न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें
bharat_electronics

राज्य में सामाजिक सुरक्षा योजना का हाल बेहाल, 8.5 लाख वृद्ध पेंशन से वंचित

243

Ranchi : फूलमनी उरांव नामकुम प्रखंड से राजभवन के पास सामाजिक सुरक्षा पर हो रही जनसुनवाई में पहुंचीं. इनकी पेंशन दो वर्ष पूर्व बंद कर दी गयी है. 65 वर्ष से अधिक उम्र होने के बाद दो साल में करीब 20 बार से अधिक प्रखंड कार्यलय के चक्कर काट चुकी हैं, फिर भी वृद्धा पेंशन शुरू नहीं हो सकी. जब वह प्रखंड कार्यालय जाती हैं, तो कहा जाता है कि आधार से आपकी पेंशन लिंक नहीं है. झारखंड में इस तरह के जरूरतमंद वृद्धों की संख्या लगभग 8.5 लाख से भी अधिक है, जिन्हें पेंशन नहीं मिल रही है या बंद हो चुकी है. राज्य सरकार वृद्धजनों की पीड़ा समझना नहीं चाह रही है. शुक्रवार को राजभवन में ऐसे सैकड़ों पेंशनधारियों ने अपनी समस्याओं को रखा.

eidbanner

इसे भी पढ़ें- गिरिडीह : हंगामे की भेंट चढ़ा आयुष्मान भारत पंजीयन केंद्र, महिलाओं को लगी चोट

पेंशन के अधिकार को सार्वभौमिक करने की मांग

राज्य में 17 लाख वृद्ध, विधवा और दिव्यांग व्यक्ति, जो सामाजिक सुरक्षा पेंशन के योग्य हैं, लेकिन अपने पेंशन के अधिकार से वंचित हैं. इसका एक मुख्य कारण है पेंशन योजनाओं का सार्वभौमिक न होना. जिन पेंशनधारियों को पेंशन मिलती भी है, उन्हें ससमय और नियमित रूप से नहीं मिलती है. लोगों को पेंशन के आवेदन की प्रक्रियाओं और राशि निकासी में प्रशासनिक त्रुटियों से जूझना पड़ता है, खासकर आधार की अनिवार्यता के कारण. 2016-17 में तीन लाख पेंशनधारियों को ”फर्जी” बताकर पेंशन सूची से हटा दिया गया था, लेकिन इस क्रम में ऐसे अनेक पेंशनधारियों को भी हटा दिया गया, जिनका पेंशन खाता आधार से नहीं जुड़ा था. इसीलिए शुक्रवार को झारखंड के विभिन्न जिलों से सैकड़ों वृद्ध, विधवा, एकल महिलाएं और दिव्यांग भोजन का अधिकार अभियान झारखंड और पेंशन परिषद द्वारा आयोजित जनसुनवाई के लिए एकत्रित हुए. उन्होंने अपनी समस्याओं को साक्ष्य के साथ ज्यूरी पैनल के समक्ष प्रस्तुत किया. उनकी मुख्य मांग थी कि पेंशन के अधिकार को सार्वभौमिक किया जाये. यह गौर करने की बात है कि 1 अक्टूबर को वृद्धों के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाता है और इससे ठीक पहले इन वृद्धों ने यह मांग रखी.

राज्य में सामाजिक सुरक्षा योजना का हाल बेहाल, 8.5 लाख जरूरतमंद पेंशन से वंचित

इसे भी पढ़ें- डीसी साहब ! उज्जवला योजना का हो गया बंटाधार, गैस किसी और को मेरे हिस्से सिर्फ सब्सिडी

जनसुनवाई के पैनल में ये थे शामिल

इस जनसुनवाई के लिए पैनल में बलराम (भोजन का अधिकार अभियान), शादाब (HRLN) और बिन्नी आजाद (एकल नारी शक्ति संगठन) शामिल थे.

