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बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ का लोकसभा क्षेत्र चाईबासा कुपोषण के मामले में देश भर में सबसे अव्वल

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Ranchi: झारखंड एक बार फिर से शर्मसार हुआ है. शर्मिंदा होने के पीछे वजह झारखंड बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ का लोकसभा क्षेत्र चाईबासा है. ऐसा कहने के पीछे की वजह LIVE MINT में छपा एक आर्टिकल है. 26 मार्च को छपे इस आर्टिकल में हार्वर्ड युनिवर्सिटी और टाटा ट्रस्ट के संयुक्त रूप से किए गए उस सर्वे के आंकड़े को पेश किया गया है, जो देश भर में कुपोषण पर आधारित है. देश में पहली बार ऐसा सर्वे हुआ है, जो लोकसभा क्षेत्र पर आधारित है, न कि जिलों पर. इस सर्वे में इस बात का खुलासा होता है कि राज्य ही नहीं बल्कि देश भर में चाईबासा एक ऐसा लोकसभा क्षेत्र है, जहां कुपोषण के मामले देश भर में सबसे ज्यादा हैं. आर्टिकल में इस बात पर ताज्जुब जताया गया है कि झारखंड में और खास कर चाईबासा में कुपोषण के इतने भयावह आंकड़े के बावजूद ऐसे मुद्दे चुनावी मुद्दे नहीं बन पाते हैं.

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राज्‍य ही नहीं देश में सबसे खराब स्थिति चाईबासा की

LIVE MINT में छपे इस सर्वे के मुताबिक झारखंड राज्य ही नहीं बल्कि देश भर में कुपोषण के मामले में चाईबासा नंबर वन पर है. बताया जा रहा है कि चाईबासा में करीब 67 फीसदी बच्चे ऐसे हैं जिनका उम्र के मुताबिक वजन काफी कम है. 50 फीसदी से ज्यादा बच्चे का कद उम्र के मुताबिक कम है और हर तीसरे बच्चे का कद के मुताबिक वजन कम है. यह एक भयावह तस्वीर है. वहीं आर्टिकल में पीएम मोदी के लोकसभा क्षेत्र वाराणसी का भी जिक्र है. वाराणसी में 48.4 फीसदी बच्चे अंडरवेट हैं. राहुल गांधी के लोकसभा क्षेत्र में 45.2 बच्चों की उम्र के मुताबिक लंबाई कम है और पीलीभीत की सांसद मेनका गंधी के लोकसभा क्षेत्र में 50.6 फीसदी बच्चों की उम्र के मुताबिक लंबाई कम है. ये सारे कुपोषण के लक्ष्ण हैं. इस हिसाब से देश में सबसे ज्यादा कुपोषित लोकसभा क्षेत्र बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और चाईबासा से सांसद लक्ष्मण गिलुआ का है.

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हेमंत ने किया ट्वीट, कहा- सीएम और प्रदेश अध्यक्ष माफी मांगें

“राज्य के मुखिया रघुवर दास और झारखंड राज्य के बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और चाईबासा के सांसद लक्ष्मण गिलुआ जी आप लोगों ने हम सभी को शर्मिंदा किया है. हर उस 3.25 करोड़ की झारखंड की आबादी को शर्मिंदा किया है. दिल दहलाने वाली यह तस्वीरें आप पर और आपके नया झारखंड के उन विज्ञापनों पर धिक्कार हैं. अगर आपमें विवेक हो तो माफी मांगें और अभी से काम करना शुरू करें.” ये बातें जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने एक ट्वीट के जरिए कही हैं. अपने ट्विटर हैंडल पर हेमंत सोरेन ने उस खबर और खबर में छपी उन तस्वीरों को भी लगाया है, जो चाईबासा लोकसभा क्षेत्र में कुपोषण के वाकई दिल दहला देनेवाली सच्चाई को दर्शाती है.

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स्थिति इतनी भयावह फिर भी क्यों नहीं बनता है कुपोषण एक चुनावी मुद्दा

LIVE MINT में छपे इस आर्टिकल में इस बात पर काफी तफसील से लिखा हुआ है कि आखिर कुपोषण में झारखंड इतना पिछड़ा हुआ है. फिर भी चुनाव के दौरान यह चुनावी मुद्दा क्यों नहीं बनता है. इस वजह को जानने के लिए उस लोकसभा क्षेत्र और आस-पास के विधायकों से भी पूछा गया.

मामले पर अर्थशास्त्री ज्या द्रेंज का कहना है कि “यह आंकड़े बताते हैं कि आखिर क्यों झारखंड के लोग शिशु स्वास्थ्य पर बात नहीं करते हैं. झारखंड में बहुत तरह की समस्याएं हैं. जैसे आरक्षण, दूसरे समुदायों को मिलने वाले आरक्षण से परेशानी, जमीन के लिए लड़ाई. जब समाज बंटा हुआ हो, तो कॉमन इश्यू पर संघर्ष करना मुश्किल हो जाता है. जब लोगों के पास कोई साधन उपलब्ध होता है और उसे वापस लिया जाता है, तो उसके लिए लोग संघर्ष करते हैं. लेकिन जब उनके पास कोई साधन लंबे समय तक नहीं होता है, तो वो उसके लिए संघर्ष नहीं करते हैं.”

सोशल पॉलिसी पर काम करने वाले सिराज दत्ता का कहना है कि “अधिकतर लोगों में ये धारणा हो गयी है कि क्या करें नहीं मिला तो नहीं मिला.”

जगन्नाथपुर की विधायक गीता कोड़ा का कहना है कि “मुझे लगता है कि कुपोषण के पीछे वजह राजनीति और राजनीतिक पार्टियां हैं. सिर्फ कुपोषण ही नहीं. बल्कि सभी स्वास्थ्य सेवाओं का भी हाल यही है.”

बहरागोड़ा के विधायक कुणाल षाड़ंगी का कहना है कि “लोग मुश्किल से यह सवाल करते हैं कि आखिर यह अस्पताल काम क्यों नहीं काम कर रहा है. जहां तक कुपोषण की बात है तो जब किसी की मौत होती है, तो कुछ दिनों तक लोग सवाल करते हैं. फिर भूल जाते हैं.”

खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय का कहना है कि “हम राजनीति करनेवाले लोग कुपोषण जैसे मुद्दों का इस्तेमाल अपने निजी स्वार्थ के लिए करते हैं. जबकि होना यह चाहिए कि ऐसे मुद्दों को पार्टी के मुद्दों से ज्यादा तव्वजो मिले.”

साभारः LIVE MINT

सभी तस्वीरें LIVE MINT की

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