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सीएम के गृहनगर में ही ‘आयुष्‍मान कार्ड’ फ्लॉप, जिम्‍मेदार कौन: झाविमो

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Ranchi: झाविमो के केन्द्रीय प्रवक्ता योगेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा है कि आयुष्मान भारत के आगाज के दूसरे ही दिन कार्ड का इंतजार करते-करते सीएम के ही गृहनगर के एमजीएम अस्पताल में डायरिया पीड़िता रीता देवी की मौत ने इस योजना की पोल खोलकर रख दी है. रीता की मौत ने बता दिया है कि इस योजना से जनता को कितना लाभ व भविष्य में इस योजना का क्या हश्र होने वाला है. वहीं दूसरा वाकया भी सीएम के गृहनगर का ही है, जहां एमजीएम अस्पताल में निरीक्षण करने गये एमसीआई के डा रवि‍न्द्रनाथ साहा अस्पताल में मरीजों की हालत व गंदगी देखकर गिर पड़ते हैं. उन्होंने तो अस्पताल को तबेले से भी बदतर बतलाया, अब झारखंड में चिकित्सा व्यवस्था का आलम समझा जा सकता है. झाविमो ने पहले ही कहा है कि यह योजना एक महज बीमा योजना है. यह मरीजों के इलाज में खर्च का भुगतान करेगी न कि अस्पताल में बैठकर उनका इलाज. बगैर संसाधनों को दुरूस्त व चिकित्सकों की मानसिकता बदले स्वास्थ्य महकमे में सुधार की कल्पना कैसे की जा सकती है.

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बिना तैयारी के शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना चुनावी स्टंट

भाजपा ने आधी-अधूरी तैयारी व पूर्व से ही चल रहे योजना में थोड़ा फेरबदल कर व इसका नया नामकरण कर देशवासियों को केवल गुमराह करने का काम किया है. इस योजना को लेकर कसीदे पढ़ रहे भाजपाई व राज्य सरकार को यह बताना चाहिए कि आखिर चिकित्सकों की लापरवाही से हुई रीता देवी की मौत का जिम्मेवार कौन है? जिम्मेवार लोगों पर अब तक सरकार ने क्या कार्रवाई की? किसी भी योजना की सफलता उसके क्रियान्वयन, सरकार की इच्छाशक्ति व साफ नीयत पर निर्भर करती है जो कि भाजपा के पास नहीं है. भाजपा किसी भी योजना का लेकर केवल शोर-शराबा करती है ताकि, वह चुनावी फायदा ले सके. इन्हें इन योजनाओं की सफलता व जनहित से कोई सरोकार नहीं है. झाविमो भी चाहती है कि जनता का नि:शुल्क व समुचित इलाज हो. लेकिन, धरातल पर काम कुछ भी नहीं हो रहा है. केवल डींगे हांकने वाली भाजपा की इस संस्कृति का पार्टी सदैव विरोध करती रहेगी.

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