झारखंड में पेंशन की दयनीय स्थिति हुई स्पष्ट

जनसुनवाई के दौरान पेंशनधारियों की मौखिक और लिखित गवाही से झारखंड में पेंशन की दयनीय स्थिति स्पष्ट हो गयी. उन्होंने बताया कि अगर व्यक्ति का नाम इस सूची में न हो, तो वह केंद्र सरकार की पेंशन की योजनाओं के लिए हकदार नहीं होता है. साथ ही, ग्रामीण क्षेत्र में जो 875 रुपये प्रति माह से अधिक कमाते हैं, वे राज्य पेंशन योजनाओं के लिए हकदार नहीं होते हैं. साथ ही, पेंशन योजनाओं में आधार की अनिवार्यता ने तबाही मचायी है. ऐसा दावा है कि इस अनिवार्यता के कारण पिछले एक साल में झारखंड में कम से कम पांच लोगों की भूख से मौत हो गयी है. किसी की पेंशन आधार से जुड़े गलत खाते में चली गयी, तो किसी की राशि निकासी के दौरान आधार-आधारित बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण में उंगलियों का निशान मशीन रीड नहीं कर पायी. अन्य समस्याओं, जैसे- आवेदन की जटिल प्रक्रियाएं, भुगतान में अनियमितता और विलंब, 600 रुपये प्रति माह की पेंशन राशि एवं राशि निकासी में समस्याएं आदि ने भी जीवनरेखा को कमजोर कर दिया है.

इसे भी पढ़ें- 12 हजार के शौचालय के लिए देनी पड़ती है 15 सौ रुपये की घूस

‘APL-BPL खत्म करो, सबको राशन-पेंशन दो’ के लगे नारे

यह चिंता का विषय है कि पेंशनधारियों की समस्याएं न सत्ता पक्ष की राजनीतिक प्राथमिकताओं में दिखती है और न ही अधिकांश विपक्षी दलों की. लोगों ने APL-BPL खत्म करो, सबको राशन-पेंशन दो” के नारे के साथ निम्न मांगें रखीं- पेंशन के अधिकार का सार्वभौमिकरण, पेंशन योजनाओं से आधार की अनिवार्यता को हटाया जाये, ससमय भुगतान सुनिश्चित हो, पेंशन राशि को बढ़ाकर कम से कम 2000 रुपये प्रति माह किया जाये और मुद्रास्फीति से जोड़ा जाये एवं योग्यता की उम्र को 55 वर्ष (महिलाओं के लिए 50 वर्ष) किया जाये. उनकी यह अपेक्षा भी है कि उनकी समस्याएं और मांग सभी राजनीतिक दलों की प्राथमिकता बनें.

राज्य में सामाजिक सुरक्षा योजना का हाल बेहाल, 8.5 लाख जरूरतमंद पेंशन से वंचित

इसे भी पढ़ें- ट्रिपल आईटी : जमीन अधिग्रहण के चार साल बाद भी नहीं मिला पूरा मुआवजा, सरकार के पास नहीं थे पैसे !

ट्विटर पर #BhookhKiBaat कैंपेन चलाया जायेगा

जनसुनवाई के दौरान कहा गया कि यह नहीं भूलना चाहिए कि आज से एक साल पहले सिमडेगा की 11 वर्षीय संतोषी कुमारी अपनी मां को भात-भात कहते-कहते भुखमरी की शिकार हो गयी थी. आधार से लिंक न होने के कारण उसके परिवार का राशन कार्ड रद्द कर दिया गया था. यह चिंता की घड़ी है. सर्वोच्च न्यायालय ने आधार अधिनियम की धारा 7 को रद्द नहीं किया. इसके कारण अब भी हाशिये पर रहनेवाले करोड़ों लोगों को जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार पर निर्भर रहना पड़ेगा. भोजन का अधिकार अभियान इस दिन को भूख से हुई मौतों के विरुद्ध एक राष्ट्रीय विरोध दिवस के रूप में मनायेगा. विभिन्न राज्यों में विरोध कार्यक्रमों एवं #BhookhKiBaat पर ट्विटर कैंपेन का आयोजन किया जायेगा.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

dav_add
You might also like
addionm
%d bloggers like this: