Ranchi

स्वच्छता सर्वेक्षण में नहीं दिखा निगम जनप्रतिनिधियों का उत्साह, गोल्डन कार्ड बांट भाजपा को लोकसभा चुनाव जिताने की हो रही कोशिश

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  • हो रहा दावा- नगर पालिका चुनाव की तरह इस बार भी शहरी वोट मिला, तो विपक्ष हो जायेगा चारों खाने चित

Ranchi : रांची नगर निगम इस बार मोदी सरकार के स्वच्छता सर्वेक्षण से ज्यादा तरजीह लोकसभा चुनाव को देने में लगा हुआ है. ऐसा इसलिए, क्योंकि विपक्ष की बनती एकजुटता को देख भाजपा अब अपने निगम जनप्रतिनिधियों के मार्फत सरकार की योजनाओं का लाभ लेनेवाले लाभुकों को आकर्षित कर रही है. इसका जीता-जागता उदाहरण है कई पार्षदों के सहयोग से प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के तहत लाभुकों के बीच गोल्डन कार्ड का वितरण किया जाना. मेयर आशा लकड़ा के मुताबिक, विभिन्न पार्षदों ने अब तक करीब 3000 से अधिक (कुल 53 वार्डों में 1.60 लाख) गोल्डन कार्ड का वितरण कर दिया है. वहीं, स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 को लेकर केंद्रीय टीम रांची आयी और चली गयी, लेकिन इसकी जानकारी न ही किसी अधिकारी और न ही निगम के कर्मचारियों को रही. जानकारों का कहना है कि लोकसभा चुनाव का बिगुल बजने के बाद से ही भाजपा समर्थित मेयर-डिप्टी मेयर और पार्षद ऐसे लाभुकों पर हर स्तर पर ध्यान देने में लगे हैं. कुछ दिन पहले ऐसा ही एक आयोजन हरमू मैदान में शहरी समृद्ध योजना के नाम से हुआ था. योजना के माध्यम से निगम ने प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभुकों को एकजुट करने की कोशिश की थी. एक बार फिर भाजपा समर्थित ये जनप्रतिनिधि केंद्रीय योजनाओं का लाभ ऐसे लाभुकों तक पहुंचाने में दिन-रात लगे हुए हैं.

स्वच्छता सर्वेक्षण से ज्यादा लाभुकों को लाभ पहुंचाते ज्यादा दिखे जनप्रतिनिधि

मालूम हो 2019 का स्वच्छता सर्वेक्षण चार जनवरी से 31 जनवरी तक चला था. इस दौरान निगम ने शहर की सफाई का हर स्तर पर दावा किया. इसके उलट कई स्थानीय अखबारों ने इस दावे को सिरे से खारिज भी किया. सर्वेक्षण के दौरान न तो कई मुहल्लों से कूड़ा उठाया गया, न ही गीला और सूखा कचरा उठाने की पहल हुई. पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष के सर्वेक्षण में भी मेयर-डिप्टी मेयर की भागीदारी सुस्त दिखी. स्वच्छता सर्वेक्षण के समय अवधि को भी कम रखा गया. इतना ही नहीं, सर्वेक्षण के दौरान मेयर-डिप्टी मेयर इस ओर ध्यान देने से ज्यादा सरकार की महत्वाकांक्षी योजना आयुष्मान भारत योजना के तहत शहरी लाभुकों को गोल्डन कार्ड का लाभ पहुंचाते दिखे.

सर्वेक्षण से नाराज लोगों को दिया जा रहा लाभ

निगम के कुछ अधिकारी दबी जुबान से कह रहे हैं कि स्वच्छता सर्वेक्षण के कार्य से शहर के कई लोग निगम से नाराज हैं. वे जानते हैं कि सर्वेक्षण के दौरान भी सरकार ने शहर को स्वच्छ रखने की कोई विशेष पहल नहीं की. ऐसे में नाराज लाभुकों के बीच योजनाओं का पूरा लाभ देना जरूरी है. अपने पहले के कार्यकाल में संघर्ष करते दिखे मेयर और डिप्टी मेयर दोनों अपने दूसरे कार्यकाल में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते हैं. ऐसे में शहरी लाभुकों को भाजपा की ओर लाने के लिए निगम और उनके वार्ड पार्षद एक विशेष जरिया बन सकते हैं. अगर भाजपा अपनी इस रणनीति में सफल हो निगम क्षेत्र से अच्छा वोट पाती है, तो माना जा रहा है कि शहरी क्षेत्र में विपक्ष चारों खाने चित हो जायेगा, जैसी स्थिति नगरपालिका चुनाव में दिखने को मिली थी.

कोई राजनीतिक मंशा नहीं, सही लाभुकों को लाभ मिले, इसी पर है ध्यान :  मेयर आशा लकड़ा

गुरुवार को चौक-चौराहों के निरीक्षण में पहुंचीं मेयर आशा लकड़ा से न्यूज विंग संवादादाता ने इसे लेकर सवाल भी किया. इस उन्होंने कहा कि किसी भी परीक्षा की तिथि पहले से ही तय रहती है. परीक्षा की जांच टीम परीक्षा लेने आती है, तो किसी को बताकर नहीं आती है. ठीक उसी तरह का काम स्वच्छता सर्वेक्षण टीम के अधिकारियों का था. अगर बात कर टीम निरीक्षण करने आती, तो स्वच्छता की सच्चाई से पूरी तरह वाकिफ नहीं होती. वहीं, भाजपा के वोट बैंक के लिए लाभुक में आयुष्मान भारत योजना के तहत गोल्डन कार्डों का वितरण किये जाने के सवाल पर मेयर ने कहा कि निगम का काम सरकारी योजनाओं की जानकारी लाभुकों को देना है. इसका किसी पार्टी विशेष से कोई विशेष संबंध नहीं है. अगर वार्ड पार्षद के सहयोग से कार्ड का वितरण नहीं हो, तो सही लाभुकों को योजना का लाभ नहीं मिल पायेगा. इसी को देख वह और डिप्टी मेयर विभिन्न वार्डों में जाकर जनता को जागरूक कर रहे हैं.

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