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चार साल में 8 नगर आयुक्त आए और गये,धनबाद मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल को कौन पसंद आए ?

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Roshan Kumar Sinha

Dhanbad: इसे ही कहते हैं पावर. धनबाद नगर निगम के मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल ने आईएएस अफसरों को औकात बता दी. अपने चार साल के छोटे से कार्यकाल में अग्रवाल ने अब तक 7 आईएएस अफसरों को रिजेक्ट किया है. इनका कार्यकाल अभी एक डेढ़ साल और बाकी है. इस दौरान वह क्या करेंगे कोई नहीं जानता. किसी को याद नहीं कि धनबाद के किसी सफेदपोश ने आईएएस अफसरों के साथ ऐसा सलूक किया हो.

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चुटकियों में आईएएस का तबादला !

धनबाद की राजनीति में एक से एक चलतीवाले नेता आए और गये. उनका नाम लेने वाला भी अब नहीं है. यहां के कई नेता विभिन्न दलों के शासन में मंत्री बने. पर ऐसी चलती की जब मन हो किसी आईएएस की छुट्टी कर दें, एक-दो नहीं सात-आठ की ऐसा कोई उदाहरण नहीं.

कांग्रेस के शासन में यहां के डीसी रहे एमएम झा की बदली से नाराज लोगों ने क्या. क्या पापड़ नहीं बेले आखिर मुख्यमंत्री बदल कर ही उनकी बदली में सफलता मिली. कुछ कड़े डीसी-एसपी की बदली के लिए लोगों ने दिल्ली, पटना तक लाखों की थैलियां पहुंचाई इसके बाद भी जैसा चाहा वैसा अफसर एकाध बार ही मिला. मगर, धनबाद नगर निगम में तो आईएएस इस तरह बदले गये जैसे कोई मामूली बात हो. यहां तो मेयर अग्रवाल की पसंद ही सब कुछ है. जहां किसी ने हिलने की कोशिश की तो उसकी कुर्सी हिल गयी.

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जाते-जाते नगर आयुक्त ने मेयर के करीबियों पर चलायी कलम

नगर आयुक्त राजीव रंजन और मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल के बीच चल रहे विवाद में नगर आयुक्त को निगम से दूसरे विभाग में ट्रांसफर कर दिया गया. वही निगम आयुक्त जाते-जाते मेयर के करीबियों को निपटा गए हैं. मेयर के करीबी प्रोग्राम ऑफिसर रवि कुमार और अधिवक्ता मनीष अग्रवाल को कार्यमुक्त कर दिया. जबकि सिटी मैनेजर संतोष कुमार व प्रकाश साहू की बर्खास्तगी के लिए सरकार को पत्र लिख दिया है.

सिटी सेंटर के बाद से ही सुर्खियों में आया तबादला का मामला

सिटी सेंटर की मापी नगर आयुक्त रमेश घोलप के द्वारा कराने एवं अवैध ज़मीन पर डोजर चलाने पर मेयर चन्द्रशेखर अग्रवाल को नागवार गुजरी. और यहीं से दोनों के संबंधों में खटास शुरू हो गई थी. अंततः एकाएक नगर आयुक्त के तबादले का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है. इससे 2 दिनों तक नगर आयुक्त रमेश घोलप के तबादले की चर्चाएं जोरों पर थी.

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ट्रांसफर से पूर्व लगभग 4 माह पहले नगर आयुक्त रमेश घोलप ने नगर निगम में योगदान दिया था. धनबाद आने के बाद नगर आयुक्त ने सबसे पहले अतिक्रमण को अपना निशाना बनाया. पहले बिग बाजार के बाहर बनी घेराबंदी को हटाया. उसके बाद वह सिटी सेंटर की मापी करने पहुंच गए.

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बस यहीं से नगर आयुक्त और मेयर के बीच तानातनी शुरू हो गई. मॉल व होटलों की मापी शुरू की गई. शहर के जनप्रतिनिधि होने के नाते मेयर पर व्यवसायियों का दबाव बढ़ता गया. झारखंड की राजनीति में मेयर शेखर अग्रवाल की राजनीतिक पहुंच किसी से छिपी नहीं है. मेयर से सीधी लड़ाई नगर आयुक्त के लिए भारी पड़ती दिख रही है. मेयर और नगर आयुक्त के बीच चल रही खींचतान रांची के गलियारे में भी चर्चा का विषय है.

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 गंदी राजनीति का शिकार हो रहे अधिकारी- चेंबर

रमेश घोलप के जाने के बाद मेयर की पहल पर आठ अक्तूबर 2016 को प्रमोटी आईएएस नगर आयुक्त के रूप में मनोज कुमार ने धनबाद नगर निगम में योगदान दिया था. लगभग 14 महीने के छोटे कार्यकाल में नगर आयुक्त ने जिले के लिए कई योजनाएं धरातल पर उतारी. योजनाओं को लेकर मेयर ने भी सहयोग किया. लेकिन जैसे ही मनोज कुमार अपने मुताबिक काम करने लगे, ये मेयर को नागवार गुजरने लगा और कुछ दिन के बाद ही इनका भी ट्रांसफर हो गया.

वही श्री कुमार का ट्रांसफर होते ही, सोशल मीडिया पर सीइओ के तबादले पर सवाल उठने लगे थे. चेंबर ऑफ कॉमर्स के मधुरेंद्र सिंह ने लिखा है कि क्या होगा नगर निगम का, समझ से परे है. पूर्व सीइओ घोलप के बाद मनोज कुमार अच्छा काम कर रहे थे. फिर से अधिकारी गंदी राजनीति के शिकार हो गये हैं.

सबसे कम दिन रहे रमेश घोलप, सबसे ज्यादा रहे मनोज कुमार

नगर निगम के 15 वें प्रभारी नगर आयुक्त के रूप में सिद्धार्थ शंकर चौधरी ने 1 फरवरी 2015 से लेकर 31 मार्च 15 तक रहे. इनके बाद स्थाई नगर आयुक्त के रूप में विनोद कुमार सिंह ने 1 अप्रैल 15 से लेकर 27 दिसंबर 15 तक रहे. छवि रंजन 28 दिसंबर 15 से लेकर 25 जून 2016 तक रहे, इनके चले जाने के बाद कुछ दिनों के लिए उपायुक्त ऐ दोड्डे निगम के प्रभार में 26 जून 16 से लेकर 23 जुलाई तक रहे.

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फिर स्थाई रूप से रमेश घोलप 22 जुलाई से लेकर 29 नवंबर तक रहे, मनोज कुमार 7 अक्टूबर 16 से लेकर 3 नवंबर 2017 तक रहे. राजीव रंजन 4 दिसम्बर 17 से लेकर 30 अगस्त से 18 रहे, वही वर्तमान में चंद्रमोहन प्रसाद कश्यप है. जो फिलहाल निगम में अपने योगदान दे रहे हैं. वही एक-दो छोड़ बाकी सभी के साथ मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल ने नगर आयुक्त के साथ किसी न किसी योजनाओं को लेकर विवाद बढ़ता गया. जिससे नगर आयुक्त का ट्रांसफर होता गया.

18 जून को 2015 को मेयर ने ली शपथ

29 मई 2015 को चुनाव परिणाम की घोषणा हुई. जिसमें मेयर ने अपने प्रतिद्वंद्वी शमशेर आलम को 42 हज़ार 494 मतों से विजयी हासिल की. वही मेयर बनने के बाद 18 जून को डीआरडीए सभागार में चंद्रशेखर अग्रवाल ने शपथ ली.

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