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मोदी सरकार के केंद्र में सत्ता संभालते ही बैंक फर्जीवाड़े में हुई है वृद्धि

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Girish Malviya

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बताइये! ऐसा चौकीदार देश को मिला है, जो अपने देश के बैंको में हो रहे फ्रॉड को रोक नहीं पा रहा है…जब से नरेंद्र मोदी सरकार ने केंद्र में सत्ता संभाली है, बैंकों के फर्जीवाड़े में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है…

2017- 18 की अवधि में बैंक फ्रॉड के 6800 से अधिक मामले प्रकाश में आये हैं. जिसमें 71 हजार,500 करोड़ रुपये की रकम सामने आई है, जबकि पिछली साल 2017-18 में बैंक फ्रॉड के 5916 मामले सामने आये थे. इनमें 41 हजार 167 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी हुई थी….

नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने से पहले 2013-14 में फर्जीवाड़े का ये आंकड़ा मात्र 10,170 करोड़ रुपए का था. लेकिन उसके बाद इस रकम में उत्तरोत्तर वृद्धि होती ही गयी…. मोदी सरकार के सत्ता संभालने के बाद 2014-15 में बैंकों के फर्जीवाड़े 19,361 करोड़ रुपए हो गए….

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इस साल भी पिछले साल की तुलना में 71 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. यह आंकड़ा तब का है, जब मई 2015 में भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंकों में बढ़ रहे फर्ज़ीवाड़े पर निगरानी रखने के लिए एक केंद्रीय फ्रॉड रजिस्ट्री की स्थापना कर चुकी है…..

अखबारों में जो रिपोर्ट छपी है, उसके अनुसार पिछले 11 वित्त वर्ष में बैंक फ्रॉड के कुल 53,334 मामले प्रकाश में आये हैं, और इनके जरिये 2.05 लाख करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई है…..

लेकिन ध्यान से देखा जाए तो लगभग 112 हजार करोड़ के मामले पिछले 2 वर्षों में ही प्रकाश में आए हैं और यह तबसे है, जबसे मोदी सरकार ने डिजिटल इंडिया का राग अलापना शुरू किया है.

साल 2021 तक देश में डिजिटल लेनदेन चार गुना तक बढ़ने की उम्मीद है, डिजिटल लेनदेन के अपने खतरे हैं, पिछले कुछ सालों में ऐसे कई मामले दर्ज हुए हैं, जिससे यह पता लगता है कि नेट बैंकिंग के जरिए जालसाज आपके बैंक खाते तक आसानी से पहुंच जाते हैं…..

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इस धोखाधड़ी को रोकने के लिए मोदी सरकार साइबर सुरक्षा का कोई कानून पास नहीं कर पाई है दरअसल यह उनकी प्राथमिकताओं में कभी रहा ही नही……

दो साल में लगभग 1 लाख 12 हजार करोड़ की धोखाधड़ी से एक ओर बात साफ दिख रही है कि बैंकों की ख़राब हालत के लिए सिर्फ़ एनपीए को ज़िम्मेदार ठहराना ग़लत है. मोदी सरकार अपने यहां हो रहे वित्तीय घोटालों को बैंकिंग फ्रॉड का नाम देकर छुपाने की कोशिश कर रही है. जबकि नारा दिया जाता है कि देश नही लुटने दूंगा….सरकारी आंकड़े ही बता रहे हैं कि बड़ी तेजी से देश लुट रहा है.

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(लेखक आर्थिक मामलों के जानकार हैं,ये उनके निजी विचार हैं)

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