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पाकिस्तान एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में, चीन, तुर्की और सऊदी अरब ने भी नहीं दिया साथ, कंगाली की अेार पाकिस्तान

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Islamabad :  पाकिस्तान  आतंकवाद को लेकर विश्‍व में  अलग-थलग  पड़ गया है. खबर आयी है  कि फाइनेंशल एक्शन टास्ट फोर्स (एफएटीएफ) ने पाकिस्तान पर शिकंजा कसते हुए उसे ग्रे लिस्ट में  डाल दिया है.  बता दें  कि  पाकिस्तान पर आरोप है कि वह आतंकवादियों की आर्थिक मदद को रोक पाने में असफल रहा है.  इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान को आशंका है कि अब उसे ब्लैक लिस्ट में न डाल दिया जाये. जानकारी के अनुसार ब्लैक लिस्ट से  बचने के लिए पाकिस्तान ने 26 सूत्रीय एक्शन प्लान बनाया था, लेकिन वह बच नहीं  सका. एक्शन प्लान में कहा गया था कि आतंकियों को दी जाने वाली आर्थिक मदद किस प्रकार रोकी जायेगी और इसके लिए कौन कौन से कदम उठाये जायेंगे.  आश्‍चर्यजनक रूप से इसमें मुंबई हमले के मास्टर माइंड हाफिज सईद को दी जा रही आर्थिक मदद पर भी रोक लगाने की बात कही गयी थी. स्‍़थानीय मीडिया के अनुसार यह फैसला एफएटीएफ की पैरिस में हुई बैठक में बुधवार रात किया गया.

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पाकिस्तान के वित्त मंत्री शमशाद अख्तर पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व कर रहे थे  

बैठक में पाकिस्तान के वित्त मंत्री शमशाद अख्तर पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व कर रहे थे.  जान लें कि एफएटीएफ  अंतर्राज्यीय निकाय है जो धन शोधन तथा आतंकवादी वित्तीयन का सामना करने के लिए मानक निर्धरित करता है. इसकी स्थापना 1989 में हुई थी. बता दें  कि ग्रे लिस्ट में आने से पाकिस्तान को आर्थिक नुकसान पहुंचेगा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी उसकी छवि और धूमिल होगी.  हालांकि  वित्त मंत्री  अख्तर ने एफएटीएफ से आग्रह किया था कि पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से हटा दिया जाये.  पैरिस में हुई बैठक में अमेरिका, जर्मनी और फ्रांस ने पाकिस्तान को ग्रे सूची में रखने का समर्थन किया.  बता  दें कि  बैठक में अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के अलावा पाकिस्तान के खास सहयोगी चीन, तुर्की और सऊदी अरब भी मौजूद थे.  पाकिस्तान को  इस  बात  से  झटका लगा  कि  उसके सहयोगियों ने भी इस ग्रे लिस्ट के फैसले का पूर्ण समर्थन किया.

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