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मंत्री के दो बार ऑब्जेक्शन के बावजूद 6200 का मोबाइल 9253 में खरीदेगा समाज कल्याण विभाग

Akshay Kumar Jha

Ranchi: समाज कल्याण विभाग की मंत्री लुईस मरांडी ने आंगनबाड़ी सेविकाओं को बंटने वाले मोबाइल खरीदी में दो बार आपत्ति जतायी. लेकिन हुआ कुछ नहीं.

विभाग के अधिकारियों ने मंत्री की बात को दरकिनार करते हुए टेंडर ओपन किया और अब विभाग उस मोबाइल को 9253 रुपए में खरीदेगा जो आउटडेटेड है, साथ ही खुले बाजार में इसकी कीमत सिर्फ 6200 रुपए है.

मंत्री लुईस मरांडी को जब इस बात की जानकारी हुई कि टेंडर में एक ऐसा मोबाइल एल-वन हो सकता है जो आउटडेटेड है और टेंडर में उसकी कीमत 9253 लगायी है, जबकि खुले बाजार में इस मोबाल की कीमत काफी कम है तो, मंत्री ने पूरे टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए विभाग के सचिव को इस टेंडर को कैंसिल कर देने को लिखा.

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दोबारा मंत्री लुईस मरांडी ने टेंडर की फाइल पर टेकनिकल बिड की फिर से समीक्षा करने को लिखा. लेकिन विभाग के अधिकारियों को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ा कि मंत्री क्या कह रही हैं.

इतना होने के बावजूद टेंडर ओपन हुआ और Panasonic Eluga I-7 मोबाइल एल-वन हुआ. विभाग 24 जून को कंपनी को वर्क ऑर्डर देने की तैयारी कर रहा है.

ऐसे में फिर से सखी मंडलों को घटिया मोबाइल देकर जिस तरह से सरकार ने ठगने का काम किया था, वही काम आंगनबाड़ी सेविकाओं के साथ किया जायेगा.

जबकि सरकार कंपनी को बाजार कीमत से 3053 रुपए ज्यादा भी देगी. इन सारी प्रक्रियाओं के बीच अब सवाल उठ रहे हैं कि जान बूझ कर आखिर विभाग के अधिकारी एक घटिया और आउटडेटेड मोबाइल की खरीदी क्यों करना चाह रहे हैं. निश्चित तौर से इन सभी की बीच पैसों का बंदरबांट है.

जानिए कैसे यह मोबाइल है आउटडेटेड

यह मोबाइल पूरी तरह से आउटडेटेड है. इस मोबाइल की खुदरा बाजार में कीमत करीब 6200 रुपए है. इसके फीचर्स की बात करें तो Operating System. Android v7.0 (Nougat), 5.45 inches (13.84 cm) bezel-less display. MediaTek MT6737 Quad core Processor. 2 GB RAM. 16 GB internal storage, expandable upto 128 GB. 8 MP Rear Camera. 4000 mAh battery.

निश्चित तौर पर 4 GB RAM और 64 GB Internal Storage वाले जमाने में विभाग जिस मोबाइल को खरीदने की तैयारी कर रहा है, वो आउटडेटेड है और साथ ही झारखंड में कहीं भी इस कंपनी का न तो सर्विस सेंटर है और न ही आउटलेट.

कैसे बुना विभाग ने जाल

मोबाइल के लिए ई-टेंडर निकलने के बाद कई वेंडर्स मोबाइल प्रोडक्ट्स लेकर आए. इनमें से दो सैमसंग और एक विवो कंपनी के वेंडर थे. सैमसंग और विवो का जो मोबाइल टेंडर में भरा गया है, वो ऊंची कीमत के थे. बाजार में इन मोबाइल की कीमत 9500-10000 रुपए तक है.

ऐसे में Panasonic कंपनी का मोबाइल जिसकी बाजार में कीमत महज 6200 है, उसे बढ़े हुए मूल्य पर दिखाया गया. लेकिन सैमसंग और विवो के प्रोडक्ट्स की कीमत से कम. ताकि आसानी से वो एल-वन हो जाए. और हुआ भी वही.

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अब एक रास्ता विभाग के पास टेंडर रिवाइज का बचता है. लेकिन यह भी एक सोची समझी साजिश ही होगी. क्योंकि सैमसंग और विवो रिवाइज टेंडर में दो-तीन सौ रुपए कम होंगे.

लेकिन Panasonic 1000 रुपए तक कम हो सकता है. क्योंकि इस मोबाइल की कीमत पहले से काफी कम है. जाहिर तौर पर टेंडर के दौरान Panasonic प्रोडक्ट एल-वन कैटेगेरी में आ जायेगा और विभाग की तरफ से उसे खरीदा जायेगा.

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महाराष्ट्र और बिहार में भी लग चुके हैं मोबाइल खरीद में घोटाले के आरोप

ऐसा नहीं है कि यह काम पहली बार किसी राज्य में हो रहा है. इससे पहले महाराष्ट्र की महिला बाल विकास कल्याण विभाग की मंत्री पंकजा मुंडे पर 106,82,13,785 रुपए के मोबाइल खरीदी पर घोटाले का आरोप लग चुका है.

बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी एक खबर के मुताबिक, एनसीपी के नेता धनंजय मुंडे ने सरकार पर सस्ती मोबाइल फोन महंगे में खरीद कर घोटाला करने का आरोप लगाया था. आरोप था कि 6000 कीमत वाले मोबाइल को 8877 रुपए में खरीदा गया है.

वहीं बिहार में यह आरोप सरकार पर लग चुका है. रालोसपा ने समाज कल्याण विभाग में स्मार्ट फोन खरीद में वित्तीय घोटाला का आरोप लगाया था.

रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कहा था कि अक्टूबर 2018 में विभाग ने 33 हजार 914 स्मार्ट फोन खरीदे. इस मद में 31 करोड़ 04 लाख का भुगतान किया गया. भुगतान राशि के अनुसार, प्रति फोन की कीमत 9153 रुपए ही हुई.

लेकिन जिस फोन की खरीदारी हुई, उस समय बाजार में इसकी कीमत सात हजार से भी कम थी. यही नहीं, जिस मोबाइल की खरीद की गई, उसके फीचर्स और मेमोरी कम होने के कारण यह बाजार में नहीं चल रहे थे.

बाजार दर से दो हजार प्रति मोबाइल अधिक भुगतान कर विभाग ने छह करोड़ 78 लाख अधिक दिए. 33 हजार फोन खरीदने के लिए अगर कंपनी से बात की गई होती तो बाजार से भी कम पैसे देने पड़ते, लेकिन विभाग ने अधिक भुगतान किया.

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