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4जी के जमाने में मेदिनीनगर सेंट्रल जेल की सुरक्षा में लगे 2जी के जैमर, कैसे रुकेगी रंगदारी मांगने की घटनाएं?

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Dilip Kumar

Palamu : सरकार और पुलिस अपराध पर नियंत्रण के लिए पूरा दंभ भरती है. लेकिन इसकी जमीनी हकीकत तमाम दावों को पोल खोल कर रख देती है. पुलिस के साथ-साथ सरकार को भी मालूम है कि जेल से अपराधी अपने गुर्गों को फोन कर दिशा-निर्देश देते हैं और आपराधिक घटनाओं को लगातार अंजाम देते आ रहे हैं. लेकिन जेलों की सुरक्षा पुख्ता करने में कोई दिलचस्पी नहीं ली जा रही है.

4जी के जमाने में 2टी का लगा जैमर

ताजा और चैकाने वाला मामला मेदिनीनगर सेंट्रल जेल से जुड़ा हुआ सामने आया है. सुरक्षा के आधुनिकीकरण के बड़े-बड़े दावों के बीच मेदिनीनगर सेंट्रल जेल की सुरक्षा व्यवस्था वर्षों पुरानी 2जी के सहारे है. यहां 2 जी के जैमर लगे हैं. यह व्यवस्था करीब पांच वर्ष पुरानी है. जमाना 4जी का है और जल्द 5जी का समय आने वाला है. जेल में अपराधी 4जी के मोबाइल का धड़ल्ले से इस्तेमाल करते हैं, जिसकी तरंगों को रोकने में 2जी जैमर असहाय नजर आते हैं. ऐसे में सुरक्षा देने के पुलिस, जेल प्रशासन और सरकार के तमाम दांवे यहां आकर खोखले साबित हो जाते हैं.

जेल से मांगी जाती है रंगदारी  

मेदिनीनगर केंद्रीय कारा को सेंट्रल जेल का दर्जा दिये तीन से चार वर्ष हो गए हैं. लेकिन व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है. 2जी के मोबाइल जैमर से इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है. ऐसा नहीं है कि इस पुरानी जर्जर व्यवस्था की जानकारी गृह विभाग को नहीं है. जब कभी कारा सुरक्षा समिति की बैठक होती है, इस मसले को उठाया जाता है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने वाला यह गृह कारा विभाग पुरानी व्यवस्था का बदलने को अबतक तैयार नहीं हो पाया है. इससे जाहिर होता है कि इस विभाग को जेलों की सुरक्षा की कोई चिंता नहीं है.

व्हाट्सएप मैसेंजर से होती है बातें

सेंट्रल जेल में बंद अपराधियों को पूरी तरह मालूम है कि जेल परिसर में 2जी मोबाइल जैमर लगा हुआ है. 4जी मोबाहल के तरंगों को 2जी के जैमर रोक नहीं पायेंगे, इसलिए उनके द्वारा 4जी मोबाइल का इस्तेमाल किया जाता है. जेल सूत्रों का कहना है कि अपराधी ज्यादातर इंटरनेट के सहारे व्हाट्सएप मैसेंजर और कॉलिंग से बातें करते हैं, ताकि उनके मोबाइल का लोकेशन सामने नहीं आ सके. पुलिस का तकनीकी विभाग भी कॉलिंग को डिटेक्ट नहीं कर सके.

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टॉप नक्सली और शूटर बंद हैं सेंट्रल जेल में   

मेदिनीनगर सेंट्रल जेल में करीब 1200 विचाराधीन और सजायाप्ता कैदी बंद है. राज्य के कई इलाके के बड़े आपराधिक गिरोह के शूटर और टॉप नक्सली भी हैं.

कारा सुरक्षा समिति हुई बैठक, इन मामलों की हुई समीक्षा

जिले के उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी डॉ. शांतनु कुमार अग्रहरी की अध्यक्षता में कारा सुरक्षा समिति की आज बैठक हुई. बैठक में कारा में पदस्थापित बलों, प्रतिनियुक्ति बलों, अतिरिक्त बल की आवश्यकता और सुरक्षा उपकरणों की कार्यक्षमता की समीक्षा की गयी. पुलिस अधीक्षक इंद्रजीत महथा से कारा में डोर मेटल डिटेक्टर की उपलब्धता कराये जाने और 1-4 की अतिरिक्त बल की प्रतिनियुक्ति की बात कही. उन्होंने कारा अधीक्षक से वाटर पंप तथा वाटर टावर के निर्माण करने और 2जी से 4जी मोबाइल जैमर के उपलब्धता के लिए विभाग में अधियाचना भेजने का निर्देश दिया.

बैठक में ये रहे उपस्थित

बैठक में पुलिस अधीक्षक इंद्रजीत महथा, कारा अधीक्षक, कार्यपालक अभियंता (भवन प्रमंडल) कार्यपालक अभियंता (पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल पलामू), सार्जेंट मेजर उपस्थित थे.

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