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सीएम हेमंत से जुड़े खनन व शेल कंपनी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा-हाईकोर्ट याचिका की विश्वसनीयता तय करे

New Delhi: सुप्रीम कोर्ट में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े खनन लीज व शेल कंपनी मामले पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ व जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की खंडपीठ में सुनवाई हुई. झारखंड सरकार का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने मामले को राजनीति से प्रेरित बताते हुए याचिका खारिज करने की मांग की. इधर, ईडी का अधिवक्ता तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि खनन लीज हेमंत के कार्याकाल में आवंटित हुआ है, इसलिए मामला चलना चाहिए. पक्ष सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ईडी मामले की जांच करने के लिए स्वतंत्र है. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट से कहा कि जनहित याचिका की विश्वसनीयता तय करें. कोर्ट में झारखंड के महाधिवक्ता राजीव रंजन  भी उपस्थित रहे.

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याचिका के माध्यम से सीलबंद रिपोर्ट की मांग

सुप्रीम कोर्ट में 20 मई को सुनवाई के दौरान अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सरकार का पक्ष रखते हुए मामले की जल्द सुनवाई का आग्रह किया था. उन्होने कोर्ट को बताया हाईकोर्ट का आदेश सही नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में आदेश दिया है कि सीलबंद रिपोर्ट भी आरोपी को दिया जाना चाहिए. लेकिन झारखंड हाईकोर्ट इस मामले में आरोपी राज्य सरकार को सीलबंद रिपोर्ट नहीं दे रही है. जब तक ईडी के दस्तावेज नहीं मिलते तब तक जवाब दाखिल नहीं किया जा सकता है. राज्य सरकार के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाला शिवशंकर शर्मा भी कैविएट दायर किया है. झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता राजीव कुमार के माध्यम से कैविएट दायर किया गया. याचिकाकर्ता के तरफ से अधिवक्ता राजीव कुमार ने कोर्ट से कहा कि मामले में उनका पक्ष भी सुना जाए.

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