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हिमालय में फिर हिममानव येती की मौजूदगी के संकेत, भारतीय सेना ने विशालकाय पैरों के निशान की तस्वीरें जारी की

1921 में  हेनरी न्यूमैन नाम के एक पत्रकार ने ब्रिटेन के खोजकर्ताओं के एक दल का इंटरव्यू लिया था.  खोजकर्ताओं ने दावा किया था कि उनको पहाड़ पर पैरों के विशालकाय निशान दिखाई पड़े थे.  

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NW Desk : भारतीय सेना ने रविवार को कुछ तस्वीरें ट्वीट कीं, जिनमें विशालकाय पैरों के निशान दिखाई दे रहे हैं. बर्फ पर पैरों के  निशाना नेपाल के पास स्थित मकालू बेस कैंप पर पाये गये हैं.    निशान आकार में 32×15 इंच तक के हैं. यह असामान्य हैं.    तस्वीरों के माध्यम से भारतीय सेना ने हिमालय में हिममानव की मौजूदगी के संकेत दिये हैं.   क्या धरती पर हिम मानव या येती का अस्तित्व वाकई है? हिमालय पर महामानव की मौजूदगी का सालों पुराना सवाल एक बार फिर चर्चा में है.  यह पहली बार नहीं है, जब बर्फ पर बने इन निशानों ने हिमालय पर हिममानव के संकेत दिये हैं.

दुनिया के सबसे रहस्यमय प्राणियों में से एक येती की कहानी लगभग हजारों साल पुरानी बताई जाती है.  लद्दाख के कुछ बौद्ध मठों ने दावा किया था कि हिममानव येती उन्होंने देखा है.  वहीं शोधकर्ताओं ने येती को मनुष्य नहीं बल्कि ध्रुवीय और भूरे भालू की क्रॉस ब्रीड यानी संकर नस्ल बताया है;  कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि येती एक विशालकाय जीव है, जिसकी शक्लोसूरत तो बंदरों जैसी होती है, लेकिन वह इंसानों की तरह दो पैरों पर चलता है.  इसे देखे जाने के रोमांचक किस्से अक्सर सुने जाते रहे हैं.  हालांकि इसे लेकर वैज्ञानिक भी एकमत नहीं हैं.

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सिकंदर ने हिममानव को देखने की इच्छा जताई थी

नैशनल जिऑग्राफिक की एक रिपोर्ट के अनुसार 326 ईसा पूर्व में सिकंदर ने सिंधु घाटी को जीता था.  इस जीत के बाद सिकंदर ने हिममानव को देखने की इच्छा जताई थी.  स्थानीय लोगों ने उनको बताया कि हिममानव काफी ऊंचाई पर पाये जाते हैं.   जिस वजह से वे येती को पकड़ नहीं सकते हैं.  बता दें कि आधुनिक समय में सबसे पहले 1921 में हिममानव को देखने का दावा किया गया था. हेनरी न्यूमैन नाम के एक पत्रकार ने ब्रिटेन के खोजकर्ताओं के एक दल का इंटरव्यू लिया था.

खोजकर्ताओं ने दावा किया था कि उनको पहाड़ पर पैरों के विशालकाय निशान दिखाई पड़े थे.  उनके गाइड ने बताया था कि वे निशान मेतोह-कांगमी के हैं.  मेतोह का मतलब होता है आदमी जैसा दिखने वाला भालू और कांगमी का मतलब बर्फों पर पाया जाने वाला इंसान. टेलिग्राफ यूके की एक रिपोर्ट के अनुसार 1925 में एनए तोम्बाजी नाम के एक फटॉग्रफर ने येती के बारे में बताया कि उसकी आकृति बिल्कुल इंसान के जैसी थी.  वह सीधा खड़ा होकर चल रहा था.  बर्फ के बीच उसका डार्क कलर नजर आ रहा था.  जहां तक मैं देख पाया, उसने कोई कपड़ा नहीं पहन रखा था.

पहली बार विख्यात पर्वतारोही एरिक शिप्टन सबूत दिखाने का काम किया . 1951 में ब्रिटिश पर्वतारोही एरिक शिम्पटन एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए एक वैकल्पिक मार्ग की तलाश पर निकले थे.  इस दौरान उन्हें पैरों कि विशालकाय निशाने मिले.  उन्होंने इनको अपने कैमरे में कैद कर लिया;  इसके बाद हिमालय पर काल्पनिक महामानव के होने की चर्चा फिर सुर्खियों में छा गयी.  इसके साथ ही हिम मानव के लिए शेरपा शब्द येती प्रचलन में आया.  हालांकिआलोचकों का दावा था कि यह आकृति बर्फ के पिघलने से बनी है.

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1986 और  2007 में भी येती होने का दावा

1986 में मशहूर पर्वतारोही रीनहोल्ड मेसनर येती से सामना होने का दावा किया था. 2007 में अमेरिका में एक टीवी शो को होस्ट करने वाले जोश गेट्स ने भी कुछ इस तरह का दावा किया था.  उन्होंने कहा था कि हिमालय में एक झरने के करीब बर्फ पर उनको पैरों के तीन रहस्यमय निशान मिले थे.  हालांकि स्थानीय लोगों ने गेट्स की बात को खारिज कर दिया था;  उन्होंने कहा था कि वह भालू के पैरों के निशान थे जिसे गेट्स ने गलत समझ लिया.

रूस की सरकार ने भी साल 2011 में येती में दिलचस्पी दिखाई थी.  इसी चीज को लेकर रूस की सरकार ने पश्चिमी साइबेरिया में विशालकाय पैरों वाले जानवर के एक्सपर्ट की एक कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया था.  कॉन्फ्रेंस में जॉन ने दावा किया था कि येती का न सिर्फ वजूद है बल्कि वे अपने रहने के लिए घर भी बनाते हैं.  वहीं कुछ अन्य वैज्ञानिकों ने उस दावे को खारिज कर दिया था.

सैंपल 40 हजार साल पहले पाये जाने वाले ध्रुवीय भालू के

बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार 2013 में ऑक्सफर्ड के जेनेटिक्स के विशेषज्ञ ब्रायन साइक्स ने येती से संबंधित नमूने मंगवाये थे.  दुनिया भर से येती के कथित बाल, दांत और टिशू भेजे गये थे.  ब्रायन के पास कुल 57 सैंपल पहुंचे थे जिनमें से 36 पर उन्होंने शोध किया.  उन 36 सैंपल को उन्होंने अपने पास मौजूद अन्य जानवरों के डीएनए के नमूने से मिलाया.  ज्यादातर सैंपल किसी न किसी जानवर के डीएनए से मेल खा गया.  सिर्फ दो सैंपल अलग निकले. ये सैंपल आज से करीब 40 हजार साल पहले पाये जाने वाले ध्रुवीय भालू के पाये गये.  साइक्स का मानना था कि ये नमूने एक संकर नस्ल के हैं जो ध्रुवीय भालू और भूरे रंग के भालू के बीच संकरण से पैदा हुए हैं.

2017 में एक बार फिर येती के कथित दांत, हड्डी, बाल, त्वचा और मल के नमूने की जांच की गयी.  नमूने हिमालय और तिब्बत की पठारी में स्थित मठों, गुफाओं और अन्य स्थानों से जमा किये गये  थे.  शोधकर्ताओं ने उस क्षेत्र और दुनिया के अन्य इलाकों से भालुओं और अन्य जानवरों का नमूना भी जमा किया. येती के कुल नौ नमूनों में से आठ एशियाई काले भालू, हिमालयायी भूरे भालू या तिब्बती भूरे भालू से मैच कर गये.

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