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वन विभाग की ओर से घोषित ‘No Mining Zone’ में खान विभाग ने किया पत्थर खदान को नीलाम

Ranchi : पिछले दिनों खान विभाग की ओर से चाईबासा में पत्थर खदान का ई-ऑक्शन किया गया. ई-ऑक्शन के जरिये विभाग ने निषांत रोडलाइंस को सरबिल पत्थर खदान आवंटित की. लेकिन जिस जमीन में पत्थर खदान विभाग ने जारी किया है, उसे खान विभाग ने ‘नो माइनिंग जोन’ घोषित कर रखा है. ऐसे पत्थर खदान को चालू करने को लेकर बिडर से लेकर स्थानीय प्रशासन तक में संशय है. सरबिल गांव चाईबासा वन प्रमंडल के अंतर्गत आता है. सरबिल को नोवामुंडी और जामपानी के समीप है. ‘नो माइंनिंग जोन’ घोषित होने से वन विभाग की ओर से खदान शुरू करने के पहले एनओसी मिलने में परेशानी आ सकती है. नोवामुंडी और जामपानी सारंडा और चाईबासा के निकटतक क्षेत्रों में है. इसी क्षेत्र में सरबिल स्थित है. ऐसे में खदान को ई आक्शन के जरिये लेने के बाद भी लीज धारक को इसे चालू कराने में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा.

क्षेत्र में पहले भी आयी है ऐसी समस्या

चाईबासा वन प्रमंडल के अंतर्गत पहले भी ऐसी समस्याएं आयी है. जिले के नोवामुंडी क्षेत्र में ही भनगांव आयरन ओर माइंस ऑक्शन कर आंवटित तो किया गया. लेकिन वन भूमि और खान विभाग के आपसी विवाद के कारण इस खदान को नहीं खोला जा सका. जबकि भनगांव में 2018 को ही राजस्थान की खनन कंपनी साउथ ईस्ट माइनिंग लिमिटेड को लेटर आफ इंटेंट दिया था. मगर संरक्षित वन क्षेत्र में आने के कारण से वन विभाग की ओर से एनओसी नहीं दिया गया.

2017 में घोषित किया ‘नो माइनिंग जोन’

चाईबासा वन प्रमंडल की मानें तो चाईबासा और सारंडा के मैनेजमेंट प्लान फॉर सस्टेनेबल माइनिंग के तहत नोवामुंडी का सरबिल क्षेत्र नो माइनिंग जोन में शामिल है. साल 2017 के भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ इनवायरमेंट एंड फॉरेस्ट्स (एमओईएफ) में प्रकाशित किया जा चुका है. ऐसे में इन खदानों को एनओसी मिलने में परेशानी होती है.

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