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फिर से आंदोलन के मूड में रसोईया व संयोजिका, कहा- विधानसभा चुनाव से पहले सरकार पूरी करे मांग

अगस्त माह के अंत या सितंबर के शुरुआती दिनों में हो सकता है आंदोलन

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Ranchi: पंद्रह सूत्री मांगों को लेकर फिर से राज्य की दो लाख पचास हजार रसोईया, संयोजिका और अध्यक्ष आंदोलन करने की तैयारी में है. इसे लेकर झारखंड प्रदेश विद्यालय रसोईया, संयोजिका अध्यक्ष संघ की बैठक मोरहाबादी में शुक्रवार को की गयी. जिसमें निर्णय लिया गया कि अगस्त माह के अंत या सितंबर के शुरुआती दिनों में संघ की ओर से राज्यस्तरीय प्रदर्शन किया जायेगा. वर्तमान में राज्य में एक लाख 45 हजार रसोईया हैं. लेकिन राज्य शिक्षा विभाग की ओर से मात्र 84 हजार रसोईयों का मानदेय दिया जाता है. इन रसोईया संयोजिकाओं को दस माह का ही मानदेय दिया जाता है. ऐसे में बड़ी संख्या में रसोईया संयोजिका अपने मानदेय समेत अन्य मांगों से वंचित हो जाती हैं. संघ के अध्यक्ष अजीत प्रजापति ने कहा कि 2016 में दस हजार रसोईया संयोजिकाओं को काम से हटा दिया गया. संघ की प्रमुख मांगों में से एक इन दस हजार रसोईया संयोजिकाओं को वापस बहाल किया जाना है.

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पूर्व में भी किया गया है आंदोलन

इसकी जानकारी देते हुए प्रदेश अध्यक्ष अजीत प्रजापति ने कहा कि वर्तमान में राज्य की रसोईया संयोजिकाओं की स्थिति बेहाल हो गयी है. इसके पूर्व भी राज्य और केंद्र में आंदोलन किया गया, लेकिन किसी भी सरकार को रसोईया संयोजिका की परेशानियों से सरोकार नहीं है. केंद्र सरकार कहती है राज्य सरकार की जिम्मेवारी है, जबकि राज्य सरकार लगातार रसोईया संयोजिकाओं की मांगों को नजरअंदाज कर रही है. आगामी आंदोलन की रणनितियों को बताते हुए उन्होंने कहा कि दो-तीन दिनों में आंदोलन की तारीख तय कर ली जायेगी. उन्होंने मांग करते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले सरकार रसोईया संयोजिकाओं की मांगें पूरी करें.

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क्या हैं मांगें

झारखंड प्रदेश विद्यालय रसोईया संयोजिका अध्यक्ष संघ की पंद्रह सूत्री मांगों में सभी रसोईया संयोजिकाओं को न्यूनतम वेतन मिलने, रसोईया संयोजिका को स्थायी करने, हटाये गये दस हजार रसोईया कर्मियों को बहाल करने, 12 माह का मानदेय रसोईया संयोजिकाओं को देने समेत अन्य मांगें हैं.

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