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विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के व्याख्यान में बोले गुरुमूर्ति, नोटबंदी नहीं होती, तो देश की अर्थव्यवस्था ढह जाती

आरबीआई के पूंजी ढांचे के मुद्दे पर एस गुरुमूर्ति ने कहा कि आरबीआई के पास 27-28 प्रतिशित का आरक्षित भंडार है, जो रुपये के मूल्य में आयी हालिया गिरावट के कारण और बढ़ सकता है.

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NewDelhi : भारतीय रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल के सदस्य तथा आरएसएस के विचारक एस गुरुमूर्ति के अनुसार यदि नवंबर, 2016 में नोटबंदी नहीं की गयी होती, तो देश की अर्थव्यवस्था ढह जाती. गुरुमूर्ति ने कहा कि 500 और 1,000 रुपये जैसे बड़े मूल्य के नोटों का इस्तेमाल रीयल एस्टेट तथा सोने की खरीद में किया जाता था. बता दें कि गुरुमूर्ति विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के व्याख्यान में बोल रहे थे.  इस क्रम में उऩ्होंने कहा कि नोटबंदी से 18 माह पूर्व 500 और 1,000 रुपये के नोट 4.8 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गये थे. यदि नोटबंदी नहीं होती, तो हमारा हाल 2008 के सब प्राइम ऋण संकट जैसा हो जाता. गुरुमूर्ति ने कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ होता, तो भारतीय अर्थव्यवस्था ढह जाती. 19 नवंबर, सेामवार को भारतीय रिज़र्व बैंक के बोर्ड की होने वाली बैठक से पूर्व एस गुरुमूर्ति ने बैंक के आरक्षित भंडारण के नियम में बदलाव की भी वकालत की. कहा कि आरबीआई के पास बहुत बड़ा आरक्षित भंडार है और दुनिया के किसी भी केंद्रीय बैंक के पास इतना आरक्षित भंडारण नहीं है. बता दें कि कुछ महीने पहले ही गुरुमूर्ति आरबीआई बोर्ड के निदेशक नियुक्त किये गये हैं.  गुरुमूर्ति ने छोटे एवं मंझोले उद्योगों के लिए कर्ज़ नियमों को आसान बनाने की भी वकालत की, जो देश की जीडीपी का 50 प्रतिशत है.

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सरकार एक नीति बनाने के लिए कह रही है कि आरबीआई के पास कितना आरक्षित भंडार हो

आरबीआई और वित्त मंत्रालय के बीच विवाद शुरू होने के बाद सार्वजनिक तौर पर पहली बार टिप्पणी करते हुए गुरुमूर्ति ने कहा कि यह गतिरोध अच्छी बात नहीं है. बता दें कि आरबीआई के बोर्ड की बैठक में पीसीए के नियमों को सरल करने, आरक्षित भंडारण को कम करने और एमएसएमई को ऋण बढ़ाने समेत सरकार द्वारा उठाये गये विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है. आरबीआई के पूंजी ढांचे के मुद्दे पर एस गुरुमूर्ति ने कहा कि आरबीआई के पास 27-28 प्रतिशित का आरक्षित भंडार है, जो रुपये के मूल्य में आयी हालिया गिरावट के कारण और बढ़ सकता है. आप यह नहीं कह सकते हैं कि इसके पास बहुत आरक्षित भंडार है और वे धन मुझे दें दें. मेरे ख्याल से सरकार भी यह नहीं कह रही है. जहां तक मेरी समझ है, सरकार एक नीति बनाने के लिए कह रही है कि केंद्रीय बैंक के पास कितना आरक्षित भंडार होना चाहिए. अधिकतर केंद्रीय बैंकों के पास इतना आरक्षित भंडार नहीं होता है, जितना आरबीआई के पास है. गुरुमूर्ति ने कहा है कि सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच गतिरोध का होना कोई अच्छी स्थिति नहीं है.

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