो दूर है. 21वीं सदी के इस युग में मन पर अंधविश्वास हावी है. तरक्की करना तब सार्थक सिद्ध होगा जब लोगों के मानस पटल से अंधविश्वास दूर होगा. आज के इस वैज्ञानिक युग में भी इस तरह का आस्था और अंधविश्वास देखने को मिल रहा है. जहां लोग दवा न कराकर दुआ के लिए पहुंचते हैं.

यहां आने वाले बहुत लोग श्रद्धा व भक्ति के उद्देश्य से भी आते हैं. लेकिन उनकी संख्या कम रहती है. प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि सरकार को इसके लिए मेला अवधि तक परिसर में मनोचिकित्सक व अंधविश्वास से निपटने के लिए जन जागरुकता अभियान चलाना चाहिए. यही इसके समाधान की दिशा में सकारात्मक कदम होगा.

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