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अमेरिकी विशेषज्ञ की नजर में पुलवामा आतंकी हमले में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ  

प्रधानमंत्री मोदी इसे आसानी से नहीं छोड़ सकते, लेकिन इस बार पाकिस्तान भारत के किसी भी एक्शन पर चुप नहीं बैठ सकता. इस तरह से दोनों देशों के बीच तनाव ज्यादा बढ़ गया है.

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Washington / NewDelhi : जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमले को लेकर दक्षिण एशिया मामलों के अमेरिकी विशेषज्ञ ने कहा है कि इस हमले के पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ हो सकता है. इस आतंकी हमले में अब तक 37 से भी अधिक जवान शहीद हो चुके हैं और कई घायल हैं.  संयुक्त राष्ट्र की ओर से आतंकवादी घोषित पाकिस्तान स्थित आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद द्वारा जिम्मेदारी लेने के बाद अमेरिकी विशेषज्ञ ने शक जताया कि यह हमला बताता है कि अमेरिका जैश-ए-मोहम्मद (जेएएम) और कई अन्य आतंकी संगठनों पर कार्रवाई के लिए पाकिस्तान पर दबाव बनाने में नाकाम रहा है. बता दें कि सीआईए के पूर्व विश्‍लेषक ब्रूस रेडिल ने कहा कि हमले के बाद जेएएम का खुद इसकी जिम्मेदारी लेना इस बात पर गंभीर सवाल खड़े करता है कि इस ऑपरेशन के पीछे आईएसआई की भूमिका हो सकती है.

वर्तमान में ब्रूकिंग इंस्टीट्यूट थिंक टैंक में विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत रिडेल के अनुसार इस हमले के निशान पाकिस्तान में मिलते हैं. यह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमराख खान के कार्यकाल के पहली बड़ी चुनौती है. उन्होंने कहा कि इमरान खान के लिए यह बड़ी चुनौती है और उनके प्रशासन के सामने पहली गंभीर चुनौती है.

  पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूह अब भी कश्मीर में सक्रिय

इस क्रम में अमेरिका में बराक ओबामा प्रशासन के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एनएससी) के अधिकारी रहे अनीष गोयल ने कहा कि इस भयावह हमले में से पता चलता है कि पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूह किस तरह अब भी कश्मीर में सक्रिय हैं. हमले के तुरंत बाद इसकी जिम्मेदारी लेने का दावा कर जैश-ए-मोहम्मद (जेएएम) स्पष्ट रूप से संकेत दे रहा है कि वह इस क्षेत्र में परेशानी पैदा करता रहेगा और पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव बढ़ाता रहेगा. कहा कि इस हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कश्मीर में सक्रिय सभी आतंकी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बढ़ने की संभावना है.  काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस की अलेसा एरेस ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन यह हमला दिखाता है कि अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय नीतियों के पास आतंकियों के खिलाफ एक्शन के लिए पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए सीमित विकल्प हैं. बड़ा सवाल यह है कि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी इस संबंध में क्या कर सकती है.

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यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस के मोइद युसूफ कहते हैं कि भारत-पाकिस्तान के बीच वर्तमान स्थिति संकटकारी है. कहा कि प्रधानमंत्री मोदी इसे आसानी से नहीं छोड़ सकते, लेकिन इस बार पाकिस्तान भारत के किसी भी एक्शन पर चुप नहीं बैठ सकता. इस तरह से दोनों देशों के बीच तनाव ज्यादा बढ़ गया है. इससे पूर्व अमेरिका ने पुलवामा जिले में आतंकवादी हमले की शुक्रवार को निंदा करते हुए सभी देशों से आतंकवादियों को सुरक्षित पनाह और समर्थन नहीं देने की अपील की.

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