JharkhandLead NewsRanchi

सांगठनिक आपातकाल की स्थिति में झारखंड कांग्रेस, दिल्ली के निर्णयों से पार्टी नेता हलकान

Gyan Ranjan

Ranchi: पांच राज्यों में मिली चुनावी हार, कई राज्यों में बड़े कांग्रेसी नेता समेत झारखंड के पूर्व प्रदेश प्रभारी के भाजपा का दामन थामने की वजह से झारखंड कांग्रेस सांगठनिक आपातकाल के दौर में पहुंच गया है. आलम यह है कि पार्टी का छोटा हो या बड़ा निर्णय अब रांची के बजाय दिल्ली से हो रहा है. प्रदेश अध्यक्ष और विधायक दल के नेता तो पिछले दो महीने से शोभा की वस्तु बने हुए हैं. सभी निर्णय दिल्ली से थोपे जा रहे हैं. स्थिति यह है कि पार्टी आलाकमान के हाथों प्रदेश कांग्रेस की कमान चली गई है. प्रदेश स्तर के तमाम पदाधिकारियों के पावर सीज कर दिए गए हैं. एक तरह से देखा जाए तो नए प्रभारी जब से आए हैं तब से सबपर भारी बने हुए हैं. पूर्व मे जो नेता लंबे समय तक प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं, केन्द्रीय मंत्री रहे हैं, उत्तरप्रदेश जैसे राज्य के प्रभारी रहे हैं, वैसे नेता को नए प्रदेश प्रभारी जिला का प्रभारी बना दिए हैं.

इसे भी पढ़ें : सीतामढ़ी के कुख्यात इंदल महतो की नेपाल में हत्या, कई मामलों का वांछित था

संगठन का काम सरकार मे पार्टी कोटे के मंत्रियों, विधायकों पर थोपे जा रहे हैं. विधायकों को मुख्यमंत्री से नहीं मिलने का फरमान जारी किया जा रहा है. कहा जा रहा है कि विधायकों को जो भी बातें सरकार से करनी हो वो संगठन के समक्ष रखे. संगठन को लगेगा कि इस बात को सरकार के समक्ष ले जाना चाहिए तब विधायक मुख्यमंत्री के समक्ष बात रख सकते हैं. पार्टी के अंदर कोई कुछ बोलने की स्थिति मे नहीं है.

आलाकमान को सता रहा है पार्टी मे टूट का डर

दरअसल जब से पूर्व प्रदेश प्रभारी आरपीएन सिंह ने भाजपा का दामन थामा है तब से ही प्रदेश कांग्रेस एक तरह से राजनीतिक संक्रमण के दौर से गुजर रही है. पार्टी आलाकमान के भीतर भाजपा का डर समाया हुआ है. विधायकों के टूट का डर कांग्रेस को तभी से परेशान किए हुए है. नए प्रभारी जब से आए हैं, सारा निर्णय अकेले ले रहे हैं. यहां तक कि विधायक दल की बैठक भी वो खुद कर रहे हैं. पिछले दिनों एक सप्ताह के भीतर प्रदेश अध्यक्ष समेत सरकार मे शामिल सभी मंत्रियों और उच्च पदस्त पदाधिकारियों को दिल्ली तलब किया गया है. लगातार नए-नए फरमान जारी किए जा रहे हैं.

इसे भी पढ़ें : Amrit Mahotsav: जमशेदपुर के द‍िव्‍यांग भी बने खास र‍िकार्ड के भागीदार, आप भी जान‍िए

यह भी जानकारी मिल रही है कि बहुत जल्द फिर सभी को दिल्ली तलब किया जा सकता है. आलाकमान के कुछ निर्णयों का विरोध भी शुरू हो गया है. विधायक दल के नेता और हेमंत सरकार मे वरिष्ठ मंत्री आलमगीर आलम ने दिल्ली मे मंत्रियों को छह जिले का प्रभार बनाए जाने का विरोध किया था लेकिन इन्हें चुप कर दिया गया. पाँच अप्रैल को दिल्ली मे आयोजित बैठक मे जब सरकार मे पार्टी के मंत्रियों पर कुछ और जिम्मेवारी सोपी गई तो विधायक दल के नेता आलमगीर आलम ने इसपर आपत्ति जताई थी. इस्तीफे तक की पेशकश कर दी थी. लेकिन प्रभारी ने दो टूक जवाब दिया कि इन जिम्मेवारियों को निभानी ही पड़ेगी.

सुबोधकांत, बालमुचू और सुखदेव को जिला तक किया गया सीमित, विवाद

नए प्रभारी के आने के बाद से प्रदेश कांग्रेस मे ऐसे ऐसे निर्णय लिए जा रहे हैं जिससे नेता कार्यकर्ता हलकान हैं. पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय जो कभी उत्तरप्रदेश जैसे राज्य के प्रभारी रह चुके हैं उन्हें जिला का प्रभारी बनाया गया है. इसी तरह पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप कुमार बालमुचू और सुखदेव भगत को भी जिला का प्रभारी बनाया गया है. इसको लेकर पार्टी के भीतर विवाद शुरू हो गया है. लेकिन आलाकमान के डर से कोई भी खुलकर कुछ नहीं बोल पा रहा है. एक तरह से देखा जाए तो प्रदेश कांग्रेस के भीतर आग सुलग रही है. आलाकमान के निर्णयों से पार्टी के विधायकों, नेताओं और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं मे व्याप्त नाराजगी कभी भी सतह पर आ सकती है. दबे जुबान तो अब यह चर्चा शुरू हो गई है कि आलाकमान ने ऐसे व्यक्ति को प्रभारी बनाया है जिन्होंने बिहार और उत्तराखंड के चुनाव मे टिकट वितरण मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और पार्टी का लुटिया डुबोया था.

इसे भी पढ़ें : पूर्व सीएम रघुवर की सरकार से अपील, कहा- गर्मी से राहत को 10 बजे तक ही चले स्कूल

Related Articles

Back to top button