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पहली बैठक में फॉर्म में नजर आये स्वास्थ्य सचिव कुलकर्णी, अधिकारियों-कर्मचारियों को दिया कार्यशैली सुधारने का आदेश

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Ranchi : स्वास्थ्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने रिम्स में अपनी पहली समीक्षा बैठक की. उन्होंने सभी विभागों की सिलसिलेवार ढंग से समीक्षा की. साथ ही, अधिकारी-पदाधिकारी को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिये. स्वास्थ्य सचिव ने दो घंटे तक अधिकारियों के साथ हुई इस बैठक के दौरान कई मामलों में अपनी नाराजगी भी जाहीर की. कुलकर्णी ने सभी अधिकारी, पदाधिकारी एवं कर्मचारियों को अपनी कार्यशैली में सुधार लाने का आदेश दिया. रिम्स डायरेक्टर डॉ आरके श्रीवास्तव ने बताया कि रिम्स परिवार की ओर से नये सचिव का स्वागत किया गया. साथ ही, यह उम्मीद भी की जा रही है कि जो लंबित पड़े टेंडर हैं, उनका अविलंब निपटरा होगा.

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एक सप्ताह में जमा करें थर्ड और फोर्थ ग्रेड में रिक्तियों की सूची : स्वास्थ्य मंत्री

बैठक की अध्यक्षता कर रहे स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी ने बताया कि मुख्य रूप से रिम्स में थर्ड और फोर्थ ग्रेड की रिक्तियों पर विचार किया गया. इसमें एडिशनल डायरेक्टर अमित कुमार को निर्देश दिया गया है कि एक सप्ताह में सूची तैयार कर विभाग को सौंपें. इसके बाद बहाली प्रक्रिया आरंभ की जायेगी. इसके अलावा आउटसोर्सिंग में भुगतान नहीं होने के मामले को भी प्रमुखता से लिया गया. मेडाल और अन्य आउटसोर्सिंग को भुगतान क्यों नहीं हुआ है, इस पर सचिव ने रिपोर्ट मांगी है. वहीं, इस बैठक में सफाई के मुद्दे पर भी चर्चा हुई, जिसमें सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने सफाई से संबंधित पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि रिम्स परिसर में कहीं भी गंदगी नजर नहीं आनी चाहिए. इमरजेंसी से लेकर सभी वार्ड, रिम्स के बाहर दीवारों पर फैली गंदगी को जल्द साफ करने को कहा. इस मौके पर रिम्स के डायरेक्टर डॉ आरके श्रीवास्तव, सुपरिंटेंडेंट डॉ विवेक कश्यप, डिप्टी सुपरिंटेंडेंट डॉ. संजय कुमार समेत रिम्स के अन्य आला अधिकारी मौजूद थे.

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भोजन के मामले को सचिव ने लिया गंभीरता से

स्वास्थ्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने रिम्स में भोजन के मामले को भी गंभीरतापूर्वक लेते हुए कहा कि रिम्स में मरीजों के भोजन में भी कोई कमी नहीं होनी चाहिए. जिस मरीज को जो डायट दिया गया है, उसका पूरा पालन हो. जो सॉलिड खाना नहीं खा सकते, उन्हें लिक्विड भोजन ही दिया जाये.

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न्यूज विंग ने प्रकाशित की थी खबर

रिम्स में भोजन के मामले पर न्यूज विंग ने खबर प्रकाशित की थी, जिसमें कहा गया था कि ऐसे मरीज जिन्हें डॉक्टर ने भोजन के रूप में लिक्विड लेने का परामर्श दिया है, उन्हें राटी और चावल दिया जा रहा है. ऐसे में मरीज को भूखे ही रहना पड़ रहा है, जिससे उनकी तबीयत सुधरने की बजाय और बिगड़ रही है. इस मामले को स्वास्थ्य सचिव ने गंभीरता से लिया है.

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