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जिस जमीन खरीद मामले में हेमंत पर बीजेपी लगाती है आरोप, उसी मामले में जांच से बीजेपी सरकार ने खींच लिए थे हाथ

Akshay Kumar Jha

Ranchi: हेमंत सोरेन ने गलत पता बता कर सीएनटी एक्ट का उल्लंघन किया. झारखंड के कई जिलों में जमीन खरीदा. हेमंत सोरेन ही नहीं बल्कि उनके परिवार कई लोगों ने ऐसा किया है. हेमंत सोरेन बतायें कि उनका स्थायी पता क्या है. अलग-अलग जिले में जो जमीन खरीदी गयी है, उसके लिए अलग-अलग थानों का पता होने के सबूत हैं. सीएनटी एक्ट के मुताबिक एक आदिवासी दूसरे आदिवासी की जमीन तभी खरीद सकता है, जब दोनों एक ही थाना क्षेत्र के हों. लेकिन सोरेन परिवार ने अलग-अलग थाने का पता दिया है. इसका पुख्ता सबूत भी अपने पास होने की दावा बीजेपी करती है, पर बीते पांच सालों में सरकार की तरफ से हेमंत सोरेन पर किसी तरह की जांच या कार्रवाई से बचती रही है. पूर्ण बहुमतवाली बीजेपी सरकार ने जेएमएम पर जब-जब दबाव बनाना चाहा इस मामले को तूल दिया. लेकिन दूसरी तरफ एसआइटी की रिपोर्ट आने के बावजूद न ही किसी सक्षम एजेंसी से जांच हुई और न ही किसी तरह की कार्रवाई.

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दीवान इंद्रनील सिन्हा ने की थी हेमंत सोरेन की एसआइटी के पास शिकायत, जांच के बाद सरकार ने नहीं की कार्रवाई

गलत तरीके से आदिवासियों की जमीन खरीदे जाने और सीएनटी एक्ट का उल्लंघन करने के आरोपों की जांच करने के लिए सरकार की तरफ से एसआइटी बनायी गयी थी. दीवान इंद्रनील सिन्हा ने एसआइटी से पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ अवैध तरीके से आदिवासियों की जमीन और सरकारी जमीन लेने का आरोप लगाया था. एसआइटी के सचिव धर्मेंद्र पांडेय ने रांची डीसी को भेज कर जांच रिपोर्ट देने को कहा था. लेकिन बाद में एसआइटी ने इस मामले को जांच के दायरे से अलग बता दिया. जांच रिपोर्ट में कई नेताओं के खिलाफ आरोप को सही बताते हुए कार्रवाई की अनुशंसा की गयी थी.

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क्या मिला था एसआइटी को टास्क

  •  छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी) और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (एसपीटी) की परिधि में आनेवाली जमीन के अवैध हस्तांतरण की जांच
  • सीएनटी एक्ट 1908 की धारा-71ए के अंतर्गत शेड्यूल एरिया रेगुलेशन 1969 के अधीन विशेष विनियमन पदाधिकारियों के द्वारा अनुसूचित जनजाति की जमीन के तथ्यों को छुपाते हुए नियम विरुद्ध हेरा-फेरी कर भ्रष्टाचार से आच्छादित मामलों की जांच

क्या सीएम के चांद पर जाने का इंतजार कर रही है बीजेपीः हेमंत

जमीन मामले पर लगे आरोपों को नकारते हुए हेमंत सोरेन ने ट्वीट करते हुए कहा है कि बीजेपी को फिर से याद दिलाना चाहूंगा कि यह निरंकुश तानाशाह सरकार आप की ही है. आप हर तरफ से जांच कराने को स्वतंत्र हैं. फिर क्या आप चांद पर मुख्यमंत्री जी को भेजने का इंतजार कर रहे हैं. मैं हर जांच के लिए तैयार हूं. लेकिन पहले मुद्दे पर आइए. अपनी नाकामी, नकारेपन का हिसाब दीजिए. इस ट्वीट के बाद न्यूज विंग से बात करते हुए बीजेपी के झारखंड प्रदेश के महामंत्री दीपक प्रकाश ने कहा है कि ऐसा नहीं है कि बीजेपी सरकार कार्रवाई से पीछे हट रही है. लेकिन सही समय आने पर बीजेपी कोई भी काम करती है. हालांकि दीपक प्रकाश का यह बयान हेमंत सोरेन की प्रतिक्रिया का माकूल जवाब नहीं माना जा सकता. दीपक प्रकाश ने ऐसा जवाब देकर सवाल से बचने का प्रयास किया है.

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पांच साल में लगाए 15 बार आरोप, लेकिन कार्रवाई एक बार भी नहीं

ऐसा देखा गया है कि बीजेपी लगातार बीते करीब पांच सालों से हेमंत सोरेन पर जमीन खरीद में सीएनटी एक्ट के उल्लंघन का आरोप लगा रही है. लेकिन गौर करनेवाली बात यह है कि कभी भी सरकार ने कार्रवाई करने की पहल नहीं की. यहां तक कि एसआइटी को ही ठंडे बस्ते में डाल देने का काम किया. दूसरी तरफ हेमंत सोरेन और उनकी पार्टी हर बार कहती है कि इस मामले की जांच किसी भी एजेंसी से करा ले. वो पीछे नहीं हटेंगे. ऐसे में लाख टके का सवाल यह है कि आखिर बीजेपी जांच से पीछे क्यों भागती है. दूसरी तरफ बीजेपी अगर जांच नहीं करा सकती तो फिर बार-बार एक ही तरह के आरोप क्यों लगाते रहती है. जनता के बीच आम चर्चा यह है कि जब पूर्ण बहुमत वाली बीजेपी की सरकार अपने पांच साल के पूरे कार्यकाल में आरोपों की जांच नहीं करा सकी. तो यह कैसे माना जाए कि कोई और सरकार इस मामले की जांच करवाएगी और यह सामने आएगा कि हेमंत सोरेन ने ही नहीं बल्कि किन-किन लोगों ने सीएनटी एक्ट का उल्लंघन किया है.

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