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झारखंड में 19 सालों में खेल कोटे से सिर्फ 5 को मिली नौकरी, अब बदलेगी खिलाड़ियों को नौकरी देने की पॉलिसी

Gaurav

Ranchi : झारखंड बने 19 साल हो गये. इन 19 सालों में कई सरकारें आयीं और गयी, लेकिन राज्य के खिलाड़ियों और खेल नीति को लेकर हालात नहीं बदले. झारखंड में खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए नयी नीति बनाने की बात कही गयी थी. पिछली रघुवर दास की सरकार ने राज्य से अंतराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी में समायोजित करने की नीति बनाने की बात थी, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया था.

अब हेमंत सोरेन के सरकार में आते ही खिलाड़ियों को समायोजित करने के लिए नौकरी देने की पालिसी में अब परिवर्तन किया जायेगा. पालिसी के पेचीदा होने के कारण अब सरकार फिर से खेल नीति बनाने पर काम कर रही है, और ये नीति कब तक बन जायेगी, ये विभाग के सचिव राहुल शर्मा बता पाने में असमर्थ है. उनका कहना है कि खेल नीति को लेकर निश्चित समय सीमा नहीं बताई जा सकती. इधर राज्य के प्रतिभावान खिलाड़ी सुरक्षित भविष्य के लिए आस लगाये बैठे हैं.

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2007 में बनी थी पॉलिसी

इससे पहले 2007 में इसको लेकर पॉलिसी भी बनी थी, जिसमें सरकारी नौकरियों में मेडल प्राप्त खिलाड़ी को 2 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही गयी थी. लेकिन पॉलिसी बनने के 19 सालों के बाद भी कुल 11 खिलाडियों को नौकरी नहीं मिल पायी है. राज्य के स्थापना के 19 सालों के बाद भी सिर्फ पांच खिलाड़ियों को ही नौकरी मिल पायी है. 2007 में पॉलिसी तो बनी पर वह सिर्फ कागजों पर सीमित रह गयी. खिलाड़ियों से दो बार आवेदन भी मांगे गये. 4500 से अधिक आवेदन मिले भी, लेकिन ये सिर्फ आवेदन तक ही सीमित रह गये. उस पर कोई विचार नहीं किया गया.

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खेल विभाग भी अपने विभाग में नहीं दे रहा नौकरी

खिलाड़ियों के उत्थान के लिए काम करने वाले खेल विभाग भी अपने विभाग की नियुक्तियों में खिलाड़ियों का ख्याल नहीं रखता. स्पोर्टस कोटा के तहत एक भी खिलाड़ी को अपने विभाग में नौकरी नहीं दे पाये, जबकि दूसरे विभाग से अधिकारियों को लाकर काम चलाया गया. विभाग और सीसीएल के द्वारा भी चलाये जा रहे जेएसएसपीएस में भी खिलाड़ियो को नौकरी नहीं मिल पायी है

 सिर्फ पांच खिलाड़ियों को नौकरी

राज्य गठन के बाद भी सिर्फ पांच खिलाड़ियों को ही राज्य सरकार ने नौकरी दी है. सभी पांचों खिलाड़ियों को नौकरी सिर्फ पुलिस विभाग में मिली है. अन्य किसी भी विभाग में आज तक किसी भी खिलाड़ी को नौकरी नहीं दी गयी है. राज्य सरकार द्वारा निकलने वाले सरकारी नौकरी के विज्ञापन में भी पॉलिसी के तहत दिये जाने वाले 2 प्रतिशत आरक्षण का भी जिक्र नहीं होता और न ही लाभ मिल पाता है.

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पलायन कर रहे खिलाड़ी

राज्य सरकार की बेरुखी के कारण राज्य को मेडल दिलाने वाले कई खिलाड़ियों ने दूसरे राज्यों का रुख कर लिया है. वे अब दूसरे राज्यों के लिए अपना जौहर दिखा रहे हैं. दूसरे राज्य की सरकार ने इन खिलाड़ियों की सुध भी ली है. वहां पर खिलाड़ियों को सरकार ने नौकरी भी दी है. सरकारी बेरुखी के कारण राज्य का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान बढ़ाने वाले खिलाड़ियों की उम्र भी सरकारी नौकरी की उम्मीद में खत्म हो गयी है.

16 जनवरी 2019 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में झासा के पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में 15 बिंदु पर लिखित सहमति बनी थी जिसका अनुपालन 1 वर्ष बीत जाने के बाद भी अभी तक नहीं हुआ है इसका अनुपालन सुनिश्चित कराने की बात बैठक में उभर कर सामने आयी. बैठक में 29 फरवरी तक आम सभा की बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया.

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