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तालाब सौंदर्यीकरण में कंक्रीट की चहारदीवारी के निर्माण पर पूरी तरह से रोक

Ranchi: मुख्य सचिव डॉ डीके तिवारी ने राज्य के शहरी, अर्द्ध शहरी, नगर निकाय और ग्रामीण क्षेत्रों से बहुतायत में प्राप्त हो रहे पक्की चहारदीवारी निर्माण के प्रस्तावों और उन पर कई करोड़ रुपये के व्यय को देखते हुए उसके लिए मानक तय किये हैं. इस बाबत सभी सचिवों व उपायुक्तों को दिशा-निर्देश दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि कहां पर किस तरह की चहारदीवारी बनेगी. साथ ही कहा है कि चहारदीवारी निर्माण सुरक्षा, भूमि के अतिक्रमण से बचाव एवं निजता के उद्देश्य से ही कराये जाने चाहिए. नगर निगम और शहरी निकाय क्षेत्रों में तालाब के सौंदर्यीकरण में कंक्रीट की दीवार से घेराबंदी पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने का निर्देश देते हुए कहा है कि इससे जल स्रोतों में पानी की कमी, प्राकृतिक हरियाली तथा पर्यावरण के लगातार नुकसान होने की स्थिति बन रही है. उन्होंने कहा है कि पक्की चहारदीवारी की जगह अन्य विकल्प मौजूद हैं, जो पर्यावरण, प्राकृतिक सुंदरता तथा जल संरक्षण जैसे मानकों के अनुरूप हैं. साथ ही इसकी लागत भी तुलनात्मक दृष्टिकोण से कम है.

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चहारदीवारी निर्माण के चार उद्देश्य

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पूरे राज्य से मुख्यत: विद्यालयों, सरकारी भूमि, खेल के मैदान एवं धार्मिक स्थलों की चहारदीवारी से घेराबंदी को लेकर मुख्य सचिव ने उसके निर्माण के चार उद्देश्य तय किये हैं. उसके अनुसार सुरक्षा के दृष्टिकोण से, अतिक्रमण से बचाव और सीमांकन, निजता की रक्षा एवं सीमांकन तथा सौंदर्यीकरण मानक होंगे. उन्होंने कहा है कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से चहारदीवारी निर्माण में ईंट और ग्रिल का उपयोग करें तथा इसे संवेदनशील स्थलों और भंडारण स्थल तक ही सीमित रखें.

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ग्रामीण क्षेत्रों के लिए मानक

मुख्य सचिव ने ग्रामीण क्षेत्रों में चहारदीवारी निर्माण का वर्गीकरण करते हुए कहा है कि स्कूलों एवं छात्रावास सहित स्वास्थ्य केंद्रों व आंगनबाड़ी केंद्रों में सिर्फ फेंसिंग करें. साथ ही कब्रिस्तान की ट्रेंचिंग और पिलरिंग, तालाब की हेजिंग और ग्रिलिंग,बालिका विद्यालयों और छात्रावासों की चहारदीवारी ईंट और कॉन्सरटिना वायर तथा पंचायत भवनों की फेंसिंग और हेजिंग कराने का निर्देश दिया है.

अर्द्धशहरी और नगर निगम क्षेत्रों के मानक

अर्द्धशहरी क्षेत्रों में चहारदीवारी निर्माण के मानक तय करते हुए मुख्य सचिव ने कहा है कि प्रखंड-अंचल परिसर सहित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की सड़क की तरफ ग्रिल वॉल तथा पीछे की ओर चहारदीवारी बनायें. वहीं विद्यालयों में हेजिंग और फेंसिंग तथा कॉलेजों, आइटीआइ, छात्रावासों की घेराबंदी हेजिंग, फेंसिंग और ग्रिल से करें. इसी तरह महिला कार्यकारी छात्रावास, आवासीय परिसरों तथा थाना परिसरों की चहारदीवारी के मानक तय किये हैं.

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नगर निगम क्षेत्र के थानों के सामने होंगे ग्रिल

नगर निगम क्षेत्र में चहारदीवारी निर्माण के तय मापदंड के अनुसार थानों के सामने सड़क की ओर सिर्फ ग्रिल से घेराबंदी होगी. अन्य दिशाओं में चहारदीवारी बनायी जा सकेगी. अस्पतालों में भी यही व्यवस्था रहेगी. पार्कों की चौतरफा घेराबंदी सिर्फ ग्रिल से होगी. छात्र छात्रावास तथा विद्यालय व महाविद्यालयों की सिर्फ फेंसिंग और ग्रिल से घेराबंदी होगी. सिर्फ महिला छात्रावासों में पक्की चहारदीवारी करायी जा सकेगी. उसके साथ सरकारी कार्यालयों की सड़क की तरफ घेराबंदी ग्रिल से तथा अन्य दिशाओं में आवश्यकतानुसार होगी. आवासीय परिसरों की घेराबंदी को तीन वर्गों में बांट कर चहारदीवारी निर्माण के निर्देश दिये गये हैं.

बिना राज्य सरकार की स्पष्ट अनुमति के मापदंड से विचलन नहीं हो

मुख्य सचिव ने चहारदीवारी निर्माण के मानक तय करने के साथ यह भी स्पष्ट किया है कि बिना राज्य सरकार की स्पष्ट अनुमति प्राप्त किये अलग ढंग से निर्माण को गंभीरता से लिया जायेगा. वहीं, जहां पक्की चहारदीवारी तथा ग्रिल का प्रावधान है, वहां विभाग और कार्यालय स्वेच्छा से हरित वॉल बनाने के लिए स्वतंत्र होंगे. उन्होंने कहा है कि ग्रीन हेज फेंसिंग एग्रो क्लाइमेट जोन के दृष्टिकोण से उपयुक्त है. साथ ही जैविक दबाव तथा अन्य प्रतिकूल मानकों से बचाव के लिए भी बेहतर विकल्प है. इससे पर्यावरण, जैव विविधता तथा जल संरक्षण जैसे मानकों की अभिवृद्धि सुनिश्चित हो सकेगी.

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